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राष्ट्रीय नाट्य समारोह का आगाज आज, हरियाणा की टीम देगी गधे की बारात की प्रस्तुति.. चेक बाउंस के मामले में कठोर कारावास और जुर्माना.. अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा का ज्ञापन 27 मार्च को.. पाप के क्षेत्र में विकसित ज्ञान निरर्थक होता है- मुनि श्री अजीत सागर..

पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में होगा आयोजन..

दमोह । संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से युवा नाट्य मंच दमोह द्वारा राष्ट्रीय नाट्य समारोह का आयोजन आज 25 मार्च शुक्रवार से होगा। इस बार यह आयोजन नगर के ज्ञानचंद श्रीवास्तव पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में किया जाएगा
 इसमें प्रतिदिन शाम 7:00 बजे एक नाटक की प्रस्तुति देश के अलग-अलग प्रदेशों से आए टीमें देंगी। समारोह के पहले दिन रोहतक हरियाणा के नाट्य संस्था सप्तक कल्चरल सोसायटी के नाटक गधे की बारात की प्रस्तुति दी जाएगी  जिसके निर्देशक विश्वदीप दीपक त्रिखा है।

नाटक विधाओं पर आयोजित होगी सेमिनार..

राष्ट्रीय नाट्य समारोह में रंग प्रस्तुतियों के साथ नाट्य कला विषयों पर सेमिनार भी आयोजित की जाएंगी। आयोजनों की संख्या में दूसरे दिन 26 मार्च को कोलकाता की बारासात कल्पिक समूह द्वारा देवव्रत बनर्जी बनर्जी द्वारा निर्देशित नाटक आमार डाकघर का मंचन किया जाएगा।  समारोह के तीसरे दिन 27 मार्च को प्रख्यात रंगकर्मी व वरिष्ठ फ़िल्म कलाकार राजीव वर्मा द्वारा निर्देशित भोपाल थिएटर की प्रस्तुति भाग अवंति भाग का मंचन होगा वही इसके पूर्व इनकी उपस्थिति में नाट्य विषय पर सेमिनार का आयोजन भी किया जाएगा। 

समारोह के चौथे दिन आयोजक संस्था युवा नाट्य मंच दमोह द्वारा निर्देशक राजीव आयाची की प्रस्तुति हास्य नाटक शादी का प्रस्ताव का मंचन होगा। वही पांचवें दिन समागम रंगमंडल जबलपुर के स्वाति दुबे द्वारा निर्देशित नाटक अग्नि और बरखा की प्रस्तुति के साथ राष्ट्रीय नाट्य समारोह का समापन होगा।

अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा का ज्ञापन 27 को
दमोह।
प्रांतीय आह्वान पर म.प्र. अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा 8 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन 27 मार्च को मुख्यमंत्री के नाम से कलेक्टर को सौंपेगा। प्रवक्ता बीएम दुबे ने बताया कि पुरानी पेंशन बहाली, पदोन्नति देना, वेतन विसंगति दूर करना आदि प्रमुख मांगों को लेकर शासन द्वारा मान्यता एवं गैर मान्यता प्राप्त संघों के पदाधिकारी 27 मार्च को अपरान्ह 3ः00 बजे कचहरी के पास नेहरू पार्क में एकत्रित होकर रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचकर शाम 4ः30 बजे मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम से कलेक्टर को सौंपेंगे। संयोजक राकेश हजारी, जिलाध्यक्ष एसएन तिवारी, आरिफ अंजुम, प्रदीप स्वामी, केआर पांडे आदि ने बड़ी संख्या में अधिकारियों कर्मचारियों से ज्ञापन में शामिल होने की अपील की है।

चेक बाउंस के मामले में कठोर कारावास और जुर्माना
दमोह।
विगत 15 मार्च को दमोह के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री प्रकाश कुमार उईके के न्यायालय में परिवादी आनंद जैन द्वारा 46000 के चेक बाउंस के मामले में दायर धारा 138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के मामले का निराकरण करते हुए माननीय न्यायालय ने करैया हजारी निवासी अनिल सेन को उधारी ना चुकाने चेक बाउंस होने पर उपरोक्त धारा का अपराध सिद्ध होने पर अभियुक्त अनिल सेन को धारा 138 के अंतर्गत अर्थदंड एवं 6 माह के कठोर कारावास और 30 दिन में उधारी ना चुकाने पर एक माह और कठोर कारावास की अर्थदंड सहित सजा सुनाई।

पाप के क्षेत्र में विकसित ज्ञान निरर्थक होता है- अजीत सागर
दमोह।
विरोधी का प्रतिकार करना ज्ञानी का कार्य नहीं है अज्ञानी विरोध करता है और अपनी ऊर्जा को नष्ट करता है अज्ञानी जवाब देता मानव की मान कसाएं जब चरम पर होती है तो महाविनाश होता है विकास के साथ-साथ विनाश का रास्ता भी बनता जाता परमाणु बम विकास का परिचायक नहीं बल्कि महा विनाश का कारण है जो ज्ञान दुख का कारण हो वह विनाशकारी होता है जो सुख का कारण होता है वह सच्चा ज्ञान होता है पाप के क्षेत्र में विकसित ज्ञान निरर्थक होता है। उपरोक्त विचार मुनि श्री अजीत सागर जी महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में वसुंधरा नगर में अभिव्यक्ति किए

इसके पूर्व प्रातः काल मुनि संघ के मंगल सानिध्य में पारसनाथ विधान का आयोजन चिन्मय विद्या संत भवन में किया गया। विधान में शो धर्मेंद्र बनने का सौभाग्य महेंद्र करुणा वेजिटेरियन परिवार को प्राप्त हुआ। सनत इंद्र आरके जैन, महायज्ञ नायक महेश जैन, ईशान इंद्र संजय जैन एवं माहेंद्र बनने का सौभाग्य मुकेश जैन को प्राप्त हुआ। श्रीजी की शांति धारा करने का सौभाग्य के पी जैन एवं एनके जैन वेजिटेरियन परिवार को प्राप्त हुआ विधान का संचालन युवा विद्वान पंडित डॉअभिषेक जैन ने किया मंदिर समिति के द्वारा उनका सम्मान किया गया मुनि श्री को आहार देने का सौभाग्य अरविंद जैन परिवार को प्राप्त हुआ। 
मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन में आगे कहा कि पारसनाथ भगवान की महिमा अपरंपार है उनके गुणों का चिंतन करने से अपने आत्मिक गुणों का विकास होता जाता है विपरीत समय में भी भगवान का चिंतन करने से संकट अपने आप  टलते जाते क्योंकि पारसनाथ भगवान ने संघर्षों का सामना समता भाव के साथ किया इसीलिए पारसनाथ भगवान हमारे आदर्श है संकटों को टलने के लिए प्रभु की उपासना नहीं की जाती बल्कि सच्चे भक्तों को यह विश्वास होता है कि प्रभु भक्ति करने से उसके संकट स्वयं अपने आप टल जायेंगे इसे निष्काम भक्ति कहते हैं निष्काम भक्ति कर्म निर्जरा का सबसे बड़ा कारण है पारसनाथ भगवान पर कमठ उपसर्ग करता रहा किंतु उन्होंने प्रतिकार नहीं किया क्योंकि विरोध करने पर उनकी ऊर्जा मूल लक्ष्य से भटक जाति और मोक्ष का द्वार नहीं खुल पाता।

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