लाखों रुपए के फर्नीचर की सुपुर्दगी याचिका खारिज..
दमोह। वन विभाग द्वारा जप्त किए गए लाखों रुपए के फर्नीचर की प्राप्ति हेतु लगाई गई पंजीकृत कारपेंटर की रिट पिटिशन को विशेष न्यायाधीश आर एस शर्मा ने अवैध एवं औचित्यहीन मानते हुए खारिज कर दी। वन विभाग की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई।
मामला इस प्रकार है, वन विभाग के बीट प्रभारी पथरिया ने दिनांक 13 नवंबर 2019 को नदरई पथरिया निवासी पंजीकृत कारपेंटर रतिराम पिता पूरनलाल पटेल की फर्नीचर शॉप के निरीक्षण दौरान पाया कि दुकान में सागौन की गीली लकड़ी से बना फर्नीचर जिसमें सोफा, पल्ला, पाया, टेबल चैखट, आदि रखे हुए हैं। बीट प्रभारी ने गीली लकड़ी से तैयार दुकान में रखे सभी फर्नीचर और फर्नीचर बनाने के औजार (बसूला, रंदा, आरी एवं हथौड़ी आदि) जप्त कर लिये। कारपेंटर रतीराम ने न्यायालय में जब्त फर्नीचर की प्राप्ति हेतु वन विभाग के विरुद्ध रिट लगाते हुए कहा कि ष्उसने वर्ष 2018 में काष्ठागार सिरोंजा से नीलामी में सागौन की लकड़ी खरीदी थी और उससे ही जब जब्तशुदा फर्नीचर बनाए थे, वन विभाग ने वैध रूप से नीलामी में खरीदी लकड़ी से निर्मित फर्नीचर को अवैधानिक तरीके से जब्त किया हैष्।
वहीं वन विभाग की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बद्री सिंह ठाकुर ने जप्त फर्नीचर को अवैध रूप से प्राप्त लकड़ी द्वारा निर्मित बताते हुए तर्क किया कि नीलामी से खरीदी लकड़ी की जो रसीद पेश की गई है वह जनवरी 2018 की है और वन विभाग ने 13 नवंबर 2019 को जो फर्नीचर दुकान से जप्त किया है वह गीली लकड़ी से बना हुआ था, ऐसा संभव ही नहीं है कि वर्ष 2018 में नीलामी से खरीदी गई लकड़ी दो वर्ष बाद भी गीली ही रहे। न्यायालय द्वारा वन विभाग की ओर से प्रस्तुत तर्को से सहमत होकर एवं फर्नीचर को साक्ष्य की विषय वस्तु मानते हुए पंजीकृत कारपेंटर रतिराम पटेल द्वारा लगाई गई याचिका अशुद्ध, अवैध और औचित्यहीन मानते हुए निरस्त कर दी।


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