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मुनि संघ के सानिध्य में देवाधिदेव श्री ऋषव देव आदिनाथ भगवान जन्म कल्याणक पर भव्य शोभायात्रा आज.. शांति धारा में निहित होती है विश्व कल्याण एवं शांति की भावना- मुनि श्री पदम सागर जी..

शांति धारा में निहित विश्व कल्याण भावना- मुनि श्री पदम सागर जी

दमोह। अनेक प्राचीन ग्रंथो में भगवान की शांति धारा का उल्लेख मिलता है शांति धारा से कुष्ठ जैसे असाध्य रोगो के निवारण के साथ कार्यों में आने वाली विध्न बाधाए दूर होने के साथ समस्त जगत के प्राणियों का भी कल्याण होता है। ईरान अमेरिका युद्ध के चलते आज सारे विश्व पर युद्ध संकट के बादल मंडरा रहे है। इसका असर हमारे देश भारत पर भी पड़ने लगा है। सारे विश्व में शांति का माहौल बने युद्ध की विभीषिका से प्राणियों का किसी प्रकार का नुकसान ना हो इन्ही मंगल भावनाओं के साथ देश के सभी जैन मंदिरो में होने वाली शांति धारा के दौरान विश्व शांति की भावना भायी जा रही है।
यह उदगार आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समय सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ जयंती की पूर्व बेला में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर में व्यक्त किये। मुनि श्री ने अष्टानिका पर्व में मैना सुंदरी द्वारा सिध्द चक्र महामंडल विधान रचाकर अपने पति श्रीपाल सहित सैकड़ों लोगों के कुष्ठ रोग को दूर करने के वृतांत को सुनाते हुए कहा कि पिछले जन्म में राजा श्रीपाल द्वारा दिगंबर मुद्रा धारी मुनि राज की निंदा करते हुए अपने साथियों के साथ हंसी उड़ाई गई थी। जिसके फल स्वरुप उसे अगले जन्म में कोड़ी की काया मिली। 
मुनि श्री ने कहा कि मुनि निंदा का फल अगले जन्म में क्या इसी जन्म में , अनेक बार तो तत्काल भी देखने को मिले है। इसको लेकर मुनि श्री ने चंदेरी के एक पदाधिकारी का एक उदाहरण भी दिया। मुनिश्री ने बिना साधु बने ही श्रावकों को आत्म कल्याण का मार्ग बताते हुए कहा कि सभी तीर्थंकरों ने सोलह कारण भावनाओ से आत्म कल्याण करके मोक्ष मार्ग प्रशस्त किया है। हम सभी भी 16 कारण भावना भाकर ऐसा कर सकते हैं। यदि आप 16 कारण भावना नहीं भी भा सकते तो सभी के कल्याण की भावना भाकर अपना कल्याण कर सकते हैं। मुनि श्री ने युग दृष्टा प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव ऋषभदेव आदिनाथ भगवान के जन्म से जुड़े वृतांत सुनाते हुए सभी को अपना मंगल आशीर्वाद दिया।

विधान सफलता हेतु मुनि संघ का आभार जताया.. इस अवसर पर मंदिर कमेटी द्वारा मुनि श्री पदम् सागर जी के साथ छुलल्क श्री तात्पर्य सागर महाराज के समक्ष श्री फल भेंट करके पिछले दिनों आयोजित श्री अरहंत चक्र समवशरण महामंडल विधान के सादर संपन्न होने पर हृदय से आभार एवं कृतज्ञता ज्ञापित की। साथ ही भगवान श्री महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव में मुनि संघ के सानिध्य एवं आशीर्वाद हेतु त्रय बार नमोस्तु निवेदन करते हुए जल्द ही आचार्य श्री समय सागर जी का आशीर्वाद लेने मुक्तागिरी क्षेत्र जाने की बात कही। इस दौरान ब्रह्मचारी मोनू भैया एवं ब्रह्मचारी स्वतंत्र भैया, पंडित सुरेश शास्त्री, मंदिर समिति के अध्यक्ष नवीन निराला, महामंत्री राजकुमार रानू, कोषाध्यक्ष शैलेंद्र बजाज, संतोष अविनाशी, चक्रेश सराफ, राजेन्द्र अटल, जितेंद्र जैन, पंकज मुंशी, आनन्द लैब, संजय सराफ, जीतू मलैया सहित बड़ी संख्या में श्रावकजन मंडल की मौजूदगी रही।
श्री आदिनाथ जन्म कल्याणक पर शोभायात्रा आज.. जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक चैत्र कृष्णा नवमी 12 मार्च 2026 को है।  इस अवसर पर बहुत ही हर्ष उल्लास से सभी जैन मंदिरों में विविध धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं । परम पूज्य मुनि श्री पद्मसागर जी  एवं क्षुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी के परम सानिध्य में आदिनाथ जयंती पर गुरुवार सुबह भव्य शोभायात्रा का आयोजन सुबह 7 बजे से किया गया है। श्री जी की शोभा यात्रा सिटी नल से प्रारंभ होकर पुराना थाना, घंटाघर, नया बाजार, पलंदी मंदिर, चौधरी मंदिर, बड़ा मंदिर होकर सिटी नल पहुंचकर संपन्न होगी। तत्पश्चात 8 बजे श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा तथा भक्तांबर महामंडल विधान एवं परम पूज्य मुनि श्री जी के प्रवचन नन्हे मंदिर जी से संपन्न होंगे। श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर एवं श्री सिंघई मंदिर समिति ने सकल जैन समाज से सभी आयोजनों में सम्मिलित होकर धर्म लाभ उठाने की अपील की है।

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