नरवाई न जलाने पंचायतों में लगाए जागरुकता शिविर
दमोह। कलेक्टर श्री तरुण राठी के निर्देश पर तेवड़ा रहित चने का बीज की बुवाई कराने तथा नरवाई न जलाने हेतु कृषि विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों में विशेष अभियान अंतर्गत जागरुकता शिविरों का आयोजन लगातार जारी है, यह शिविर 25 अक्टूबर 2020 तक निरंतर लगाये जा रहे है। कलेक्टर श्री राठी ने कृषकों से कहा है, जिले में धान, गेंहू एवं अन्य फसलों के डंठलों (नरवाई) में आग लगाये जाने पर प्रतिबंध लगाया गया। आदेश का उल्लंघन करने पर धारा 144 दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अंतर्गत भारतीय दण्ड सहिंता की धारा 188 के तहत दण्डनीय होगा।
कलेक्टर श्री राठी ने कृषकों से कहा धान एवं गेंहू फसलों की कटाई मुख्य रूप से कंबाईन हार्वेस्टर के माध्यम से की जाती है। कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई उपरांत फसल की नरवाई में आग लगाने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, आग लगाने से भूमि की उर्वरा शक्ति में कमी होती है। तथा पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित होता है। निकट भविष्य में धान फसल की कटाई प्रारंभ होगी तथा इसके उपरांत रबी में गेंहू की कटाई भी होगी । फसलों की कटाई में उपयोग किये जाने वाले कंबाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मेनेंजमेंट सिस्टम के उपयोग को अनिवार्य किया जाये। जिलें में गेहॅू की नरवाई से कृषक भूसा प्राप्त करना चाहते हैं, अतः कृषकों की मांग को देखते हुये स्ट्रा मेनेजमेंट सिस्टम के स्थान पर स्ट्रा रीपर के उपयोग को अनिवार्य किया जाये । कंवाईन हार्वेस्टर के साथ एसएमएस अथवा स्ट्रा रीपर में से कोई भी एक मशीन साथ में रहना अनिवार्य किया गया है।
दमोह विकासखण्ड की ग्राम पंचायतों (घाट पिपरिया, केवलारी पिपरिया, बांसा, पिपरिया दिगम्बर, खडेरा), जबेरा विकासखण्ड की ग्राम पंचायतों (सिंगपुर, विजयसागर, कटंगी, घटेरा, चिलौद, घांघरी), तेन्दूखेड़ा विकास खण्ड की ग्राम पंचायतों (जामुनखेड़ा, झलौन, समनापुर, दरोली) पथरिया विकासखण्डकी ग्राम पंचायतों (बोतराई, नरसिंहगढ़, किशुनगंज) हटा विकासखण्डं की ग्राम पंचायतों (देवरागढ़ी, देवराजामशा, बलेह, शिवपुर) पटेरा विकास खण्ड की ग्राम पंचायतों (बमनी, मझोली, महुना, कुटरी, बर्रट) तथा बटियागढ़ विकासखण्ड की ग्राम पंचायतों (मगरोन, पाड़ाझिर, घुराटा, लुकायन, सकतपुर) में शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें कृषकों को बताया गया कि, विगत वर्षो में चना उपार्जन में तेवड़ा (खेसरी) के दाने मिश्रण होने के कारण कृषक बंधुओं को उपार्जन में समस्यायें आई है।
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास दमोह श्री बीरन सिंह रैपुरिया ने बताया वर्तमान में रबी मौसम में चना फसल की बुबाई का कार्य प्रारंभ होने जा रहा है। कृषको को चने का तेवड़ा (खेसरी) रहित प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने हेतु शासन द्वारा तय किया गया है कि, शासकीय कृषि प्रक्षेत्र, बीज निगम, एन.एस.सी. एवं बीज संघ आदि से बीज खरीदने पर कृषक के खातें में डी.बी.टी. के माध्यम से 10 वर्ष से कम अवधि की किस्मों पर 3300 प्रति क्विंटल तथा 10 वर्ष से अधिक की किस्मों पर 2500 प्रति क्विंटल के हिसाब से बीज अनुदान की राशि भुगतान किये जाने का प्रावधान है।
सहायक संचालक पीएल प्रजापति ने बताया इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लघु सीमांत कृषकों को प्राथमिकता दी जावेगी, अधिकतम 2 हेक्टेयर तक का बीज किसानों को प्रदाय किया जावेगा। अनुदान प्राप्त करने हेतु बैंक खाता, मोबाईल नंबर, आधार नंबर तथा भू-अभिलेख आदि संबंधित संस्था में जहां से बीज खरीदना चाहते है, प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा । यदि किसी कारणवश किसान बंधु तेवड़ा (खेसरी) युक्त बीज की बुबाई कर देते है। उन्होंने किसान बंधुओं से आग्रह किया कि तेवड़ा (खेसरी) के पौधे चने के पौधों से भिन्न होते है, उन्हें आसानी से खेत से बाहर निकाले ताकि भविष्य में शासन द्वारा उपार्जन नीति के अनुसार तेवड़ा (खेसरी) रहित उपज प्राप्त हो सकें तथा उपार्जन का लाभ प्राप्त हो सके।




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