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भगवान श्री आदिनाथ जन्म-तप कल्याणक महोत्सव पर श्री जी की भव्य शोभायात्रा.. कुंडलपुर सहित सभी जैन मंदिरों में विविध आयोजन.. पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी का कुण्डलपुर में मंगल पदार्पण 14 को

श्री आदिनाथ जयंती पर श्री जी की भव्य शोभायात्रा

दमोह। देवाधिदेव आदि ब्रह्म, युग दृष्टा, असी मसी कृषि के जनक जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभ देव भगवान श्री आदिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव देश दुनिया के साथ दमोह में भी भक्ति मय उल्लास के साथ मनाया गया।  इस अवसर पर सभी जैन मंदिरों में विभिन्न आयोजन किए गए वही श्रीजी की भव्य शोभा यात्रा भी निकाली गई।
भगवान आदिनाथ जयंती महोत्सव चैत्र कृष्ण नवमी के अवसर पर गुरुवार को शहर के सिटी नल से प्रातः बेला में श्री जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस अवसर पर विमान जी में श्री जी को विराजित करके नगर भ्रमण किया गया। शोभायात्रा में आचार्य श्री विद्यासागर एवं आचार्य श्री समय सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री पदम सागर जी एवं क्षुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी के साथ आर्यिका वीर नंदनी जी, आर्यिका श्रुत नंदनी जी, क्षुल्लिका शुद्ध नंदनी जी एवं क्षुल्लिका शुभ नंदनी जी माता जी भी शामिल हुई। 
सिटी नल से पुराना थाना, टॉकीज तिराहा, घंटाघर, नया बाजार, पलंदी मंदिर, धगट चौराहा, चौधरी मंदिर बड़ा मन्दिर होते हुए शोभायात्रा सिटी नल पहुंचकर संपन्न हुई। रास्ते में जगह-जगह रंगोली सजाकर शोभा यात्रा की अगवानी की गई। श्री जी की आरती की गई। मुनि श्री का पाद प्रछालन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्मचारी मोनू भैया स्वतंत्र भैया गोलू भैया रोहित भैया पंडित सुरेश शास्त्री के साथ पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई, महामंत्री पदम जैन, भाई जी मंदिर के अध्यक्ष पवन जैन चश्मा, पलंदी मंदिर के अध्यक्ष गुड्डू बजाज, नन्हें मंदिर अध्यक्ष नवीन निराला, सिंघई मंदिर अध्यक्ष श्री सिंघई, दिलेश चौधरी, संजीव शाकाहारी मंदिरों के पदाधिकारी, आसामी एवं श्रावको महिलाओं सहित बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के लोगों की मौजूदगी रही।
शोभायात्रा संपन्न होने के बाद मुनि श्री पदम सागर जी के सानिध्य में सिंघई मंदिर जी में भगवान आदिनाथ का अभिषेक शांति धारा एवं भक्तांबर विधान संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री की दिव्या देशना का लाभ भी सभी को प्राप्त हुआ। इधर नन्हे मंदिर जी में छुलल्क श्री तात्पर्य सागर जी के सानिध्य में भगवान आदिनाथ का अभिषेक शांति धारा बड़े बाबा पूजन एवं भक्तांबर विधान संपन्न हुआ। इसके अलावा नगर के सभी जैन मंदिरों में प्रातः बेला में अभिषेक शांति धारा भक्तांबर विधान सहित अन्य भक्ति मय आयोजन करके भगवान आदिनाथ का जन्म तप कल्याण महोत्सव मनाया गया।
सिंघई मन्दिर मे जन्म कल्याण महोत्सव धूमधाम से मनाया

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान  ऋषभ देव का जन्म कल्याणक महोत्सव दमोह नगर में पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। नगर में विराजमान पूज्य आचार्य भगवान 108 समय सागर जी महा मुनि राज के परम प्रभावके शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 पदम सागर जी महाराज  एवं पूज्य आर्यिका 105 वीर नंदिनी माता जी के सानिध्य में प्रातः 8:00 बजे सिटी नल सिंघईमंदिर जी से भव्य शोभा यात्रा निकाली गई जिसमें पूज्य मुनि श्रीजी एवं आर्यिका संघ का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ।
 
श्रीजी की शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए पुनः सिटी नल सिंघई मंदिर जी पहुंचकर श्री जी का अभिषेक शांति धारा एवं पूजन पात्रों के चयन के माध्यम से किया गया। मुख्य पात्रों में संतोष सिंघई जी परिवार सबन सिल्वर परिवार राजेश ओशो परिवार आदि ने अभिषेक शांति धारा की।

पूज्य मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ने -अपने मांगलिक प्रवचनों में बताया की जैन धर्म तो अनादि निधन है जो की जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के समय से चला आ रहा है और जैन धर्म के 24 में तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के समय जैन धर्म का प्रचार प्रसार हुआ इसलिए हम सभी को सामूहिक रूप से भगवान आदिनाथ का जन्म महोत्सव एवं निर्माण महोत्सव पूरी गरिमा एवं उत्साह के साथ मनाना चाहिए।

इसी श्रृंखला में नगर की विभिन्न जैन मंदिरों में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए नन्हे मंदिर जी में भी पूज्य  तात्पर्य सागर जी महाराज के सानिध्य में अभिषेक पूजन आदि कार्यक्रम संपन्न हुए समस्त कार्यक्रमों में संतोष जी सिंघई नवीन जी निराला शैलेंद्र जी सिंघई रिशु सिंघई नितिन जैन जिनेंद्र उस्ताद सावन सिल्वर राजेश ओशो आशीष उस्ताद निलेश चौधरी संजय सराफ सहित जैन सांस्कृतिक मंडल के सदस्यों एवं महिला महासमिति की सदस्यों का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।

कुण्डलपुर में भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव.. दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुण्डलपुर में वैराग्य पथ के प्रथम पथिक, युगादिदेव, आदि ब्रह्मा, धर्मतीर्थ प्रवर्तक, जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष , षट्कर्मों के प्रणेता भगवान श्री ऋषभदेव (आदिनाथ ) जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव  चैत कृष्ण नवमी गुरुवार को हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया । भगवान ऋषभदेव आदिनाथ ने इस कलि काल में भटकती मानवता को सभ्य सुरक्षित और समृद्ध जीवन जीने का मार्ग दिखाया था ।उन्होंने ही समाज को असि( रक्षा), मसि( लेखन) ,कृषि (खेती ),वाणिज्य (व्यापार) ,शिल्प (कला) और विद्या (ज्ञान ) जैसे षटकर्मों की शिक्षा दी। उन्होंने न केवल मोक्ष मार्ग का उपदेश दिया बल्कि संसार में स्वावलंबी जीवन जीने की नींव भी रखी।वे संपूर्ण मानवता के मार्गदर्शक थे। 
इस अवसर पर प्रातः कुण्डलपुर कार्यालय से कुण्डलपुर पर्वत पर स्थित बड़े बाबा मंदिर तक प्रभात फेरी निकाली गई, भक्तामर महामंडल विधान, श्री बड़े बाबा महामंडल विधान ,पूज्य बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान  का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, शांति विधान हुआ । श्री जी का पालना झुलाया गया। इस अवसर पर प्रथम अभिषेक शांति धारा, रिद्धि कलश ,छत्र चंवर स्थापित करने का सौभाग्य कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष मोदी चंद्रकुमार सराफ सरोज आलोक अमित आयुष सपना श्वेता अनन्या आर्या सराफ परिवार दमोह, नवीन संगीता नमन नेहा श्रेयान जैन परिवार दिल्ली, नितिन अमृता अवनी आरना जैन भोपाल, रमेशचंद अनीता विकास जैन दिल्ली ,श्रीमती चंदा देवी अनिल संजीव जैन गंजबासौदा, स्वप्न सतीश जैन इंदौर, पुष्पा देवी मुकेश मानसी आर्या जैन गंजबासौदा, कपूरचंद आशीष दिशान जैन दुर्ग, अभिषेक अशोक फट्टा पथरिया ,विनोद संजय जैन सिंगापुर ,जय कुमार सिद्धार्थ जैन सुरभि लैब दमोह के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त कर जीवन धन्य किया। 
प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि सायंकाल भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय भव्य महाआरती हुई। इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी ,सदस्यों की उपस्थिति रही।
कुण्डलपुर में पूज्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ससंघ का मंगल पदार्पण 14 को.. दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र, जैन तीर्थ कुण्डलपुर की पावन धरा परपरम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य प. पू.पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का 14 मार्च 2026 दिन शनिवार को प्रातः 8:00 बजे भव्य मंगल प्रवेश होने जा रहा है।
प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि आचार्य संघ बड़े बाबा के मंदिर पहुंचकर पूज्य बड़े बाबा के दर्शन करेंगे। आचार्य संघ की आहारचर्या कुण्डलपुर में संपन्न होगी। श्रद्धालु भक्तों से अनुरोध है कि कुण्डलपुर पधारकर आचार्य श्री ससंघ की भव्य अगवानी में उपस्थिति प्रदान करके सातिशय पुन्यार्जन करें। 

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