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पथरिया लखरौनी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन.. तीर्थंकर बालक के जन्म कल्याणक की खुशियां मनाई गई.. मुनिश्री अजितसागर जी के प्रवचन का लाभ मिला.. इधर दमोह जैन धर्मशाला में मुनि श्री आगम सागर एवं आर्यिका श्री अकंप मति माताजी के मंगल प्रवचन..

 संसार से मुक्ति का प्रथम सोपान जन्म कल्याणक- मुनिश्री अजितसागर

दमोह। पथरिया के लखरौनी में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन तीर्थंकर बालक का प्रथम प्रभात की प्रथम किरण के साथ जन्म हुआ तीर्थंकर बालक के जन्म होते ही सारे नगर में उत्सव का माहौल फैल गया सारे नगर में बधाई हुई सारे नगर में हर्ष का माहौल व्याप्त हो गया
 इन्द्र इन्द्राणीं चारों ओर बधाई करते हुए नजर आ रहे थे वहीं दूसरी ओर स्वर्ग के सौधर्म इंद्र का सिंहासन कंपाय मान होने लगा तब उसे अवधिज्ञान से जाना कि भगवान का जन्म हुआ तब सौधर्म इंद्र ने अपने सिंहासन से सात कदम आगे चलकर उन्हें स्वर्ग से ही प्रणाम किया एवं सभी देवों को आदेश दिया कि भगवान का जन्म कल्याणक अयोध्या नगरी में मनाने जाएगा फिर सचि इंद्राणी के साथ ऐरावत हाथी पर नगर की सात परिक्रमा करके पाण्डुक शिला पर विराजमान कर 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक किया
उसके पश्चात पूज्य मुनि श्री के मांगलिक प्रवचन हुए। मुनि श्री जी ने तीर्थंकर बालक के जन्म के संदर्भ में प्रकाश डाला एवं बच्चों को संस्कारित करने का एवं हमारे बच्चे कल का भविष्य बने देश और धर्म की रक्षा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। दोपहर की बेला में पूज्य मुनि श्री जी के ससंघ सानिध्य में 8 साल से 15 साल तक के बच्चों का उपनयन संस्कार का कार्यक्रम किया गया।
प्रचार मंत्री कवीश सिंघई ने जानकारी देते हुए बताया कि संध्या कालीन बेला में महा आरती का आयोजन हुआ उसके पश्चात तीर्थंकर बालक के जन्म की खुशी में बधाई हुई और बाल कीड़ा का बहुत ही सुंदर मंचन किया गया समिति ने  सभी से इन मांगलिक क्षणों में पधारकर धर्म लाभ अर्जित  करने की अपील की है ।

धर्म के हिसाब से वैभव की प्राप्ति होती है-मुनि श्री आगम सागर जी
दमोह। नगर की जैन धर्मशाला में इस समय आचार्य विद्यासागर के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री आगम सागर जी महाराज स-संघ विराजमान है परम पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में प्रतिदिन जैन धर्म से संबंधित ग्रंथों पर क्लास भी लगाई जा रही है। मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ने आज सुबह अपने प्रवचनों में कहा कि आप लोग जागृत हो जाइए जो लोग जिस हिसाब से धर्म करते हैं उसे उसी हिसाब से दुनिया के वैभव प्राप्त होते हैं जो लोग हफ्ते में एक या दो बार पूजन करते हैं उनकी दुकान भी हफ्ते में एक या दो दिन ही चलती है जो लोग नित्य पूजन पाठ करते हैं उन्हें वैसा ही फल प्राप्त होता है 
 इसलिए प्रभु के पूजन पाठ में कंजूसी मत करो पूज्य मुनि श्री ने कहा आदर्श बनना है तो प्रभु राम के जैसा आदर्श बनो जिन्होंने पिता की आज्ञा का मान रखने के लिए राज्य तक को छोड़ दिया किंतु आजकल के पुत्र घर में रखें सिलबट्टे का भी विभाजन कर देते हैं। 
मुनि संघ के अलावा जैन धर्मशाला में आर्यका संघ भी विराजमान है पूज्य अकंप मति माताजी ने इस दौरान अपने जीवन का भी वृतांत सुनाया पूज्य आर्यिका श्री ने अपने जीवन की यात्रा गुरुदेव के सानिध्य में कैसे प्रारंभ की इसका पूरा विवरण लोगों के बीच सुनाया इस अवसर पर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर जैन वेलकम नन्हे मंदिर प्रबंध कारिणी के अध्यक्ष गिरीश नायक मानव बजाज लोकेश गांगरा महेश बड़कुल सहित सैकड़ों की संख्या में धर्मावलंबियों की उपस्थिति देखी गई ।

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