पूर्व मंत्री मलैया ने किया बड़े बाबा का मस्काभिषेक
दमोह। निरंजन निराकार पूज्य अतिशयकारी बड़ेबाबा का मंगल मस्तकाभिषेक 23 फरवरी से लगातार जारी है। रंग पंचमी तक मस्तकाभिषेक की तिथियां बढ़ा दी गई हैं जिससे देश विदेश से भक्तों का आना लगातार जारी है।
मंगलवार को प्रदेश के महामहिम राज्यपाल महोदय के कुंडलपुर आगमन अवसर पर उनकी अगवानी करने के लिए पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया अपने धर्म पत्नी सुधा मलैया के साथ कुंडलपुर पहुंचे थे। वही श्री मलैया अपने बेटे और स्वयंसेवक समिति के संरक्षक सिद्धार्थ के साथ आज बड़े बाबा का मस्तकाभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
बांदकपुर में भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा
बांदकपुर नगर में निर्यापक मुनि श्री समता सागर जी महाराज संधि के सानिध्य में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन भक्ति भाव के साथ चल रहा है। जिसमें आज भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा निकाली गई। जो गांव के प्रमुख मार्गो से होती हुई श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर के में संपन्न हुई।
इस यात्रा में घोड़े घोड़ों पर सवार नवयुवक हाथ में धर्म की पत्रिका फैला रहे थे उसके बाद बैंड बाजों के साथ बागियों में सवार हो कर भरत चक्रवर्ती बाहुबली कृष्ण बलदाऊ अपनी रानियों के साथ यात्रा में चल रहे थे सोधर्मेंद्र हाथी पर सवार होकर यात्रा में चल रहे थे। बाल ब्रह्मचारी दीपक भैया के निर्देशन में यह यात्रा सिद्धचक्र महामंडल विधान के पंडाल से शुरू होकर नगर भ्रमण के पश्चात मंदिर जी में समाप्त हुई।
इस यात्रा में जगह जगह लोगों ने भरत चक्रवर्ती का स्वागत किया समाज के सभी लोग बैंड बाजों की धुनों पर नृत्य कर रहे थे जिस किसी के भी घर के सामने से या यात्रा निकली उसने भरत चक्रवर्ती का सम्मान किया लोगों ने अपने घर के सामने रंगोलियां सजाएं विधान में सुबह की बेला में नित्य नियम पूजन अभिषेक के पश्चात शांति धारा हुई शांति धारा प्रदीप डबुलया परिवार नेकी प्रभु को 256 अर्घ्य चढ़ाकर सिद्धों की आराधना की गई प्रभु से कामना की गई कि हे प्रभु हमारे गुरुवर शीघ्र स्वस्थ हो शाम की महा आरती श्रीमती आसमा जैन गिनी जैन छुल्लक श्री विनय सागर जी महाराज के परिजनों ने की।
बता दें सिंग्रामपुर नगर से विहार करते बीती रात्रि कटंगी टोल के पास स्कूल मैं विश्राम हुआ आज मंगलवार कि सुबह महाराज जी कटंगी नगर में ससंघ आगमन श्रद्धालुओं के द्वारा गाजे बाजे के साथ भव्य आगवानी की गई मंदिर प्रांगण में महाराज जी की धर्म उपदेशना का लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ प्रवचन के बाद महाराज जी की आहार चर्या संपन्न हुई योग सागर महाराज जी को आहार देने का सौभाग्य विनय बड़कुल के परिवार वालों को प्राप्त हुआ।
संगति के दुष्प्रभाव से संतानों को सही दिशा एवं संस्कार नहीं मिल पा रहे- मुनि श्री अजीत सागर जी
दमोह। उत्तम खेती मध्यम व्यापार और अधम नौकरी कृषि करना उत्कृष्ट कार्य है व्यापार को मध्यम माना जाता है अपने कारोबार का व्यक्ति स्वयं मालिक होता है किंतु आज व्यक्ति मालिक नहीं बनना चाहता वह नौकर बन कर विदेश में नौकरी करना चाहता है जबकि विदेशों में शांति नहीं है वे भारत शांति की खोज में आते हैं पराधीनता में सुख नहीं होता डॉक्टर इंजीनियर बन के देश की सेवा करनी चाहिए किंतु पराधीन होकर नहीं जीना चाहिए। उपरोक्त विचार मुनि श्री अजीत सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन धर्मशाला में अपने मंगल प्रवचनओं में अभिव्यक्त किए।
मुनि श्री ने कहा कि जैन समाज में पहले सभी लोग व्यापार करते थे किंतु आज बहुत से लोग सर्विस कर स्वयं को पराधीन कर रहे हैं आज बच्चों की शिक्षा और संस्कारों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा उन्हें नौकरशाह बनने के लिए प्रेरित किया जाता है बच्चे भी संस्कारित नहीं होंगे तो मां-बाप का भविष्य अंधकार में होगा बच्चे संस्कारित होंगे तो धर्म और समाज सुरक्षित रहेगा। संगति के दुष्प्रभाव से संतानों को सही दिशा एवं संस्कार नहीं मिल पा रहे जो पिता अपने बच्चों को संस्कार नहीं देता वह वास्तव में पिता नहीं है मात्र एक पता है जो अपने बच्चों को पतन से ऊपर ले जाए वह पिता है अधिक लाड प्यार बच्चों के लिए पतन का कारण बनता है इसलिए ताड़ना भी आवश्यक है घोड़े पर लगाम आवश्यक होती है इसी तरह बच्चों पर अंकुश लगाना उनकी उन्नति के लिए जरूरी है।
इसके पूर्व आचार्य विद्यासागर जी महाराज के स्वास्थ्य हेतु सामूहिक जप अनुष्ठान मुनि श्री के द्वारा कराया गया। प्रातः बेला में श्री पारसनाथ विधान अभिषेक शांतिधारा का आयोजन भी मुनि श्री के सानिध्य में प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे से किया जा रहा है। 15 मार्च को विधान पुण्यार्जक प्रेम चंद मुडेरी जैन मिलन नगर शाखा, महिला जैन मिलन, माया सेलेश हिनोति बाले राजकुमार जैन कमल पिपरिया अरविंद मुंशी नवीन निराला अभिषेक गुट्टू ने प्राप्त किया। शान्ति धारा राजीव संदीप जी सहारनपुर कमल कुमार पिपरिया परिवार ।छत्र सनदीप राजीव जी चवर जवाहर जैन कमल कुमार जी कलकत्ता आरती विमल खजरी को करने का सौभाग्य मिला।
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