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कुंडलपुर में धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम.. दान का उपयोग 4 भागो में करना चाहिए.. आचार्य उदारसागर जी.. जबेरा में पर्यूषण पर्व आयोजन.. महाराजा अग्रसेन की 14 वीं महाआरती.. बाल समाज गणेशोत्सव अमृत वर्ष आयोजन.. हाथ में धनुष वाली गणेश प्रतिमा आकर्षक का केन्द्र

कुंडलपुर में धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम

 कुंडलपुर। जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में दशलक्षण  महापर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंखला में तांबोला (जैन हाउजी )कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंगलाचरण की सुंदर प्रस्तुति कुमारी भूमि एवं अनुष्का जैन द्वारा की गई । तांबोला हाउजी कार्यक्रम का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। जिसमें संम्यक ज्ञान पुरस्कार ब्रह्मचारिणी मीना दीदी, सम्यक चारित्र पुरस्कार कुणाल जैन और मोक्ष यानी प्रथम पुरस्कार पुजारी आदित्य जैन अभाना को प्राप्त हुआ। सभी को पुरस्कार वितरित किए गए ।

 तंबोला कार्यक्रम के पश्चात महिला वर्ग द्वारा सुंदर आरती गरवा नृत्य की प्रस्तुति की गई ।विभा जैन शिक्षिका ,शिखा जैन, सुरभी जैन, शैली जैन ने सुंदर प्रस्तुति दी। संस्कार जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया गया।

श्री भक्तांमर महामंडल विधान का भव्य आयोजन..

कुंडलपुर। सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में महान पर्व दशलक्षण धर्म के पावन अवसर पर धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजनों में श्रद्धालु भक्त उत्साह उमंग के साथ अपनी सहभागिता निभा रहे हैं प्रातः बड़े बाबा के समक्ष श्री भक्तांमर महामंडल विधान का भव्य आयोजन हुआ । विधान के पुण्या र्जक प्रकाश चंद, कैलाश चंद, बाबूलाल जैन राहतगढ़ थे ।पूज्य बड़े बाबा की शांति धारा करने का सौभाग्य श्रीमती कल्पना कमल कुमार जैन परिवार सागर, अजित आदिनाथ जैन उदगांव इचलंकर जी महाराष्ट्र ।
 सोनू जैन प्रभा जैन स्वर्गीय अशोक कुमार परिवार बेगमगंज ,डॉक्टर अरुण जैन शालिनी जैन पूर्णायु कुंडलपुर को प्राप्त हुआ । भगवान पारसनाथ की शांति धारा कोठारी सुशीला देवी चेतन लाल परिवार परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान, मुकेश संजय जिनेंद्र जैन इंदौर को प्राप्त हुआ । दोपहर में शांति विधान पुण्यार्जक परिवार प्रकाश चंद जैन पुजारी कुंडलपुर द्वारा शांति विधान भक्ति भाव पूर्वक किया गया । 
त्याग ही जीवन को पावन बनाता है -मुनि श्री जी
इस अवसर पर  संत शिरोमणि पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन देते हुए बताया जहां तप होगा वहां त्याग होगा ।जो तपस्वी होता है वह छोड़ता है उसका नाम त्याग है। जो त्याग हम कर रहे हैं अंतरंग में भी हम उसकी नींव मजबूत बनाएं। त्याग बहिरंग से नहीं हो सकता। त्याग ही जीवन को पावन बनाता है। एक छोटे से त्याग से मनुष्य से देव बना जा सकता है ।त्याग से ही ऊंचा उठा जा सकता है ।त्याग महान धर्म है। दान और त्याग यह दो शब्द आते हैं ।दोनों में थोड़ा सा अंतर है। दान त्याग धर्म का एक अभिन्न अंग है। आज तक त्याग के बिना किसी को मुक्ति नहीं मिली। राग द्बेष से अपने को छुड़ाने का नाम त्याग है। सायं काल पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय ,भक्तिमय महा आरती एवं 48 दीपों से भक्तांमर पाठ का आयोजन हुआ। रात्रि में विद्या भवन में आरती नृत्य ,प्रवचन के पश्चात नेमी राजुल विवाह नाटक का भव्य मंचन हुआ।
 
दान का उपयोग 4 भागो में करना चाहिए- उदारसागर जी
दमोह। श्री 1008 पार्श्वनाथ दिग.जैन मंदिर नेमीनगर दमोह में दशलक्षण महापर्व पर मंदिर जी में विराजमान परमपूज्य आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज की मंगल देशना प्रातः 8ः30 से प्रतिदिन श्रावको को प्राप्त हो रही है। दशलक्षण महापर्व के 8 वें दिन उत्तम त्याग (दान) पर आचार्य श्री ने कहा कि जिस साधु के पास 2 पैसा है वह साधु 2 पैसा का नहीं है एवं जिस श्रावक के पास 2 पैसा नहीं है वह श्रावक का जीवन 2 पैसा का नही है। 
अर्थात सच्चा साधु वहीं है जो पूर्ण रूप से परिग्रह से रहित हो एवं एक आदेश व्यक्ति वहीं है जिसके पास अपने परिवार को चलाने के पर्याप्त पैसा हो एवं उस कमाये हुये धन को अपने परिवार को चलाने के पश्चात् त्याग एवं दान को महत्व देता है। त्याग व्यक्ति की आंतारिक क्रिया है एवं दान ब्राह क्रिया है। श्रावक को अपना दान चुर्तविहा संघ की सेवा में लगाना चाहिए। दान का उपयोग चार भागो में करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने कमाये हुये धन इस प्रकार त्याग व दान करता है वह व्यक्ति निश्चित रूप से अपने जीवन को सफल बनाता हैं। 
त्याग व दान के माध्यम से ही पापों का प्रक्षालन होता हैं। क्योंकि प्रकृति का नियम है प्रत्येक भारी वस्तु नीचे जाती है और हल्की वस्तु ऊपर रह जाती है। अतः आप जीवन में ऊपर उढ़ना चाहते है तो अपने जीवन में त्याग व दान का अपनाइयें और उसके महत्व को समझने का प्रयास करें तो निश्चित ही हम सबका कल्याण होगा।

जबेरा में पर्यूषण पर्व पर हो रहे विविध आयोजन..
दमोह। जबेरा नगर के जैन मंदिरों में पर्व राज पर्यूषण पर्व बड़े ही धूमधाम व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी पर्व के चलते इसी पर्व के चलते सभी जैन मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जा रहा है। 
सुबह से इंदौर से पधारे ब्रह्मचारी विमल भैया जी के सानिध्य में पूजन, अभिषेक व शांति धारा नित्य प्रतिदिन कराई जा रही है इसके उपरांत भैया जी के प्रवचन तत्वार्थ सूत्र का वाचन, दोपहर में मंगल विधान, शाम कालीन आरती के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। आज श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में 1 मिनट प्रतियोगिता के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक, नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा नृत्य आदि प्रस्तुतियां दी गई। जो लोगों में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। 

इन सभी प्रतियोगिता व कार्यक्रमों में जैन समाज के लोग बड़े ही उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। 1 मिनट प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को प्रथम द्वितीय तृतीय को पारितोषिक वितरित किए गए साथ ही पाठशाला परिवार में अध्यनरत बच्चों को प्रमाण पत्र देकर पुरस्कार वितरण किए। सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा इन  10 दिनो में पर्व राज पर्यूषण पर्व में धर्म लाभ लिया जा रहा है।
 
महाराजा अग्रसेन की चौदहवीं महा आरती संपन्न
दमोह। अग्रवाल समाज द्वारा प्रत्येक माह महाराजा अग्रसेन की महा आरती का भव्य आयोजन महाराजा अग्रसेन मंदिर फुटेरा वार्ड 2 में किया जाता है। इसी क्रम में 14 वी महाआरती में उत्साह के साथ बड़ी संख्या में समाज जनों ने भाग लिया।  पं बृजेश पाठक के सानिध्य में भगवान श्री गणेश माता लक्ष्मी व महाराजा अग्रसेन के पूजन अर्चन के बाद महा आरती का आयोजन करके प्रसाद वितरण किया गया। 
इस अवसर पर अग्रवाल समाज के अध्यक्ष रवि शंकर अग्रवाल, महिला महासभा की प्रदेश महामंत्री रमा अग्रवाल, महिला मिलन समिति की नवनिर्वाचित अध्यक्ष संगीता अग्रवाल, डॉ अशोक अग्रवाल नंदकिशोर विजय विनोद संदीप गुरुदत्त स्वप्नेश प्रभु नारायण कपिल विकास ओम विराज रचना दीप्ति सीता रानी शीला रानी अनीता सेजल निशा रितु रेखा बबीता रिद्धि मंजूला आशारानी आभा अंजलि रचना संगीता गायत्री संध्या रानी पूर्वी सेजल नीतू शोभा उर्मिला मृदुला रश्मि सावित्री प्रमिला अर्चना प्रीति माया रानी परी आकर्ष एकस पीहू स्वस्ति ओम देवांश सुलेखा संजय चीकू सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुषों व बच्चों की उपस्थिति रही।  अगली महाआरती का आयोजन 4 अक्टूबर 2022 को किया जावेगा जिसमें सभी समिति के अध्यक्ष ने सभी से उपस्थित होने की अपील की है
 
 बाल समाज गणेशोत्सव अमृत वर्ष में आयोजन..
दमोह। श्री बाल समाज गणेषोत्सव समिति महाराष्ट्र मण्डल दमोह इस वर्ष गणेष उत्सव का अमृत वर्ष मना रहा है। यह दमोह जिले का प्राचीनतम गणेष मंडल है जिसकी स्थापना वर्ष 1946 में हुई थी। श्री बाल समाज गणेषोत्सव की स्थापना का श्रेय स्वण् श्री चंद्रकांत सोनवलकर को जाता है जिन्होंने श्रीराम मंदिर से इसकी शुरूआत की थी बाद में इसने सार्वजनिक स्वरूप धारण किया। मराठी समाज परंपरागत रूप से अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर हर्षोल्लास गणेष पर्व का आयोजन करता है। श्री जी की स्थापना गणपति अथर्व शीर्ष के सामूहिक पाठ से हुई।
ऋषि पंचमी को श्री दत्त भजन मंडल द्वारा भजन किये गये। श्रुति संगीत साधना कला केन्द्र दमोह के 20 कलाकारों ने मराठी समाज के मंच पर एक से बढ़कर गीतए भजन और सुगम संगीत की प्रस्तुतियाँ दीं तथा सबका मन मोह लिया। मण्प्रण् लेखक संघ के तत्वावधान में स्थानीय कवियों और शायरों ने अपनी प्रस्तुति देकर बाल समाज के मंच पर अपनी हाजिरी दी। देर रात्रि तक श्रोतागण कविताओं का आनंद उठाते रहे।
राज्य स्तरीय ख्याति प्राप्त अनहद कला केन्द्र दमोह के कलाकारों ने बाल समाज के मंच पर गणेष वंदना की प्रस्तुति दी। साथ ही बाल कलाकारों ने अनेक प्रस्तुति देकर नृत्य निषा को यादगार बनाया। दोपहर के सत्र में महिला समाज की अनेक प्रतियोगितायें संपन्न हुईं। सभी प्रतियोगिताओं का पुरूस्कार वितरण समारोहपूर्वक किया जावेगा। इस वर्ष बाल समाज की झाँकी की थीम तिरंगा पर केन्द्रित है। बाल समाज गणेषोत्सव समिति ने सभी से गणेष उत्सव के कार्यक्रमों में उपस्थिति का आग्रह किया है। पूर्व में संगीत क्षेत्र के अनेक सिद्धहस्त कलाकार अजय पोहनकर संजीव अभ्यंकर राधे मंडल भुवनेष कोमकली अग्रवाल बंधु मेघा सूबेदार अरूण पलनीटकर आदि की प्रस्तुतियाँ महाराष्ट्र समाज के मंच पर की गई है। मराठी समाज ने आज भी इस परंपरा को जीवित रखा है। 

हाथ में धनुष वाली गणेश प्रतिमा आकर्षक का केन्द्र..
दमोह। असाटी वार्ड 2 में चौरसिया परिवार के प्रतिवर्ष धूमधाम से घर गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाती में यहां इस वर्ष विराजमान गणेश जी की मनमोहक प्रतिमा आकर्षण का केन्द्र बनी है।
 जिसमें गणेश जी सफेद रंग के कड़ाई वाले वस्त्र, हाथ में धनुष, शंख लिये हुए है वहीं गले में मोतियों की माला पहने हुए है जो प्रतिमा की सुदंरता को अधिक बड़ा रही है। वहीं उनके दाई ओर उनके वाहन चूहा बैठा हुआ है। राजकुमार चौरसिया, प्रिंस चौरसिया, अमन चौरसिया ने बताया कि वे गणेश विसर्जन के दिन शाम 5 बजे पुराना तालाब में गणेश प्रतिमा का विसर्जन करेगें।

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