Header Ads Widget

संसारी प्राणी सदैव देह की सेवा में लगा रहता है आत्मा को नहीं जान पाता.. आर्यिका रत्न ऋजुमति माताजी.. विजय नगर में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान में तीसरे दिन भी भक्ति भाव से अर्घ्य चढ़ाए गए

विजय नगर में सिद्धचक्र महामंडल विधान का तीसरा दिन

दमोह। बच्चों पर संस्कारों का गहरा प्रभाव पड़ता है मां अपने बच्चों को प्रभु की आराधना सिखाती है छोटा बालक भी वर्णों की मदद से प्रभु भक्ति कर लेता है।


उपरोक्त उद्गगर आर्यिका रत्न ऋजुमति माताजी ने विजय नगर में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में अपने मंगल प्रवचनओं में अभिव्यक्त किए इसके पूर्व प्रातः काल ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी के निर्देशन में श्री जी का अभिषेक पूजन एवं शांति धारा संपन्न हुई। संगीत के साथ विधान के अर्ग समर्पित किए गए। इस अवसर पर डॉक्टर आईसी जैन, ललित सराफ, मनीष मलैया, सुनील वेजिटेरियन, लोकेश, संदीप, महेंद्र करुणा, ज्ञानेंद्र, महेश बड़कुल, मुन्ना लाल जैन आदि की उपस्थिति रहीं। 

आर्यिका श्री ने अपने मंगल उद्बोधन में आगे कहा कि अंग्रेजी भाषा आज बच्चों को संस्कार विहीन कर रही है संस्कारों के अभाव में युवा पीढ़ी नशा आदि विकृति से अपने जीवन को बर्बाद कर लेती है धर्म हमें संस्कार सिखाता है और जीवन का मार्ग सरल कर मुक्ति के द्वार तक ले जाता है मैना सुंदरी ने धर्म और भक्ति के प्रभाव से अपने पति के कुष्ठ रोग को ठीक कर लिया था आत्म विशुद्धी से निर्मलता हुई और जल छिड़कने से देह मैं भी निर्मलता आ गई।

 संसारी प्राणी सदैव देह की सेवा में लगा रहता है आत्मा को नहीं जान पाता वह आत्मा और शरीर के भेद विज्ञान नहीं समझ पाता मैना सुंदरी जानती थी की कर्मों के अलावा कोई दुख नहीं देता उसे अपनी भक्ति पर पूरा विश्वास था संसारी प्राणी भगवान को कोसता है किंतु अपनी भक्ति के दोष को नहीं देखता तन को सजा कर भक्ति करने  वाले यदि मन को सजाए और भक्ति करें तो शीघ्र लाभ हो सकता है मेंढक ने मन से भक्ति की थी और हाथी के पैर के नीचे आने के बाद वह भगवान के समावसरण सबसे पहले पहुंच गया था।

Post a Comment

0 Comments