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कुंडलपुर में आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक एवं बड़े बाबा उच्चासन दिवस 17 को मुनि संघ के सानिध्य में.. इधर दमोह नगर में मुनि संघ की भव्य मंगल आगवानी एवं मंगल मिलन..

आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक एवं बड़े बाबा उच्चासन दिवस17जनवरी को मनाया जायेगा

 दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में महा समाधि धारक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य विद्या शिरोमणि पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर पूज्य बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान का निर्वाण कल्याणक महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जायेगा ।

इस अवसर पर पूज्य बड़े बाबा का उच्चासन दिवस भी धूमधाम से मनाया जाएगा। प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि  20 वर्ष पूर्व 17 जनवरी सन् 2006 में युगश्रेष्ठ परम पूज्य आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के ससंघ मंगल सानिध्य में आचार्य श्री के पड़गाहन पर हजारों हजार श्रद्धालु भक्तों की साक्षी में आज ही के दिन पूज्य बड़े बाबा पुराने मंदिर से गगन विहार कर नए मंदिर में उच्चासन पर विराजमान हुए थे। इस अवसर पर प्रातः श्री भक्तामर महामंडल विधान ,बड़ेबाबा महामंडल विधान मुनि श्री पदमसागर जी महाराज के मंगल आशीष वचन,पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक रिद्धिकलश, शांतिधारा होगी ।

 श्रद्धालु भक्तों द्वारा अत्यंत भक्तिभाव पूर्वक पूज्य बड़े बाबा के श्री चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित किया जायेगा। दोपहर में पूज्य मुनि श्री पदमसागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम, मुनिश्री के मंगल प्रवचन, मिष्ठान वितरण किया जाएगा। सायंकाल भक्तामर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती की जायेगी।  क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ सहित पदाधिकारी सदस्यों ने श्रद्धालु भक्तों से कुण्डलपुर पधारकर धर्म लाभ लेने हेतु अनुरोध किया है।
 मुनि संघ की हुई मंगल अगवानी दो संघों का मिलन
दमोह। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज से दीक्षित परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 सागर जी महाराज मुनि श्री विभस्वर मुनि श्री सिद्धपयोग सागर मुनि श्री सागर जी मुनि श्री श्रम सागर जी के नगर आगमन पर समाज के द्वारा मंगल अगवानी की गई। मुनि संघ के आगमन पर सिंघई मंदिर में विराजमान मुनि श्री सौम्य सागर जी एवं मुनि श्री जयेंद्र सागर जी  ने धगट चौराहा जाकर मुनि संघ अगवानी में सम्मिलित हुए।
चौराहे पर दो मुनि संघ का मधुर मिलन हुआ इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई कुंडलपुर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंघई शाकाहार उपासना परिसंघ के अध्यक्ष आशीष गंगरा सिंघई मंदिर समिति के अध्यक्ष रिंकू सिंघई श्रावक कल्याण समिति के महामंत्री सुनील वेजीटेरियन विनय विनम्र आकाश अक्षत सेठ पंडित अखिलेश जैन सवन सिल्वर आदि की उपस्थित रहे।
इसके पूर्व सिंघई मंदिर में अपने प्रतिदिन के प्रातः कालीन प्रवचनों में मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य का अकारण क्रोध आना और उसके बाद पछताना कापोत लेशिया का प्रतीक है अनुकूल परिस्थितियों में क्रोध नहीं आना कोई बड़ी बात नहीं है किंतु प्रतिकूलता में क्रोध पर नियंत्रण न होना मनुष्य की बहुत बड़ी कमजोरी है द्रव्य शुद्ध नहीं तो भाव शुद्ध नहीं हो सकता चंदन की लकड़ी शीतलता देती है किंतु जलाए जाने पर ताप भी उत्पन्न करती धर्म से राग भी संसार भ्रमण कराता है शुभ राग और अशुभ राग दोनों ही संसार के कारण है मोक्ष प्राप्त करने के लिए मुनि  धर्म का पालन आवश्यक है अशुभ से निवृत्ति शुभ की ओर ले जाती है अशुभ शुद्ध की ओर नहीं ले जाता जबकि शुभ शुद्ध की ओर ले जाता है चंदन की लकड़ी जलाने पर ताप तो देती है किंतु सुगंध भी देती है जबकि बेशर्म की लकड़ी जलने के साथ दुर्गंध देती है चंदन की राख भी सुगंधित होती है शुभ कार्य हमें अशुभ की प्रवृत्ति से बचाते हैं।

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