संत का रूप धारण किए बना भगवंत का रूप प्रगट नही
आचार्य श्री ने कहा नारी स्वभाव से संग्रह वृति वाली होती है। इसी कारण तिजोरी की चाबी नारियों के पास रख दी जाती है। कुछ लोगो का धर्म नारी के भरोसे चल रहा है, कुछ लोगो का पुरुषों के भरोसे चल रहा है और कुछ लोगो का भगवान भरोसे चल रहा है। भगवान भरोसे चलने वाला धर्म शीघ्र स्माप्त हो जाता है। आचार्य श्री ने कहा बाजार में, बैंक में, ऑफिस आदि अनेक जगहों पर लोगों की सँख्या अधिक देखी जा रही है। सरकार ने वहाँ छूट भी दे रखी है जबकि धार्मिक स्थानों पर पावंदी लगा रखी है जो कि ठीक नही है। इसलिए धार्मिक स्थल पर धर्म क्रिया हेतु पावंदी नही लगाना चाहिये। पावंदी की जगहसावधानी बरतनी चाहिये। आचार्य श्री ने कहा कि पद और समय के अनुसार जो बड़ा है उसे बड़ा मानना चाहिए। परोसी हुई थाली ठुकरा कर नही जाना चाहिये। अन्यायी के यहाँ नोकरी नही करनी चाहिये, और किसी के गुप्त रहस्य को उजागर नही करना चाहिये।
15 अगस्त की चर्चा करते हुऐ कहा 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था उसी उपलक्ष्य में हम हर वर्ष स्वंतन्त्रता दिवस मनाते है। स्वतंत्रता दिवस खाने पीने और मौज मस्ती और छुट्टी बनाकर आराम करने के लिए नही आता बल्कि शहीदों को याद करने के लिए आता है हमारा देश मात्र 250 वर्ष गुलाम नही रहा बल्कि पृथ्वीराज चौहान के बाद से लगभग 700 - 800 वर्ष गुलाम रहा है ! हमने अग्रेजो को भगा दिया परन्तु जिन्होंने सस्कृति मिटाई आंतक फैलाया उन्हें नही भगा पाये सच्ची आजादी तभी होगी जब हमारा देश आतंकवाद से मुक्त हो जायेगा कुछ आतंकवादी आस्तीन के साँप बनकर बैठे है उनसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
दमोह। आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने जैन धर्म शाला में प्रातः कालीन स्वाध्याय में कहा कि संत का रूप धारण किये बिना भगवंत का स्वरूप धारण किये विना भगवंत का स्वरूप प्रगट नही हो सकता। द्रव्य लिंग धारी के विना भाव लिंग प्रगट नही हो सकता। रावण का उदाहरण देते हुये उन्होंने कहा सीता का हरण करने के बाद रावण सीता को अपने ओर आकर्षित करना चाहता था। लेकिन नही कर पाया, यह बात जब मंदोदरी को पता चली तो उन्होंने कहा कि सीता को रिझाने के लिये तुम राम का रूप धारण क्यो नही कर लेते। तब रावण ने कहा मैने तुम्हारे कहने के पूर्व मैने राम का रूप धारण किया लेकिन वह रूप धारण करने के बाद मेरे अंदर विकार भाव भी नही आता है, इससे सिद्ध है कि भेष के धारण करने का भी प्रभाव पड़ता है।आचार्य श्री ने कहा जो साधू का भेष धारण कर लेता है उसके अंदर साधुत्व की भावना प्रगट हो जाती है। साधुत्व की भावना प्रगट होने पर एक दिन भगवान के स्वरूप को धारण कर लेता है। गुरु की आज्ञा का पालन करना गुरु की सेवा है, घर मे रहो या साधु संत बनकर जंगल मे रहो, लेकिन निराकुल रहो। आकुलता संकल्प, विकल्प और तनाव पैदा करती है वही दुःख का कारण है। निराकुलता सुख का कारण है। धर्म करने में महिलाएं पुरषों से आगे रहती है, महिलाएं जितना धर्म, कर्म, पूजा, पाठ, भक्ति, आराधना और दान, उपवास कर लेती है उतना पुरुष नही कर पाते। महिलाओं में शारीरिक संरचनाओं के कारण उपवास करने की क्षमता पुरुषों से अधिक होती है। उप वास करने से जितनी कोशिकाये नष्ट होने पर पुनः बनने में पुरुषों को चार दिन लगता है उतनी कोशिकाएं बनने में नारी को मात्र दो दिन लगते है। नारी स्वयं अपने शरीर को पुष्ट रखती है और एक संतान का भी शरीर शिशु के रूप में निर्मित कर देती है इतनी जल्दी और अधिक कोशिकाये नारी उसी भोजन से विकसित कर लेती है जबकि नारी का भोजन एक दिन 2500 से 2800 कैलोरी होता है और पुरुष का 3000 से 3200 कैलोरी होता है।
आचार्य श्री ने कहा नारी स्वभाव से संग्रह वृति वाली होती है। इसी कारण तिजोरी की चाबी नारियों के पास रख दी जाती है। कुछ लोगो का धर्म नारी के भरोसे चल रहा है, कुछ लोगो का पुरुषों के भरोसे चल रहा है और कुछ लोगो का भगवान भरोसे चल रहा है। भगवान भरोसे चलने वाला धर्म शीघ्र स्माप्त हो जाता है। आचार्य श्री ने कहा बाजार में, बैंक में, ऑफिस आदि अनेक जगहों पर लोगों की सँख्या अधिक देखी जा रही है। सरकार ने वहाँ छूट भी दे रखी है जबकि धार्मिक स्थानों पर पावंदी लगा रखी है जो कि ठीक नही है। इसलिए धार्मिक स्थल पर धर्म क्रिया हेतु पावंदी नही लगाना चाहिये। पावंदी की जगहसावधानी बरतनी चाहिये। आचार्य श्री ने कहा कि पद और समय के अनुसार जो बड़ा है उसे बड़ा मानना चाहिए। परोसी हुई थाली ठुकरा कर नही जाना चाहिये। अन्यायी के यहाँ नोकरी नही करनी चाहिये, और किसी के गुप्त रहस्य को उजागर नही करना चाहिये।
15 अगस्त की चर्चा करते हुऐ कहा 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था उसी उपलक्ष्य में हम हर वर्ष स्वंतन्त्रता दिवस मनाते है। स्वतंत्रता दिवस खाने पीने और मौज मस्ती और छुट्टी बनाकर आराम करने के लिए नही आता बल्कि शहीदों को याद करने के लिए आता है हमारा देश मात्र 250 वर्ष गुलाम नही रहा बल्कि पृथ्वीराज चौहान के बाद से लगभग 700 - 800 वर्ष गुलाम रहा है ! हमने अग्रेजो को भगा दिया परन्तु जिन्होंने सस्कृति मिटाई आंतक फैलाया उन्हें नही भगा पाये सच्ची आजादी तभी होगी जब हमारा देश आतंकवाद से मुक्त हो जायेगा कुछ आतंकवादी आस्तीन के साँप बनकर बैठे है उनसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।



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