भोजन का अपमान करने से दरिद्रता आती है -आचार्य श्री
दमोह। वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर जी महाराज ने कहा -भोजन की थाली को लांघ कर नहीं जाना चाहिए । भोजन की थाली में लात मारकर अपमानित नहीं करना चाहिए । अपमानित करने से दरिद्रता आती है। भोजन की थाली में बाल जीव जंतु एवं पसीना आदि मल गिर गया हो तो ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए। ऐसा भोजन करने से लोगों की वृद्धि होती है। पति और पत्नी को एक ही थाली में भोजन नहीं करना चाहिए एक साथ भोजन करने से भोजन मादक हो जाता है। यदि पत्नी अपने पति के भोजन करने के बाद उसी थाली में भोजन करती है या पति का बचा हुआ भोजन करती है तो घर में धन धन की कमी नहीं होती है और आपस में प्रेम वात्सल्य बढ़ता है संत को आहार कराने के समान पुण्य का फल प्राप्त होता है।

आचार्य श्री ने कहा माता पिता आपने संतान को वसीयत देकर जाते हैं और संत अपने शिष्यों को नसीहत देकर जाते है। यदि चित्त में पित्त बढ़ जाए तो क्रोध की उल्टियां होने लगती है। माया की बदबू आने लगती है। मान की हिचकीया आने लगती है लोभ का पेट फूलने लगता है । यदि चित्त में पित्त बढ़ जाए तो क्रोध की उल्टियां होने लगती है। माया की बदबू आने लगती है। मान की हिचकीया आने लगती है। लोभ का पेट फूलने लगता है।
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