लंबित आवेदनों का समय सीमा में निराकरण सुनिश्चित हो
दमोह। आज संभागायुक्त अनिल सुचारी द्वारा दो महत्वपूर्ण बैठकें लेकर विभिन्न विषयों की गहन समीक्षा की गई। संभागायुक्त श्री सुचारी ने संकल्प से समाधान अभियान की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में विभागवार एवं सेवावार प्राप्त आवेदनों की स्थितिए उनके निराकरण की प्रगति तथा लंबित आवेदनों की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी विभागीय एवं जिला अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित आवेदनों का समय.सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा अधिक से अधिक आवेदनों का सकारात्मक निराकरण किया जाए।

संभागायुक्त श्री सुचारी ने कहा कि यह अभियान मुख्यमंत्री डॉण् मोहन यादव की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अभियान अंतर्गत सम्मिलित 106 सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने क्लस्टरए विकासखंड एवं जिला स्तर पर सुव्यवस्थित योजना बनाकर शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। इसी दौरान अगली बैठक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के संबंध में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया संभागायुक्त श्री सुचारी जिले के लिए रोल ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया के अंतर्गत अब तक पूर्ण किए गए तीनों चरणों की विस्तृत समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा.निर्देश प्रदान किए।
बैठक में उप.जिला निर्वाचन अधिकारी एसडीएम तहसीलदार नायब तहसीलदार सहित निर्वाचन कार्यसे जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी तथा संकल्प से समाधान अभियान के तहत संबंधित विभागों के सभी संबंधित अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।महिला कृषक अनुपमा पटेल कर रही एप्पल बेर का उत्पादन.. दमोह जिले की तहसील हटा के ग्राम पिपरिया किरण भैंसा निवासी प्रगतिशील महिला कृषक अनुपमा पटेल पति पवन पटेल ने कृषि विज्ञान केन्द्र दमोह के सहयोग से एप्पल बेर की फल उत्पादन का कार्य कर रहीं है अनुपमा पटेल विगत 5 वर्षों से अपने खेत में विभिन्न प्रकार की नई. नई कृषि तकनीकियों से अच्छी उत्पादन बाली किस्मों की खेती कर रही है। इसी के अंतर्गत श्रीमती पटेल ने अपने खेत में एक एकड़ जगह में एप्पल बेर की तीन प्रकार की किस्मों जैसे एप्पल बेर ग्रीन एप्पल बेर कश्मीरी एप्पल बेर की खेती कर रही है। प्रगतिशील महिला कृषक अनुपमा पटेल को शुरू के प्रथम वर्ष में पौध लागत सहित कुल खर्च एक एकड़ का 50 हजार रुपया आया था और कुल आय शुरू के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में 75 से 90 हजार रुपये प्राप्त हुई वर्तमान में अब हर वर्ष कुल खर्च सिर्फ 20 से 30 हजार रुपए एक एकड़ में आ रहा है। वर्तमान में कुल आय 1ण्50 से 1 65 लाख रूपये हो रही है। इस साल अभी तक ऐपल बेर का कुल उत्पादन 42 क्विंटल हो गया है । कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ मनोज अहिरवाल ने कृषकों से कहा है एप्पल बेर की खेती से किसान भाई अच्छा लाभ कमा सकते है। एप्पल बेर खाने में बहुत ही पोष्टिक एवं स्वादिष्ट होता है बेर को खाने से या बेर के कई उत्पादों को जैसे बेर जूस बेर कैंडी बेर पावडर मुरचन इत्यादि बना कर किसान भाई गांव में रोजगार उत्पन्न कर सकते है ए बेर खाने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है एवं पाचन में सहायक होता है। बेर जूस पीने से गर्मी में लू से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा बुंदेलखण्ड में पहले से ही देशी बेर की खेती होती आ रही है बेर के लिए उपयुक्त जलवायु अपने जिले दमोह एवं बुन्देलखण्ड में बहुत अच्छी है। बेर की खेती की तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसान भाई कृषि विज्ञान केन्द्र दमोह के वैज्ञानिक तथा कृषि विज्ञान केन्द्र दमोह एवं योजनाओं संबंधी जानकारी हेतु उद्यानिक विभाग से संपर्क कर सकते है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संरक्षण सहायक कार्यालय तैयार.. दमोह। ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में दमोह जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ;एएसआई के जबलपुर मंडल अंतर्गत दमोह में संरक्षण सहायक उप मंडल लगभग तैयार हो चुका है। शीघ्र ही यहां कंजर्वेशन असिस्टेंट की पदस्थापना की जाएगी। यह सफलता जिला प्रशासन के सतत प्रयासों और लगातार पत्राचार का परिणाम रही है। नवस्थापित कार्यालय शहर की एक प्राचीन में बनाया गया हैए यह ऐतिहासिक संरचना अपनी मजबूती और स्थापत्य सौंदर्य के लिए विशेष पहचान रखती है। भवन के भीतर ऊपर जाने के लिए 27 फीट 5 इंच ऊंची लोहे की सीढ़ी आज भी सुरक्षित और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। संरक्षण कार्यों को मिलेगा स्थानीय स्तर पर संबल.. नवगठित उप मंडल कार्यालय दमोह एवं आसपास के संरक्षित स्मारकों के संरक्षणए देखरेख और नियमित रखरखाव से जुड़े कार्यों के लिए स्थापित किया जा रहा है। सीनियर कंजर्वेशन असिस्टेंट सुभाष कुमार ने जानकारी दी यहां कंजर्वेशन असिस्टेंट सहित आवश्यक सहयोगी स्टाफ की नियुक्ति की जाएगीए जो स्मारकों की मरम्मतए संरचनात्मक मजबूती और संरक्षण संबंधी तकनीकी कार्यों को गति देंगे। क्षेत्रीय धरोहरों को मिलेगा लाभ.. उन्होंने कहा अब तक जबलपुर मंडल के अंतर्गत सागर जबलपुर रीवा और खजुराहो उप मंडल कार्यरत थे। दमोह में नए उप मंडल की स्थापना से क्षेत्रीय स्मारकों के संरक्षण कार्य अधिक सुदृढ़ प्रभावी और समयबद्ध तरीके से संपादित किए जा सकेंगे। वर्तमान भवन में मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। प्रशासनिक बैठक के उपरांत औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम की तिथि निर्धारित की जाएगी। यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को नई दिशा देगी बल्कि दमोह की सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त बनाएगी।
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