मंत्री जी ने सामुदायिक भवन का भूमिपूजन किया
दमोह। ग्राम सगरोन एवं ग्राम मगरोन में सामुदायिक भवनों के भूमिपूजन के साथ.साथ प्रभु श्री वनवासी राम जी की प्राण प्रतिष्ठा के भव्य आयोजन में भी सहभागिता की। इसके अतिरिक्त ग्राम बरोदा एवं ग्राम हिनौती में सामुदायिक भवन एवं पुलिया निर्माण कार्यों का भी विधिवत भूमिपूजन किया गया। ये सभी विकास कार्य क्षेत्र की जनता के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगे। इस आशय के विचार प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री ;स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने रामनवमी के पावन अवसर पर विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रमों के दौरान व्यक्त किये।
इस अवसर पर राज्यमंत्री श्री पटेल ने क्षेत्र में सांदीपनि स्कूल ग्राम मगरोन में प्रारंभ होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस स्कूल के लिए पूर्व में भूमि चिन्हांकन के निर्देश दिए जा चुके हैं। सांदीपनि स्कूल लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होता हैए जिसमें विद्यार्थियों के लिए बस परिवहन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा बटियागढ़ में 14 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से आईटीआई भवन निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है जिसका टेंडर शीघ्र जारी कर कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसी प्रकार पथरिया में भी 14 करोड़ 54 लाख रुपये की लागत से आईटीआई भवन के निर्माण को मंजूरी प्रदान की गई है।
उन्होंने सांदीपनि स्कूल की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसे श्संदीपनिश् के नाम से भी जाना जाता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉण् मोहन यादव ने उज्जयिनी में संदीपनी गुरु से शिक्षा प्राप्त की थी इसी कारण प्रदेश में यह योजना संदीपनि के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि यहां भी बनने वाला स्कूल इसी नाम से जाना जाएगा। राज्यमंत्री लखन पटेल ने रामनवमी के पावन अवसर पर कलेही माता मंदिर पहुंचकर दर्शन पूजन अर्चन कर क्षेत्र और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न ग्रामों में विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रमों में भाग लिया।पीएमयूएम शिक्षक संघ ने मांगों का ज्ञापन सौंपा
दमोह।
पीएमयूएम शिक्षक संघ लखन पटेल जी मंत्री, पशुपालन विभाग को मप्र के शिक्षकों हेतु टीईटी परीक्षा की
अनिवार्यता के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका
दायर करने संबद्ध में ज्ञापन सौंपा। संघ के जिला
अध्यक्ष/प्रांत संयोजक पवन खरे ने बताया कि ज्ञापन में मुख्य रूप से मप्र में शिक्षकों की
नियुक्ति समय-समय पर मप्र शासन द्वारा जारी नियमों एवं आदेशों के
अंतर्गत की गई है। प्रदेश के हजारों शिक्षक वर्षों से अपनी पूर्ण योग्यता,
दक्षता एवं अनुभव के आधार पर शासकीय विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षण कार्य
कर रहे हैं। उनके द्वारा निरंतर बेहतर परीक्षा परिणाम दिए जा रहे हैं तथा
शासकीय विद्यालयों के छात्र विभिन्न उच्च पदों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में
सफलता प्राप्त कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में 20-25 वर्षों का शिक्षण अनुभव
रखने वाले शिक्षकों से टीईटी परीक्षा देना अपेक्षित करना उचित एवं
न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता है।इसके अतिरिक्त, वर्ष 2005, 2008 एवं
2011 में व्यापम के माध्यम से पात्रता परीक्षा आयोजित कर संविदा शिक्षकों
की नियुक्ति की गई थी। उस समय संबंधित शिक्षकों ने पात्रता परीक्षा
उत्तीर्ण कर ही नियुक्ति प्राप्त की थी। अतः वर्तमान में पुनः टीईटी
परीक्षा के लिए बाध्य करना तर्क संगत नहीं है। पीएमयूएम शिक्षक संघ ने मंत्री लखन पटेल जी से आग्रह किया कि आप अपने माध्यम से माननीय
मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करते हुए मप्र शासन द्वारा टीईटी
अनिवार्यता के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने की कृपा करें, जिससे वर्षों से कार्यरत
अनुभवी शिक्षकों को न्याय मिल सके एवं मार्च 2026 में जिन शिक्षकों ने 12
वर्ष की सेवा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है उन सभी शिक्षकों के
क्रमोन्नति के आदेश जारी करवाने के लिए आग्रह किया। ज्ञापन में कार्यकारी
जिलाध्यक्ष कैलाश असाटी, कोषाध्यक्ष मोहन ठाकुर, नरेंद्र नामदेव, गिरजा
प्रजापति, प्रमोद प्रजापति, बैजनाथ नामदेव, ओमप्रकाश नामदेव, पारस साहू,
श्रीकांत पटेल, दिनेश सेन, अजय रोहित, मुकेश श्रीवास्तव, मयंक सोनी, संदीप
दत्त चतुर्वेदी, वेद प्रकाश खरे, अरविंद गर्ग, चंद्र शेखर नामदेव, सतेंद्र
परिहार, टीकाराम अहिरवाल, प्रीतम कोष्टी, शरद त्रिपाठी, दुर्गा प्रसाद राव,
सुंदर लाल अहिरवाल, धरम लाल अहिरवाल अनेक शिक्षकों की उपस्थिति रही।
युवा कुशवाहा समाज ने सम्राट अशोक जयंती मनाई
दमोह
:विश्वप्रसिद्ध शक्तिशाली एवं मौर्य राजवंश के महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक
मौर्य की जयंती युवा कुशवाहा समाज द्वारा पुरानी जिला पंचायत में अशोक
स्तम्भ पर मनाई गईं. सर्वप्रथम भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे और साहू समाज
के प्रदेशकार्यकारी अध्यक्ष सत्येंद्र साहू एवं कुशवाहा भाइयों ने एकसाथ
सम्राट अशोक मौर्य के चित्र पर माल्यार्पण किया. श्याम शिवहरे
जी ने सम्राट अशोक की जीवन गाथा सुनाते हुए कहा कि सम्राट अशोक (शासनकाल:
लगभग 268-232 ईसा पूर्व) मौर्य वंश के तीसरे और सबसे महान शासक थे,
जिन्होंने अखंड भारत पर शासन किया। प्रारंभ में क्रूर ('चंडाशोक') माने
जाने वाले अशोक ने, 261 ईसा पूर्व के भयानक कलिंग युद्ध के नरसंहार से
द्रवित होकर बौद्ध धर्म अपना लिया और अहिंसा, प्रेम व 'धम्म' के मार्ग पर
चल पड़े। सम्राट अशोक सेना के अध्यक्ष ने कहा कि अशोक भारत के मौर्य वंश के
अंतिम प्रमुख सम्राट थे। उन्होंने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में शासन किया।
बौद्ध धर्म के प्रति उनके व्यापक संरक्षण ने पूरे भारत में इस धर्म के
प्रसार को बढ़ावा दिया। युवा कुशवाहा समाज के गोपाल पटेल ने कहा कि अशोक के
बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने 40 साल के राज में क़रीब-क़रीब पूरे
भारतीय उपमहाद्वीप को एक सरकार के अंतर्गत जोड़ दिया था.चाणक्य (लगभग
371-283 ईसा पूर्व) प्राचीन भारत के एक महान दार्शनिक, अर्थशास्त्री,
राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे, जिन्हें कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी
जाना जाता है। उन्होंने तक्षशिला विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और
वहीं शिक्षक भी रहे। चाणक्य ने नंद वंश का नाश कर चंद्रगुप्त मौर्य के साथ
मिलकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की और अखंड भारत का निर्माण किया। कार्यक्रम
में बसंत कुशवाहा, डालचंद कुशवाहा, गोपाल कुशवाहा, मडाहार सरपंच नारायण
कुशवाहा, एड गजेंद्र कुशवाहा,गोपाल पटेल वाइंडिंग,, नारायण कुशवाहा
सरपंच,एड राजेश,एड गजेंद्र, डालचंद सचिव, पुरुषोत्तम कुशवाहा, पप्पू,बसंत
,गोपाल कुशवाहा युवा अध्यक्ष, लीलाधर, खेमचंद, प्रताप, मोहन
,द्वारका,योगेंद्र अशोक क्रांति सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष,बीडीसी
कुंडलपुर,कुशवाहा समाज की उपस्थिति रही। गोपाल पटेल ने जानकारी दी कि
29मार्च को माड़ियादो में सम्राट अशोक जयंती भव्य रूप से मनाई जाएगी जिसमें
सभी से उपस्थित होने की अपील की।
वैराग्य की कसौटी से सजा राम का आदर्श- श्री भगवान वेदांताचार्य.. दमोह।
भगवान श्रीराम का जीवन आदर्शों की एक उज्ज्वल ज्योति के रूप में स्थापित
है जो भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार वैराग्य के संदर्भ में उनके
व्यक्तित्व पर विशेष रूप से प्रेरणादायक सिद्ध हुआ जब उन्हें वनवास का आदेश
मिला, तब उन्होंने न केवल उसे सहज भाव से स्वीकार किया, बल्कि उसे धर्म
पालन का अवसर मानकर अपनाया। राजमहल के वैभव, सत्ता और सुख-सुविधाओं का
त्याग कर उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्चा वैराग्य बाहरी त्याग से अधिक
आंतरिक संतुलन और आत्मनियंत्रण में निहित होता है। राम का यह निर्णय समाज
के लिए एक सकारात्मक संदेश बनकर उभरा जिसमें जीवन में आने वाली हर
परिस्थिति को धैर्य और दृढ़ता के साथ स्वीकार करना ही श्रेष्ठ मार्ग है।यह
उद्गार साकेत धाम पीठाधीश्वर श्री महंत श्री श्री भगवान जी के वक्तव्य का
अंश है जो रामनवमी के पावन पर्व पर राम जन्मोत्सव के पश्चात भक्तों के मध्य
श्रव्य हुआ आगे कहते हैं की वनवास के दौरान भी श्रीराम का जीवन केवल तप और
त्याग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह कर्तव्य, सेवा और संरक्षण का उदाहरण
बना। उन्होंने ऋषि-मुनियों की रक्षा की, समाज में न्याय की स्थापना की और
राक्षसी प्रवृत्तियों का अंत किया। यह दर्शाता है कि उनका वैराग्य
निष्क्रियता नहीं, बल्कि सक्रिय धर्मपालन का प्रतीक था। कठिनाइयों के बीच
भी उनका संयम, सकारात्मक दृष्टिकोण और मर्यादित आचरण लोगों के लिए प्रेरणा
का स्रोत बना रहा। सीता और लक्ष्मण के साथ उनका संतुलित और अनुशासित जीवन
यह बताता है कि सच्चा वैराग्य व्यक्ति को समाज से दूर नहीं करता, बल्कि उसे
और अधिक जिम्मेदार बनाता है। आज के भौतिकवादी और प्रतिस्पर्धात्मक युग में
श्रीराम का यह आदर्श अत्यंत प्रासंगिक है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि
सफलता केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, त्याग और संतोष
से मापी जानी चाहिए। वैराग्य का अर्थ जीवन से विमुख होना नहीं, बल्कि जीवन
को सही दृष्टि से जीना है। राम का आदर्श हमें यह प्रेरणा देता है कि हम
अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए, धैर्य और सकारात्मकता के साथ जीवन की
चुनौतियों का सामना करें। इस प्रकार, वैराग्य की चौखट पर खड़े होकर श्रीराम
का जीवन आज भी समाज के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश बना हुआ है। महामंगल सेवा
समिति के द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित राम प्रकट उत्सव के 58 वर्ष में श्री
मानस पंचानन राकेश चतुर्वेदी लाला जी महाराज एवं श्री उमाशंकर चौरसिया जी
के द्वारा भी वक्तव्य प्रदान किया गया जिसमें राम नाम ही जीवन का आधार और
राम के अनुराग में निहित संदेश ही भक्ति जैसे विषयों पर विशेष रूप से
प्रकाश डाला गया वहीं सचिव श्रीमती शारदा वेद प्रकाश पाठक संरक्षक
पुरुषोत्तम शास्त्री एवं भक्त श्रेष्ठ जितेंद्र कुमार मिश्रा अरविंद पाठक
श्रीमती नेहा जगदीश मिश्रा सहित बद्री बाबा आचार्य दिनेश पाठक एवं ओम गुरु
अजय दीक्षित जी का अपने बटुकों आकाश, शरद और कान्हा के द्वारा अर्चन, पूजन,
वंदन एवं हवन करते हुए राम भक्तों में समाहित पुण्य का विधान दृष्टि गोचर
हुआ।
हॉकी मप्र महासचिव लोकबहादुर दिल्ली में सम्मानित
दमोह।
हॉकी मध्य प्रदेश के लिए गौरव के पल आज हॉकी इंडिया द्वारा दिल्ली मे
आयोजित वार्षिक सम्मेलन मे हॉकी मध्य प्रदेश महासचिव लोकबहादुर को
सर्वश्रेष्ठ संघ के रूप मे सम्मानित किया तथा दस लाख की राशि भी प्रदान की
जिससे हॉकी मध्य प्रदेश के विभिन्न आयोजन एवम सहभागिता हेतु प्रदान की इस
अवसर पर हॉकी इडिया अध्यक्ष दिलीप टिर्की महासचिव भोलानाथ जी कोषाध्यक्ष जे कुमारन उपस्थित रहे..हॉकी मध्य प्रदेश को वर्ष सोलह से वर्तमान तक
तेतीस मेडल प्राप्त हुये। हॉकी मध्य प्रदेश की उपलब्धि पर मध्य प्रदेश के
खेल मंञी विश्वास सारंग पूर्व मंञी विधायक जयंत मलैया मध्य प्रदेश ओलंपिक
संघ के महासचिव दिग्विजय सिंह हाकी मध्य प्रदेश से गोर मास्साब विजय
वर्मा ललित नायक जगेनदर तोमर सहसचिव किशोर शुक्ला मकसूद राजेश गढवाल
हरिशंकर यादव राजेश आभा रोहित भगवान सिंह कफील खान विजय अल्ताफ खान हॉकी
मध्य प्रदेश महिला साई कोच सरोज राजपूत विकास जैन तरूण नामदेव विवियन आदि
ने बधाई प्रेषित की है।





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