समाधिस्थ आर्यिका माताजी को विनयांजलि अर्पित

दमोह। आचार्य श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज से दीक्षित दो आर्यिका माताजी जी की रीवा में सड़क हादसे के चलते हो जाने की खबर से देश भर में सकल जैन समाज के बीच शोक एवं क्षोभ पूर्ण माहौल बना हुआ है। वही इस तरह की घटनाओं को रोकने विचार विमर्श के साथ श्रद्धांजलि बिन्यांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है।
इसी कड़ी में दमोह के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर जी में आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री पदम सागर जी के ससंघ सानिध्य में विनयांजलि  सभा का आयोजन किया गया। सभा का शुभारंभ बड़े बाबा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन करके किया गया। इस अवसर पर  सागर जबलपुर से आए मुनिश्री एवं छोलक श्री के ग्रस्त जीवन से आए मुनि श्री एवं छुलल्क श्री के गृहस्थ जीवन के परिजनों की विशेष उपस्थिति रही।
इस अवसर पर मुनि श्री पदम सागर जी ने बुधवार सुबह हुई घटना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रीवा में कलेक्ट्रेट के सामने सुबह शौच के लिए जाते समय एक ऑल्टो कार द्वारा दो माताजी को टक्कर मारी दी गई थी। एक माताजी श्रुतमति माताजी की सुबह समाधि हो गई थी दूसरी माता जी उपसममति माता जी की शाम को समाधि हो गई। सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी द्वारा 13 फरवरी 2006 को 58 बहनों को आर्यिका का दीक्षा दी गई थी उनमें यह दोनों माताजी भी शामिल थी।
उपशम मति माताजी के ग्रहस्थ अवस्था का नाम वाणी जैन था  उनका जन्म 26 मई, 1979 को चैय्यर, तमिलनाडु में  श्रीमती लक्ष्मी श्री देवकुमारजी जैन के घर हुआ था। उन्होंने बैचलर ऑफ कॉमर्स (बी.कॉम) प्रथम वर्ष तक पढ़ाई की। उसके पश्चात आध्यात्मिक मार्ग पकडा। उन्होंने 1999 में तमिलनाडु के पुन्नूर मलाई में ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली और 13 फरवरी 2006 को आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से आर्यिका श्री 105 उपशमती माताजी के रूप में दीक्षा सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर दमोह में हुई। 
इधर श्रुतमति माताजी का जन्म सागर में हुआ था उनके गृहस्थ जीवन के भाई अचल सागर जी ने भी आचार्य श्री विद्यासागर जी से मुनि दीक्षा ली थी। वर्तमान में वह दमोह जिले के तारादेही में विराजमान है। मुनि श्री ने इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सभी से आग्रह किया कि साधुओं की आहारचार्य जंगल चर्या आदि के समय युवाओं को हमेशा सजक तत्पर रहना चाहिए क्योंकि साधु और श्रावक तथा धर्म और धर्मात्मा एक गाड़ी के दो पहिए हैं यदि एक पहिया टूट जाए तो गाड़ी का चलना संभव नहीं है इस तरह यहां भी स्थिति है।
छुलल्क श्री तातपर्य सागर जी ने भी विनयांजलि देते हुए कहा कि श्रावक का यह कर्तव्य है कि उनकी नगर में उनके मंदिर में जो भी साधु आए वह उनका ध्यान रखें चाहे वह किसी भी संघ से हो।  खुरई से पधारे ब्रह्मचारी पंडित प्रशांत दिवाकर एवं नगर के ब्रह्मचारी स्वतंत्र भैया एवं संजीव शाकाहारी ने भी अपनी विनयांजलि प्रस्तुत की। सभा का संचालन मंदिर समिति के अध्यक्ष नवीन निराला एवं आभार महा मंत्री राजकुमार जैन ने व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सकल जैन समाज की मौजूदगी रही।

जैन मंदिर जबेरा में ग्रीष्मकालीन शिविर का शुभारंभ 
दमोह। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जबेरा में ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर का शुभारंभ उत्साह के साथ किया गया। ध्वजारोहण तत्पश्चात भगवान का अभिषेक एवं पूजन सम्पन्न कराया गया। पूजन के उपरांत शिविर की विभिन्न कक्षाओं का विधिवत आरंभ किया गया, जिसमें बच्चों, युवाओं एवं महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

शिविर में डॉ. प्रदीप जैन 'आचार्य', पं ऋषि जैन शास्त्री, पं अक्षय शास्त्री  एवं अन्य विद्वान शास्त्रियों द्वारा धर्म अध्ययन, जैन संस्कृति, संस्कार शिक्षा एवं आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा। शिविर का उद्देश्य लोगों को संस्कारवान बनाना है। जिसमें बौद्धिक क्रियाकलापों के साथ मानसिक स्थिरता और दृढ़ता के लिए स्वाध्याय की प्रवृत्ति का विकास है। शिविर के दौरान नैतिक मूल्यों का निर्माण करने की विभिन्न गतिविधियों का आयोजन होगा, जिससे शिविरार्थी स्वयं, परिवार, समाज और देश निर्माण के लिए उत्तम व्यक्तित्व का निर्माण करेंगे।

शिविर के दौरान आत्म कल्याण एवं ज्ञान की क्षमता ओं का विकास करने के लिए यह आयोजन है। इसमें भक्ति रस की प्रसिद्ध रचना भक्तामर, तत्त्वार्थ सूत्र, कथाओं आदि के माध्यम से जीवन निर्माण की गतिविधियाँ होंगी। प्रातः संगीतमय पूजन, बच्चों के लिए कक्षाएं, संस्कृत पूजन का अर्थ एवं दोपहर व शाम को ग्रंथ का अध्ययन होगा।