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झलौन में ‌धूमधाम से क्षमावाणी पर्व मनाया गया, निकली ‌श्री जी की भव्य शोभा यात्रा.. इधर हिन्दी लेखिका संघ ने मनाया हिन्दी दिवस, विदा करो अब पाहुनी- पुष्पा चिले

झलौन में ‌धूमधाम से निकली ‌श्री जी की शोभा यात्रा
दमोह। पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व समापन के अवसर पर रविवार को सकल जैन समाज के द्वारा चंदा प्रभु दिगंबर जैन मंदिर झलौन में बड़े ही धूमधाम से क्षमावाणी पर्व मनाया गया। ‌प्रातःकाल श्री जी की अभिषेक शांति धारा संपन्न हुई । शांति धारा करने का सौभाग्य राजेंद्र कुमार जैन के परिवार एवं महेंद्र कुमार जैन किराना परिवार को प्राप्त हुआ ।
इसके बाद पुराना बाजार प्रांगण में श्री जी को पालकी जी में विराजमान कर बैंड बाजा के साथ आरती बंदन निर्तय करते हुए ‌शोभा यात्रा निकाली गई जो ग्राम के  नया बाजार वन परिक्षेत्र कार्यालय बस स्टैंड आदि प्रमुख मार्गो से होते हुए जहां समाज के सभी पुरुष एवं महिलाओं ने अपने-अपने घरों के सामने रंगोली से चौक पूरकर श्री जी की आरती में नारियल रखकर ‌ पूजा अर्चना ‌‌करने का सौभाग्य प्राप्त कर मंदिर जी में शोभायात्रा का समापन हुआ।
मंदिर जी में पहुंचकर श्री शांतिधारा संपन्न हुई।इसके पश्चात् क्षमावाणी महोत्सव की सभा का संचालन शिक्षक जितेंद्र जैन द्वारा किया गया जिसमें मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुरेशचंद जैन शिक्षक ‌दिनेश जैन राजेंद्र जैन श्रीमती तिलक रानी जैन अखिल भारतवर्षीय महिला परिषद की अध्यक्ष श्रीमती सरिता जैन ‌आदि ने क्षमावाणी के इस अवसर पर अपने-अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा जैन धर्म में अनेक ऐसी विशेषताएं हैं ,जो इसे असाधारण बनाती है, उनमें क्षमावाणी पर्व भी ,मुकुट में मणी के समान सुशोभित है। भाद्रपद में दशलक्षण,सोलह कारण , रत्नत्रय की पूर्णति पर हर बर्ष हर प्राणी के प्रति जाने अनजाने में हुईअविनय, भूल को सुधारने स्नेह सोहार्द कायम रखने, पूरे विश्व में क्षमावाणी पर्व  सभी श्रद्धा भक्ति सहित मनाते हैं,।उपस्थित सभी पुरुष महिलाओं‌  छोटों बड़ों से‌ जाने ‌अनजाने में हुई गलतियों या नहीं भी हुई गलतियों पर सभी ने अपने-अपने निर्मल भाव से एक दूसरों को हाथ जोड़कर गले लगाकर उत्तम क्षमा सबसे क्षमा सबको क्षमा जैसे भाव वियक्त किये और आयोजित स्वल्पाहार में समलित हुए।

हिन्दी लेखिका संघ ने मनाया हिन्दी दिवस.. दमोह। हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर हिन्दी लेखिका संघ की काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई।यह कार्यक्रम आराधना राय के सौजन्य से आयोजित हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अर्चना राय, विशिष्ट अतिथि लता गुरु एवं अध्यक्ष संस्था अध्यक्ष पुष्पा चिले रहीं। संचालन डॉ प्रेमलता नीलम ने किया।मां सरस्वती के पूजनोपरांत पद्मा तिवारी ने मां की वंदना प्रस्तुत की। पुष्पा चिले ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हिन्दी हमारी मातृभाषा होकर भी अपने ही घर में बेचारी क्यों बनी है। राष्ट्र भाषा प्रचार समिति लगातार प्रयास कर रही है कि मातृभाषा राष्ट्र भाषा घोषित हो।आज हम सब यह संकल्प लें कि हस्ताक्षर हम हिन्दी में ही करें और परिवार में सबको हिन्दी की महत्ता बतायें। मुख्य अतिथि अर्चना राय ने कहा कि अपनी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए हिन्दी को गरिमा प्रदान करें। विशिष्ट अतिथि लता गुरु ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता को छोड़कर अब हमें अपनी संस्कृति एवं मातृभाषा को महत्व देना चाहिए। डॉ प्रेमलता नीलम ने हिन्दी को मां के रूप में मानने की बात कही। सुरम्या के विषय में चर्चा हुई। आभार आराधना राय ने व्यक्त किया। 

दूसरे चरण में काव्यांजलि प्रस्तुत की गई। पुष्पा चिले ने कहा विदा करो अब पाहुनी, बहुत हुआ सत्कार। हिन्दी सांसों में बसे, देश का हो उद्धार। डॉ प्रेमलता नीलम ने पढ़ा कब तलक दूसरे की मां को कहोगे अपनी, मातृभाषा को ही नमन तुम्हें करना होगा। कुसुम खरे श्रुति ने कहा वन्दे मातरम् बोलिए, मातृभाषा को पूजिये। मधुलता पाराशर ने कहा नहीं सीमित रही अब मातृभाषा। संगीता पान्डे ने पढ़ा हिन्दी से उजियारा लायें, सारे जग में दीप जलायें। पद्मा तिवारी ने कहा बीता जिसमें बचपन, यौवन, यही मौन की भाषा है,गौरव है ये हिन्द देश का यही भविष्य की आशा है। वसुंधरा तिवारी ने पढ़ा गूंजी हिन्दी विश्व में, स्वप्न हुआ साकार, राष्ट्र भाषा के मंच से हिन्दी की जय जयकार। मनोरमा रतले ने कहा हम हिन्द के वासी, हिन्दी बोलने में क्यों शरमाते हैं। आराधना राय ने कहा हमारे रक्त में संवेदना है समृद्धि है,हम मोहताज नहीं किसी पांव पर खड़े होने के लिए। डॉ संगीता पाराशर ने पढ़ा हमारी हिन्दी है देखो बुलन्दी पर, हमें गर्व है हिन्दुस्तान पर। लता गुरु ने कहा हिन्दी भाषा सबसे प्यारी, है यह भाषा जग में न्यारी। अर्चना राय ने पढ़ा हिन्दी न्यारी है,सरल है,पर इसे बोलने में लोगों को गुरेज है।कब यह परायापन मातृभाषा से दूर होगा। बड़ी संख्या में बहनों की उपस्थिति रही।

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