कुण्डलपुर में आचार्य श्री का द्वितीय समाधि दिवस
दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुण्डलपुर में विश्व वंदनीय,जन जन के संत महान तपस्वी आचार्य श्री विद्या सागर जी के द्वितीय समाधि दिवस पर आचार्य श्री समयसागर जी के मंगल आशीर्वाद एवं आचार्य श्री विशद सागर जी, मुनिराजो माताजी ससंघ सानिध्य में प्रातः काल भक्तामर महामंडल विधान, आचार्य छत्तीसी विधान (पुन्यार्जक भामाशाह परिवार श्राविका श्रेष्ठी श्रीमती सुशीला पाटनी किशनगढ़) अभिषेक, शांतिधारा, ऋद्धि कलश संपन्न हुआ। सांयकाल भक्तामर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की महाआरती हुई। संयम स्वर्ण कीर्ति स्तंभ पर एक दीप गुरु समीप दीप प्रज्वलित कर आचार्य श्री की महा आरती कर गुरु चरणों में नमन किया।
प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि दोपहर में स्थानीय विद्याभवन में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज ने विन्यांजलि व्यक्त करते वह कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी ने संपूर्ण बुंदेलखंड पूरे भारत देश में जैन धर्म की जो अलख जगाई है उनके द्वारा अनेक तीर्थ का निर्माण हुआ, अनेक संतों अनेक आगम शास्त्रों का उद्भव हुआ। जिनधर्म को आगे बढ़ाने की उन्होंने कोशिश की उनकी प्रेरणा रही ।जब तक उनका जीवन रहा तब तक उन्होंने जन-जन के कल्याण के लिए बहुत अच्छे कार्य किये ।कितने दूर दृष्टि रहे गुरुदेव उन्होंने साधकों के साथ-साथ लोगों को धर्म मार्ग में लगाया ।ऐसे महान संत जिनकी छवि क्या नेता क्या अभिनेता ,जैन, अजैन सभी के दिलों में बसी हुई है । ऐसे आचार्य श्री विद्यासागर जी जो डोंगरगढ़ क्षेत्र पर समाधिस्थ हुए। सभी उनका समाधि दिवस अत्यंत भक्ति भाव से मनाते हैं ।संतों का दीक्षा दिवस समाधि दिवस अवश्य मानना चाहिए और यही भावना रहे हमारा अंतिम मरण समाधि मरण पूर्वक हो। यही भावना बड़े बाबा के चरणों में बैठकर भातें हैं । आचार्य विद्यासागर आचार्यों में चमकने वाले सूर्य थे। आचार्य श्री आगे आगे चलते गए और कारवां बढ़ता गया। साधना बढ़ाते चले गए और साधना के पुण्य प्रताप से सभी कार्य होते चले गए। वे जंगल ,तीर्थक्षेत्र एकांत में साधना करते थे । हमारे आराध्य हमारे बीच से चले गए लेकिन हम सभी हृदय में बसाए हैं सभी के अंतस में रहेंगे हमें उनके आदर्शों को प्राप्त करना है आप सभी ने जो भी सुना ग्रहण किया उसे जीवन में उतारना है।
इस अवसर पर आचार्य श्री विशदसागर जी के शिष्य मुनि श्री विशालसागर जी, मुनि श्री विभोरसागर जी, मुनि श्री विलक्ष्य सागर जी, मुनि श्री विपिन सागर जी ,पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रथमसागर जी, मुनि श्री प्रणेयसागर जी ,मुनि श्री योग्यसागर जी ,मुनि श्री मनोज्ञ श्रमण जी, मुनिश्री सौम्यसागर जी, मुनि श्री जयन्द् सागर जी , पूज्यआचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विभाश्वर सागर जी, मुनि श्री शुद्धोपयोग सागर जी ,मुनि श्री श्री सागर जी ,मुनि श्री श्रम सागर जी ,आर्यिका श्री भक्तिभारती जी, आर्यिका श्री सुवंदन माताजी , क्षुल्लिका श्री वासल्य भारती जी, डॉ सुनयश्री माताजी, क्षुल्लिका श्री सुमनश्री माताजी एवं दीदीजी ने आचार्य भगवान श्री विद्यासागर जी के प्रति अपनी अपनी विन्याजलि की अभिव्यक्ति की। संचालन अजय भैया झापन तमूरा वालों ने किया। इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों ने आचार्य श्री की पूजन संगीत की स्वर लहरियों के बीच झूमते नाचते प्रत्येक अर्घ चढ़ाकर भक्ति प्रकट की।
बांदकपुर में आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन.. बुंदेलखंड के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र बांदकपुर धाम में स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर बांदकपुर में आचार्य श्री गुरुवर विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि दिवस पर आचार्य श्री के परम प्रभावक शिष्य एवं आचार्य श्री समय सागर जी की आज्ञा से विराजमान मुनि श्री पद्म सागर एवं छुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी एवं ब्रह्मचारी मोनू भैया के सानिध्य में आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 36 मंडल बनाकर 37 महापात्र के द्वारा विधान का आयोजन किया गया। सन्नू भैया आकाश भैया के निर्देशन में शांति धारा अभिषेक के उपरांत विधान की क्रिया शुरू हुई।
विधान के माध्यम से छुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी ने अपनी दीक्षा दिवस के आचार्य श्री से संबंधित स्मरण सुनाएं। मुनि श्री पद्म सागर जी ने कहा कि आचार्य श्री ने अपने जीवन के 78 वर्ष में जो भी कार्य किया चाहे वह सामाजिक स्तर पर हो धार्मिक स्तर पर हूं शिक्षा के क्षेत्र में हो स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो गौशाला के क्षेत्र में हो जितना परिश्रम आज पंचम काल में आचार्य श्री ने किया शायद ही किसी आचार्य मुनि यो ने किया हो विपरीत परिस्थिति एवं अस्वस्थ होने के बाद भी जीवन के अंतिम क्षमता सभी क्षेत्रों में भरपूर कार्य किया आचार्य श्री के विषय में जितना कहा जाए सूर्य को दीपक दिखाने जैसा है एक कहावत होती है गुरु की महिमा वरणी न जाए गुरु नाम जपो मन वचन काय गुरु की महिमा के विषय में कहा गया है कि आकाश को कागज संपूर्ण जंगल की लकड़ी को कलम समुद्र के पानी को स्याही बना लो और स्वर्ग के देवता गुरु बृहस्पति भी गुरु की महिमा नहीं लिख सकते.
ऐसे आचार्य श्री जिन्होंने जीवन से प्रतिमाओं को दीक्षा देकर एवं अचेतन मूर्तियों को संस्कृत किया ऐसे आचार श्री के चरणों में जिनकी चार्य मुलाचार और समाचार के अनुसार थी ऐसे ऐसे गुरु के चरणों में श्रद्धा सहित बनियांजलि समर्पित करते हैं संध्याकालीन में आचार्य भक्ति के बाद संगीत किशोर लहरियो में महा आरती 108 दीपों के साथ की गई आचार्य श्री के जीवन चरण से संबंधित प्रश्न मंच का आयोजन किया गया उसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ इस अवसर पर आसपास के क्षेत्र के श्रावक जन उपस्थित रहे।
वृद्धाश्रम में फल एवं मिष्ठान वितरण कार्यक्रम संपन्न.. दमोह।युवक क्रांति संगठन द्वारा जिला कार्याध्यक्ष श्रीमती प्रीति गौतम का जन्म दिवस वृद्धा आश्रम में सोल्लास पूर्वक मनाया गया जिसमें फल एवं मिष्ठान का वितरण कर वृद्धजनो के साथ गीत संगीत का आयोजन संपन्न हुआ।
इस अवसर पर संगठन पदाधिकारी सुधीर विद्यार्थी,मनोज जैन,दिनेश प्यासी,अकरम खान,जयकुमार सुरभि, सौरभ विद्यार्थी, आजम खान, विनय मलैया, लालचंद राय, अथर्व पांण्डे एवं महिला पदाधिकारियों में मनीषा तिवारी, प्रज्ञा तिवारी, दुर्गेष मिश्रा, अनुश्री भट्ट, ज्योति दुबे, रेखा सिंघई, सुरभि जैन, ज्योति तिवारी नीलू सिंघई, रचना ठाकुर, सविता रजक आदि की प्रमुख रूप से उपस्थिति रही।




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