जो दिल में कांटे की भांति चुभती रहती है उसे शल्य कहते हैं
दमोह। वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने कहा जो सच्चा त्यागी व्रति संत होता है उसे कोई शल्य नहीं होती है, क्योंकि भगवान महावीर स्वामी ने कहा है निशल्यो व्रति अर्थात त्यागी व्रति शल्य से रहित होता है। जो दिल में कांटे की भांति चुभती रहती है उसे शल्य कहते हैं। पुण्य के फल से मानव जीवन, ज्ञान, शक्ति, विवेक, चक्रवर्ती, नारायण जैसे उच्च पद, प्रतिष्ठा, धन, वैभव, लक्ष्मी एवं अरिहंत पद इत्यादि मिलता है। लक्ष्मी पुण्य की दासी है। पुण्य अरिहंत परमात्मा की संतान है। पुण्य कभी कोई देवी देवता या व्यक्ति नहीं दे सकता, ना ही बाजार में किसी दुकान पर पैसे से खरीद सकते हैं। अगर पैसे से पुण्य मिलता तो दुनिया के सारे अमीर लोग खरीद लेते और गरीब लोग पुण्य से वंचित रह जाते जबकि गरीब आदमी भी पुण्य आत्मा होता है।
आचार्य श्री ने कहा पुण्य शुभ परिणामों से मिलता है। अशुभ परिणामों से पाप मिलता है और शुद्ध परिणामों से मोक्ष मिलता है। जीवन में शुभ क्रिया हो तो जिंदगी खूबसूरत हो जाती है और आनंदमय हो जाती है, लेकिन पाप क्रिया से जिंदगी बदबूदार और बदसूरत हो जाती है। पुण्य के उदय से झोंपड़ी में रहने वाला गरीब आदमी सुख औरआनंदमय जीवन जीता है, जबकि कोठियों में रहने वाला अमीर आदमी भी रोगी, दुखी, अशांत, परेशान होकर दुखी जीवन जीता है। यह उस अमीर आदमी के पाप कर्म के उदय से होता है। पुण्य अमीर आदमी की बपौती नहीं है। मानव जन्म पुण्य उदय से मिलता है यह बात इसी से सिद्ध होती है कि बच्चा मुट्ठी बांधकर जन्म लेता है कहावत भी है बंद मुट्ठी तो लाख की खुली मुट्ठी तो खाक की, मरण के समय आदमी मुट्ठी खोल कर जाता है इसलिए खाक कर दिया जाता है।
आचार्य श्री ने कह आज से ही पुण्य के प्रति अपनी सोच बदल ले तो जिंदगी उत्सव और पूज्य बन जायेगी। पाप घटता है और पुण्य जुड़ता है त्याग से। जीवन बिखरता है पाप और स्वार्थ से त्याग के मार्ग पर चलेगे तो सबका प्रेम बिना माँगे ही मिलेगा और जीवन बाग बनता चला जाएगा। सम्यक दृष्टि ज्ञानी का पुण्य परंपरा से मोक्ष का कारण होता है जबकि मिथ्या दृष्टि अज्ञानी का पुण्य संसार का कारण होता है। पुण्य के जल से पाप का कीचड़ धुलता है। संसार में कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें धर्म की बात समझ नहीं आती क्योंकि उनके दिमाग कोयले की खदान होते हैं। कोयले को कितना भी साफ करो परंतु वह काला बना ही रहता है कभी साफ नहीं होता है।

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