अध्यात्म की शरण में जाने से असीम सुख प्राप्त होता है- आचार्य निर्भय सागर’
दमोह। वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने जैन धर्मशाला में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा अध्यात्म का अर्थ है अपने निज आत्मा के अधिकार को प्राप्त करना अपने आत्मा के संविधान को जान लेना। निज आत्म गुणधर्म और स्वभाव को पहचान लेना है। राग द्वेष मोह ईर्ष्या इत्यादि के कारण जीव अपने निज आत्मा के अधिकारों को भूलकर पर द्रव्यों पर अपना अधिकार जमाना चाह रहा है। जब जब आत्मा पर पदार्थों के ऊपर अधिकार जमाने का प्रयास करता है, तब तब छल कपट हिंसा झूठ चोरी अन्याय आदि का सहारा लेता है । इसी कारण देश अराजकता फैलती है, समाज अन्याय और परिवार में अशांति फैलती है। इससे बचने का उपाय अध्यात्म ही है।
आचार्य श्री ने कहा अध्यात्म मार्ग पर चलने से न्याय नीति का पालन होता है । अध्यात्म की शरण में जाने से चिंता , शोक, द्वंद ,नफरत दूर हो जाती हैं । नफरत आदि के हट जाने पर सहज ही आनंद उल्लास प्रसन्नता ,शांति, आत्मबोध प्राप्त होने लगता है यही आध्यात्मिक क्षेत्र की आत्मानुभूति है। आचार्य श्री ने कहा दूसरे शब्दों में अध्यात्म का अर्थ है पर पदार्थों की सत्ता को छोड़कर निज आत्म स्वभाव की सत्ता में लौट आना। निजात्मा के स्वभाव में लीन होने को शुद्धोपयोग कहते हैं। शुद्ध आध्यात्मिक की लीन अवस्था में पर पदार्थों की सत्ता पर अधिकार तो छूट ही जाता है लेकिन परमात्मा की सत्ता के अधिकार से भी ऊपर उठ जाते हैं । जिस समय निज आत्मा की सत्ता को प्राप्त कर लेते हैं उस समय निजी की आत्मा में और परमात्मा में कोई अंतर नहीं रह जाता है। इसीलिए अध्यात्म की शरण में जाने से असीम आनंद एवं सुख की अनुभूति होती है और संसार की सभी वाद विवाद दुख दर्द समाप्त हो जाते हैं।
आचार्य श्री ने कहा हमारे देश के आध्यात्मिक योगियों ने परमाणु भले ना खोजा हो परंतु परमात्मा को अवश्य खोज लिया है। विश्व में शांति परमाणु से नहीं परमात्मा की शरण में जाने से होगी।जीवन में कोई समस्या उत्पन्न हो गई हो तो साहस शांति विवेक रखकर एवं कुछ समय शांति से सोच विचार करके समाधान खोजना चाहिए क्योंकि हर समस्या चैराहे पर ट्रैफिक की लाल बत्ती की तरह होती है ,थोड़ा इंतजार करोगे तो रास्ता क्लियर हो जाएगा और हरी बत्ती हो जाएगी। आचार्य श्री ने कहा माता पिता है। अपने संतान को वसीयत देकर जाते हैं और संत अपने शिष्यों को नसीहत देकर जाते है।

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