धार्मिक आयोजनों में भीड़ से बचें.. आचार्य निर्भय सागर’
दमोह। कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है। इस समय धार्मिक आयोजन होना चाहिए लेकिन बड़ी सावधानी रखना चाहिए। वैज्ञानिकों एवं सरकार द्वारा बार-बार चेतावनी पूर्वक कहा जा रहा है की दूरी बनाए रखें ,मास्क लगाए ,हाथ धोकर किसी वस्तु को छुए लेकिन इन सब बातों की अनसुनी जनता कर रही है । ऐसा करना घातक हो सकता है। कहावत भी है सावधानी हटी दुर्घटना घटी । नवरात्रि और दीपावली आदि अनेक धार्मिक आयोजन प्रारंभ हो रहे हैं। सरकार ने 200 लोगों तक की छूट दे रखी है। हम जानते भी हैं कि धार्मिक आयोजन और नेताओं की सभा में 200 के आगे एक शून्य लगने में टाइम नहीं लगता है। भीड़ में विवेक खो जाता है, उन्माद जल्दी बढ़ जाता है इसलिए अभी दीपावली तक अति सावधानी बरतने की जरूरत है।
यह उपदेश वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने स्थानीय जैन धर्मशाला में दिया। उन्होंने कहा जब तीव्र पाप कर्म का उदय होता है तब भगवान की भक्ति भी काम नहीं आती है और ना कोई साथ देता है। उस पाप कर्म का फल भोगना ही पड़ता है। सच्चे भक्त के पाप कर्म के उदय में यदि कोई अनहोनी हो जाती है तो उसे अपनी आस्था धर्म और धर्म आत्माओं के प्रति कम नहीं करना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा मानव जीवन में सर्वश्रेष्ठ भक्ति चक्रवर्ती करता है। वह अपना पूरा खजाना भक्ति में खोल देता है । उसकी भक्ति के आगे इंद्र की भक्ति भी फीकी पड़ जाती है ।जैसे किसी को कैंसर का रोग हो जाता है तो वह डॉक्टर के सामने अपना खजाना खोल देता है वैसे ही चक्रवर्ती भक्ति में अपना खजाना खोल देता है।
आचार्य श्री ने कहा देवगण पूरे परिवार सहित पूजा भक्ति करते हैं। मनुष्य को भी पूरे परिवार सहित भक्ति आराधना सामूहिक रूप में करना चाहिए । जैन धर्म में स्थाई मूर्ति स्थापना करके मूर्ति पूजा पद्धति अनादि कालीन है। जबकि वैष्णव समाज में मूर्ति पूजा करके मूर्ति के विसर्जन की पद्धति है। यही वजह है कि नवरात्रि आदि में देवी की मूर्ति रखकर पूजा के उपरांत जल में विसर्जित कर दी जाती ह । समय के अनुसार पूजन पद्धति का एक दूसरे में सम्मिश्रण भी हुआ है और क्रमिक विकास ही हुआ है । इसी वजह से अब कुछ देवी देवताओं की प्रतिमाएं जैन प्रतिमाओं के अनुसार स्थाई भी रखी जाने लगी हैं । आचार्य श्री ने कहा भोजन के उपरांत जूठन नहीं छोड़ना चाहिए। जूठन छोड़ने से अन्न का अनादर होता है ,व्यर्थ में भोजन फेंकने से पाप लगता है और प्रदूषण फैलता है । प्रदूषण से अनेक प्रकार की बीमारियां फैलती है। इसलिए जूठन फेंकना भी एक पाप है।

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