नकली घी मामले में 60,000 का अर्थदंड अधिरोपित
दमोह। मिथ्याछाप पंतजलि गाय के घी का निर्माण, विक्रय करने में दोष सिद्ध होना प्रमाणित पाये जाने के आरोप में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 52 के तहत अपर कलेक्टर निर्णय अधिकारी नाथूराम गौड़ ने 4 अनावेदकों पर 60 हजार रूपये अर्थदंड अधिरोपित किया है।
उन्होंने अनावेदक श्याम सुंदर माखीजा पिता किशन चंद माखीजा प्रो. किशन ट्रेडर्स, बाराद्वारी दमोह, मेसर्स सेठ प्यारेलाल एंड संस बकौली चौक दमोह, मेसर्स मां कृपा इंटरप्राईजेस, जयराज वर्धन वेयर हाउस, पुरैना चौराहा, खिरियाकलां जबलपुर तथा मेसर्स पंतजलि आयुर्वेद लिमिटेड युनिट-5 गेट नं. 05, अहमदनगर, औरंगाबाद रोड, कढ़ता फाटा, तहसील नेवासा, जिला अहमदनगर महाराष्ट्र पृथक-पृथक पर 15-15 हजार रूपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है।अधिरोपित शास्ति की राशि 15 दिवस में जमा नहीं किये जाने पर अधिनियम की धारा 96 के तहत भू-राजस्व की बकाया की भांति बसूल की जायेगी।
नौ दिव्य कन्याओं का नौ देवी के स्वरूपो में पूजन
हटा, दमोह। उपकाशी नगरी हटा के समीप पावन नगरी ग्राम पांजी में चल रही श्रीमद् देवी भागवत महापुराण महायज्ञ मैं सात वे दिन आचार्य पंडित श्री महेंद्र पांडे जी के मुखारविंद से राजा सत्रव्रत का राज्य अभिषेक, तुलसी विवाह सूरज चंद्र की गति एवं नर्को की कथा का वर्णन एवं सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का बड़े ही सरल भाव में विस्तार से वर्णन किया गया एवं नौ दिव्य कन्याओं का दुर्गा स्वरूप के पूजन को विस्तार से बताया गया एवं श्रीमद् देवी भागवत कथा के तत्पश्चात नौ दिव्य कन्याओं का नवदुर्गा स्वरूपों में पूजन किया गया एवं उनकी संगीतमय भव्य आरती की गई।
अष्टमी व नवमी तिथि को कन्या पूजन के लिए कन्याओं को एक दिन पहले आमंत्रित किया नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाईं. इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह पर बिठाकर सभी के पैरों को शुद्ध जल एवं दूध से भरे थाली में रखकर अपने हाथों से धोएं. इसके बाद पैर छूकर आशीष लिया। इसके बाद माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम से तिलक वंदन किया फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को फल मीठा एवं मीेठी खीर का भोजन करायां ,भोजन के बाद कन्याओं को अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दी गयी और उनके पैर छूकर आशीष लिया और नौ कन्याओं के बीच एक बालक को कालभैरव के रूप में भी बिठा कर विधि-विधान से पूजन किया नव दुर्गा पूजन के बाद कन्याओं के पैर पखारे हुए दूध जल एवं मीठी खीर प्रसाद के रूप में वितरित की गयी।
आचार्य पंडित श्री महेंद्र पांडे ने बताया कि नवरात्र में सभी तिथियों को एक-एक और अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं की पूजा होती है. दो वर्ष की कन्या (कुमारी) के पूजन से दुख और दरिद्रता मां दूर करती हैं. तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति रूप में मानी जाती है. त्रिमूर्ति कन्या के पूजन से धन-धान्य आता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। चार वर्ष की कन्या को कल्याणी माना जाता है. इसकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है. जबकि पांच वर्ष की कन्या रोहिणी कहलाती है. रोहिणी को पूजने से व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है. छह वर्ष की कन्या को कालिका रूप कहा गया है. कालिका रूप से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है।
सात वर्ष की कन्या का रूप चंडिका का है. चंडिका रूप का पूजन करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। आठ वर्ष की कन्या शाम्भवी कहलाती है. इनका पूजन करने से वाद-विवाद में विजय प्राप्त होती है. नौ वर्ष की कन्या दुर्गा कहलाती है. इसका पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है तथा असाध्य कार्यपूर्ण होते हैं. दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है. सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूर्ण करती है. समस्त ग्राम में धर्मामय वातावरण बना रहा और भक्तों ने उत्साह पूर्वक पूजन वंदन किया। हटा से संदीप राय की रिपोर्ट
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