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बटियागढ़ बक़ायन खरीदी केंद्रों पर पहुचे कलेक्टर.. हटा में प्राकृत शिक्षण शिविर का शुभारंभ.. जबेरा कालेज में सीपीआर प्रशिक्षण.. हिन्दी साहित्य सम्मेलन, काव्य कृति विमोचन.. इंदिरा ज्योति यात्रा चलो रामराज्य की ओर का आगमन आज..

बटियागढ़ बक़ायन खरीदी केंद्रों पर पहुचे कलेक्टर

दमोह। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने समर्थन मूल्य पर चना और गेहूं की खरीदी व्यवस्था का जायजा लेने के लिए बटियागढ़ और बक़ायन खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बोरी तुलाई पर कलेक्टर श्री यादव ने देखा बोरी का वजन कराया।  कलेक्टर श्री यादव ने आज खरीदी केंद्र बकायन और बटियागढ़ का आकस्मिक रूप से निरीक्षण किया निरीक्षण के दौरान किसानों से चर्चा की किसानों ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें खरीदी में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो रही है व्यवस्था में आज बदलाव देखा गया किसानों के चेहरों पर खुशी नजर आ रही थी कह रहे थे कि कलेक्टर साहब स्वयं देखरेख कर रहे हैं अब हमें खरीदी केंद्रों पर किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हैए व्यवस्थाओं में बदलाव और सुधार हुआ है। कलेक्टर श्री यादव ने किसानों से अलग ले जाकर चर्चा भी की तब भी किसानों ने व्यवस्था पर संतोष जताया।

व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा.निर्देश दिए। कलेक्टर श्री यादव ने बताया कि कलेक्टर के फेसबुक पेज के माध्यम से किसानों की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें समय पर तुलाई न होना ओटीपी न आना और पावती न मिलना जैसी समस्याएं शामिल थीं। इन शिकायतों के आधार पर जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करने के लिए यह निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि कुछ व्यवस्थाएं संतोषजनक हैंए जैसे तुलाई और वजन की प्रक्रिया सही तरीके से हो रही है तथा छाया की व्यवस्था भी उचित है। हालांकिए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और किसानों को समय पर पर्ची नहीं मिल पा रही थी। इस पर उन्होने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को समय पर पर्ची उपलब्ध कराई जाए और सभी तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री यादव ने कमिश्नर फूड कर्मवीर शर्मा से भी चर्चा की। कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि रिपोर्ट प्राप्त होते ही तकनीकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगाए जिससे किसानों को ओटीपी समय पर प्राप्त हो सके और उनका पंजीयन सुचारू रूप से हो। उन्होने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं सुचारू रहे। खरीदी केंद्रों पर छाया एवं पेयजल का अभाव देखा गया जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये ।

हटा में प्राकृत शिक्षण शिविर का शुभारंभ.. दमोह। प्राकृत भाषा को सुरक्षित रखने  हेतु आयोजित आठदिवसीय शिक्षण शिविर का आज जैन समाज द्वारा प्राकृत भाषा के शिविर का शुभारंभ बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य प्राचीन जैन साहित्य की मूल भाषा प्राकृत को समझना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण, मंगल कलश स्थापना, मंगलाचरण  आदि क्रियाओं के साथ हुई, जिसमें उपस्थित समाज के वरिष्ठ लोग एवं महिलाऐं ,बच्चे सभी लोगों ने धर्म के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। इसके बाद वक्ताओं में पंडित सुबोध जैन शास्त्री  एवं सार्थक जैन शास्त्री ने प्राकृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह भाषा न केवल जैन धर्म का आधार है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शिविर में भाग लेने वाले विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं को प्राकृत भाषा की मूल बातें सिखाई जाएंगी, जिससे वे जैन आगम और प्राचीन ग्रंथों को सीधे समझ सकें। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठ सदस्य एवं आयोजकों ने सभी से अधिक से अधिक संख्या में इस शिविर से जुड़ने का आग्रह किया। अंत में सभी ने इस शिविर को सफल बनाने का संकल्प लिया और कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया।
जबेरा कालेज में विद्यार्थियों को सीपीआर प्रशिक्षण.. दमोह। शासकीय महाविद्यालय जबेरा में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मेडिकल ऑफिसर डॉ. सौरभ सुमन ने विद्यार्थियों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) की महत्वपूर्ण तकनीकों की जानकारी दी। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. सुमन ने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों में सीपीआर किसी व्यक्ति की जान बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रायोगिक रूप से सीपीआर देने की विधि समझाई और बताया कि सही समय पर सही तकनीक का उपयोग कर हृदय गति रुकने की स्थिति में मरीज को बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने इस पहल को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण भविष्य में आपातकालीन स्थितियों से निपटने में सहायक होंगे। महाविद्यालय प्रशासन ने भी इस आयोजन को सराहनीय बताते हुए भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
इंदिरा ज्योति यात्रा चलो रामराज्य की ओर का आगमन आज.. दमोह। जिले के समस्त ब्लाक अध्यक्षों, मंडलम अध्यक्षों, मोर्चा संगठनों, प्रकोष्ठों विभागों के अध्यक्ष से जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मानक पटेल एवं इंदिरा ज्योंति यात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष मनु मिश्रा ने अनुरोध किया है कि सुप्रसिद्ध विचारक सम्यक अभियान के प्रमुख भास्कर राव रेकड़े के नेतृत्व में इंदिरा ज्योंति यात्रा व महात्मा गांधी की अवधारणा के अनुरूप चले रामराज्य की ओर अभियान संकल्प यात्रा का आगमन सागर से चलकर 5 मई को साय 4ः30 बजें दमोह आगमन हो रहा है उनकी रथयात्रा का भव्य स्वागत सागर नाका, तीन गुल्ली, स्टेशन चैक, राय चैराहा, घंटाघर से होकर अम्बेडकर चैक पर समापन होगा। यात्रा में उनके साथ पूर्व मंत्री, पी.सी. शर्मा, पूर्व सांसद सुरेंद्र सींग ठाकुर भी आयेगे। समापन के बाद अम्बेडकर चैक के पास रात्रि 7 बजें पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में कांग्रेसजनों एवं आम जनता से अधिकाधिक उपस्थिति की अपील की है।

हिन्दी साहित्य सम्मेलन, काव्य कृति विमोचन.. दमोह। मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन जिला इकाई दमोह द्वारा होटल मंगलम के सभागार में काव्य कृति विमोचन सम्पन्न हुआ। दमोह इकाई द्वारा प्रकाशित वरिष्ठ कवि पत्र गोविन्द मकरंद दुबे की कृति कांटे कचनार हुए गति संग्रह केे विमोचन संगोष्ठी अध्यक्ष सत्य मोहन वर्मा, मुख्य अतिथि अभय तिवारी, विशिष्ट अतिथि कुंदन सिद्धार्थ जबलपुर रहे। दीप प्रज्वलन अतिथि सरकार उपरान्त इकाई अध्यक्ष रमेश तिवारी ने कृति और कृतिकार  पर सामासिक वक्तव्य में कहा कि कृतिकार की प्रथम कृति ओस और आसू 1967 में सृजन संस्था दमोह द्वारा प्रकाशित हुई थी। उसके बाद मकरंद दुबे का गति लेखन चलता रहा। जो सत्तर के दशक में चलित गति शैली का अनुगामी सिद्ध हुआ। उसकी संग्रह का प्रकाशन अब संभव हो पाया।

विशिष्ट अतिथि, कुंदन सिद्धार्थ ने कृति पर अपने आलेख मे कहा कि काॅटे कचनाए हुए भावप्रवण और हदयस्पर्शी गीत संग्रह है। 50 वर्ष पूर्व लिखे गये गीत आज भी उतने ही प्रासंगिक और समकालीन है जितने तब थे। गीतों में कवि ने हमारे समाज हमारे आस पास की सच्चाई को कितनी प्रामाणिकता के साथ हमारे सम्मुख रखा है सच के पास सफेदी कम है पास झूठ के अधिक सियाही थी जिसकी आवाज तेज सच उसकी मानी गई गवाही अलग-अलग भाव भंगिमाओं से संपन्न है यह गति संग्रह पठनीय है। मुख्य अतिथि अभय तिवारी ने कहा कि मकरंद दुबे के गीत संग्रह के गति भले पचास वर्ष पूर्व लिखें गये हो किन्तु उनका सामाजिक सरोकार प्रकृति और मनुष्य के बीच व्याप्त विसंगतियों का व्यवस्थित लेख जोखा गीतों की लय में प्रवहमान हो रहा है। धरती करे निवेदन मौसम करे सिफारिश। फिर क्यों न हो खुशी की, वे रोक-टोक बारिश, परिवेश और परिप्रेक्ष्यगत वातावरण को आत्मसात कर गीतों में लय प्रवाह में आबद्ध यह गीत सृजन मकरंद दुबे के काव्य कौशल को उजागर करता है। कृतिकार गोविन्द मकरंद दुबे ने आत्म विभोर होकर कहा रसो वै सः रस ही ईश्वर है। कविता का रस ब्रहम है। ब्रह्मानंद को भी काव्यानंद के तुल्य माना गया है। संग्रह के गति पचास वर्ष पुराने है तथा उस काल खंड में लिखे जाने वाले नवगीतो-गीतो की तरह विविध बिम्बो और मानवीकरण के भावों से आपूरित है क्योंकि कविता कालजयी होती है।
नित आनंदमयी होती है। वा संगति गति बनती है गीतों को दुनिया गाती है। कार्यक्रम अध्यक्ष सत्यमोहन वर्मा ने कहा कि कविता स्वयं की अनुभूतियों जब सार्वजनिक हो जाती है वह कविता है कविता हमारी जिंदगी का वो पर्दा है जिसे हम निरंतर छिपाते है। इसी कौशल और समर्थता को स्थापित करने वाले मकरंद के गीत इस संग्रह में है, जो बताते है कि समय की दीवार पर उकेरे हुए शब्द चित्रों को बाचे बिना इस गीतों की रचना संभव नहीं थी। गति शिल्प की सम्प्रेषणीयता से गीातो की आत्मा तक सहजता से पहुँचा जा सकता है। दृष्टव्य है लिया मौत से कर्ज, जन्म से बड़ी भूल की है। जीवन भर उसने पाई पाई बसूल की है। यह क्या कम साहस, हम हंसना भूल नहीं पाये। काॅटे है जीवन में तो, क्या फूल नहीं पाये। मकरंद ने अपने गीतों में अनुभूति को सच्चाई के साथ अपनी संवेदनाओं को संजोया है द्वितीय सत्र में मंचासीन अतिथियों व कृतिकार द्वारा कविता पाठ किया जाकर कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में नगर के साहित्यकार, पत्रकार गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। इकाई सचिव मानव बजाज द्वारा आभार ज्ञापित किया गया।

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