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अपने से नीचे रहने वाले गरीब ,बच्चे, असहाय लोगों की आवश्यकता की पूर्ति करना.. उनके दुख दर्द को दूर करना, समय पर भोजन पानी और दबा देना अधो दिशा की पूजा है.. वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज

 लोकतंत्र मैं दिशा पूजा की आवश्यकता है- आचार्य श्री

दमोह। वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने कहा भगवान के सामने फल, फूल, अक्षत आदि चढ़ाना पूजा की विधि है। इसे ही प्रायः पूजा मान लिया जाता है । लेकिन छह दिशाओं की पूजा आज के युग में महत्वपूर्ण है , 6 दिशाओं  की पूजा का अर्थ बताते हुए आचार्य श्री ने कहा अपने से नीचे रहने वाले गरीब ,बच्चे ,असहाय लोगों की आवश्यकता की पूर्ति करना, उनके दुख दर्द को दूर करना, समय पर भोजन पानी और दबा देना अधो दिशा की पूजा है। अपने से ऊपर स्वर्ग और मोक्ष में विराजमान शुद्ध आत्माओं की पूजा करना ,किसी कार्य के पूर्व में उन्हें स्मरण करना ,नमन करना, उनके प्रति आभार व्यक्त करना उर्धव दिशा की पूजा है। अपने दादा दादी ,माता पिता आदि पूर्वजों की सेवा करना, विनय करना, आज्ञा का पालन करना और उन्हें आहार पानी की उचित व्यवस्था करना पूर्व दिशा की पूजा है।

  आचार्य श्री ने कहा अपने से बड़े ज्ञानी ,पंडित, त्यागी ,तपस्वी, साधु ,संत जो भगवान के उत्तराधिकारी के रूप में हैं उनकी  सेवा भक्ति, आहार एवं आवास आदि की उचित व्यवस्था करना उत्तर दिशा की पूजा है  अपने परिजनों एवं पड़ोसियों का ध्यान रखना उन पर उपकार करना, उनके सुख दुख का ध्यान रखना दक्षिण दिशा की पूजा है। दांपत्य जीवन के मूल्यों को समझना ,महिला वर्ग का ध्यान रखना ,अर्थ और काम के बीच में सामंजस्य बना कर रखना एवं अपनी पत्नी में संतुष्ट रहना पश्चिम दिशा की पूजा है। लोकतंत्र में दिशा पूजा ही सर्वोत्तम पूजा है। आचार्य श्री ने कहा जो अपने आप से परेशान हैं एवं दुखी है उसे परमात्मा भी सुखी नहीं बना सकते और ना परेशानी दूर कर सकते हैं । यदि आदमी अपने आस पास मोहल्ला-पड़ोस एवं परिवार जन से परेशान हो या दुखी हो तो उसे हटाया जा सकता है लेकिन जो स्वयं से दुखी और परेशान व्यक्ति को  स्वयं को ही समझाना  पड़ेगा ।

 आचार्य श्री ने कहा जैसे सांप के काटने पर आदमी को नीम की पत्तियां अच्छी लगती है वैसे ही मोह रूपी नागिन के डस लेने पर विषय भोग ही अच्छे लगते है संत के वचन नहीं और भगवान की भक्ति नही । जिसके जीवन में झूठ और गाली नहीं उसका जीवन गीता है। जिसके जीवन में सब्र है सुकून है उसके लिए यहीं पर स्वर्ग है। जिसके जीवन में संतोष है उसके जीवन में यही मोक्ष सुख है।

आचार्य संघ के पड़गाहन आहारदान हेतु उत्साह

आचार्यश्री निर्भय सागर जी महाराज एवं मुनि संघ का पड़गाहन करके अपने चोके में ले जाकर आहार दान हेतु श्रावकजनों के बीच में उमंग उत्साह भरा माहौल बना हुआ है। वहीं आचार्य संघ की भी श्रावकजनों पर कृपा बरसती नजर आ रही है। आज जैन धर्मशाला के मैनेजर सुशील जैन परिवार को आचार्यश्री निर्भयसागर महाराज का पड़गाहन करके अपने चोके में आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।


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