अहंकार और क्रोध अधिक हो तो शत्रु भी अधिक होते हैं
दमोह। जैन धर्मशाला में चातुर्मास संपन्न कर रहे वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने प्रातः कालीन स्वाध्याय कक्षा में जैन सिद्धांतों के बारे में बताते हुए कहा कि सपने तीन प्रकार के होते हैं। जो हम दिन भर क्रियाकलाप करते और जिसके संबंध में सोचते रहते हैं वे सब बातें अनकॉन्शियस माइंड में पड़ी रहती है जो सपने के माध्यम से प्रगट होती है, यह एक प्रकार का सपना है। दूसरे प्रकार का सपना वात, पित्त, कफ की प्रकृति के कारण आता है। जिसकी बात प्रकृति होती है उसे दौड़ने के उड़ने के एवं सांप आदि हिंसक प्राणियों के पीछा करने के सपने आते है। जिसकी कफ प्रकृति होती है उसे पानी बरसने के, नहाने आदि के सपने आते हैं। जिसकी पित्त प्रकृति होती है उसे अग्नि और लड़ाई झगड़े से संबंधित सपने आते हैं। ऐसे सपने फलदाई नहीं होते।
आचार्य श्री ने कहा कि लेकिन जो तीसरे प्रकार के सपने देवों के द्वारा आते हैं वे फलदाई होते हैं। फल देने वाले स्वप्न रात में 1 बजे से लेकर 3 बजे तक आते हैं। यदि बुरे सपने आएं तो नींद खुलने के बाद पुनः सो जाना चाहिए तो वे सपने निष्फल हो जाते हैं। यदि अच्छे सपने आएं तो नींद खुलने के बाद पुनः सोना नहीं चाहिए तभी उनका फल मिलता है। आचार्य श्री ने कहा हमें अपनी भारतीय संस्कृति, पुरातत्व, तीर्थ क्षेत्र और संस्कारों को बचाने की परम आवश्यकता है। यदि नहीं बचा पाएंगे तो प्रकृति हमें कभी माफ नहीं करेगी। आचार्य श्री ने कहा जिस आदमी के अन्दर अहंकार और क्रोध अधिक होता है उसके शत्रु भी अधिक होते हैं। अन्य करने के लिए किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है ये दोनों हमारे पतनके लिए पर्याप्त है अहंकार तभी उत्पन्न होता है जब आदमी यह भूल जाता है कि में एक ज्ञाता दृष्टा चेतन आत्मा हूं। जो मेरी पूजा प्रशंसा और सम्मान हो रहा है वह वास्तव में मेरा नहीं है बल्कि गुणों का हो रहा है इसलिए मुझे उस में ना पढ़कर अपने गुणों को चमकाना चाहिए। नफरत ना करके ज्ञान संयम आदि गुणोंकी रौशनी फैलाना चाहिए।
आचार्य श्री ने कहा कि जो संसार से थक जाते हैं, वे मंजिल प्राप्त नहीं कर पाते है। छल कपट करने वाली बनाबटी लेगों को मुक्ति नहीं मिलती है बल्कि लोभ लालच से रहित निश्छल लोगों को मिलती है। जीवन शान से जीना चाहिए ईमानदार सत्य निष्ठा वान एवं चरित्रवान व्यक्ति शान से जीवन जीता है जबकि छल कपट एवं चोरी आदि पाप करने वाला व्यक्ति छिप छिपाकर जीवन जीता है। जिसके पास दया होती है उसे हर व्यक्ति याद करता है। जिसके पास योग्यता होती है, उसे सफलता मिलती है और हर व्यक्ति उसे चाहता है। सच्चाई मात्र कहने की ही नहीं, जीवन में उतारने की चीज है। जीवन में अपनी कीमत कम न कराना हो तो कभी बदनामी के काम मत करना। काम वासना की आग कोई काम की नहीं रहने देती है उससे मात्र दुख के अलावा कुछ नहीं मिलता है। यदि अपने आपकी वरवादी से बचना चाहते हो तो अपना समय बर्बाद न करें और अच्छे काम करो।


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