एकरूपता की प्रतिध्वनि में स्थापित सत्य ही महाविष्णु
दमोह। एकरूपता
की प्रतिध्वनि में भगवान विष्णु का दिव्य उद्घोष आज समसामयिक संदर्भों में
उपयोगी है क्यों कि कालचक्र के घूर्णन में जब विचार दिशाहीन होने लगते हैं
तब समाज की चेतना बिखरती हुईं प्रतीत होती है, तब भारतीय सनातन परंपरा एक
ऐसे तत्त्व का स्मरण कराती है जो भिन्नताओं को नहीं बढ़ाता, अपितु उन्हें
एक दिव्य सूत्र में पिरो देता है। वही तत्त्व एकरूपता मैं समाहित हैं और
उसी एकरूप चेतना का साकार नाम है..
भगवान विष्णु ऐसे उद्गार प्रस्तुत करते
हुए श्री भगवान ने पंचम दिवस की कथामृत का सार बताया। जिसका स्वरूप
केवल वैकुण्ठ की शोभा नहीं, वह लोकजीवन की अंतर्धारा है। जहाँ सत्य नीति
बनकर प्रवाहित होता है, जहाँ आदर्श आचरण में ढलते हैं और जहाँ प्रेम किसी
स्वार्थ का दास नहीं रहता बल्कि मौन होकर सक्रिय हो उठता है। वे न किसी
पक्ष का समर्थन करते हैं, न किसी वर्ग का विरोध; वे तो धर्म की समता धुरी
पर स्थित होकर समस्त सृष्टि को संतुलन प्रदान करते हैंडॉ.
श्रवण दास जी महाराज ने सामाजिक पुनर्संरचना का निर्माण युगांतकारी घोष के
रूप में करते हुए कहा कि रामावतार में मर्यादा और सत्य एक होकर चरित्र बन
जाते हैं जहाँ राजसिंहासन से अधिक मूल्य वचन का होता है। कृष्णावतार में
नीति, प्रेम और कर्म का ऐसा त्रिवेणी-संगम दिखाई देता है, जिसमें गीता का
गंभीर उपदेश भी है और ब्रज की रसधारा भी दोनों भिन्न नहीं, बल्कि एक ही
आत्मतत्त्व की दो ध्वनियाँ हैं। यही विष्णु की अलौकिक विशेषता है वे
विरोध नहीं रचते, वे समन्वय रचते हैं। प्रह्लाद की रक्षा में प्रकट हुआ
उग्र नृसिंह भी करुणा की ज्वाला है, और गजेन्द्र की आर्त पुकार पर दौड़ा
हुआ विष्णु भी न्याय का ही विस्तार है। यहाँ दंड और दया परस्पर विरोधी
नहीं, अपितु धर्मरूपी सूर्य की किरणें हैं।
लक्ष्मी विष्णु का अमर संयोग
इस एकरूप दर्शन की सर्वोच्च व्याख्या है। लक्ष्मी जब विष्णु के वक्षस्थल
पर विराजती हैं, तब वह प्रेम का घोष बन जाती है जहां समृद्धि शोभा पाती
है | जब धर्म के हृदय से आलिंगित हो भक्ति निश्छल बनी वैभव यदि विवेकविहीन
हो जाए तो अहंकार बनता है, और विवेक यदि वैभव से वंचित हो जाए तो समाज
दुर्बल हो जाता है
क्षीरसागर
की शेषशय्या पर स्थित विष्णु का शांत स्वरूप यह उद्घोष करता है कि निश्चल
प्रेम वही है जो उथल पुथल में भी स्थिर रहे। वह प्रेम जो परिस्थितियों से
विचलित न हो, जो संकट में भी करुणा का दीप बुझने न दे — वही विष्णु-प्रेम
है, वही लोकमंगल का आधार है। इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि भगवान
विष्णु केवल आराध्य मूर्ति नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन हैं। वे सिखाते हैं
कि सत्य यदि प्रेम से विहीन हो जाए तो कठोर बनता है, आदर्श यदि करुणा से
अलग हो जाए तो बोझ बनता है किंतु जब सत्य, आदर्श और प्रेम एक-दूसरे में
विलीन हो जाते हैं, तब वही धर्म समाज की आत्मा बन जाता है। आज के
संक्रमणकालीन समाज के लिए विष्णु तत्त्व का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है
भक्ति की भावना से विष्णु ही सर्वत्र प्रतिष्ठित रहते हैं | यज्ञ आयोजन
समिति के तत्वावधान में आयोजित विष्णु पुराण में श्रद्धा से समलंकृत जन
प्रतिनिधि बड़ चढ़ कर भाग ले रहे |गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ द्वारा व्यसन मुक्ति रैली.. दमोह।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में, अखिल विश्व गायत्री परिवार
शांतिकुंज हरिद्वार के निर्देशानुसार गायत्री प्रज्ञापीठ (बड़ी देवी) दमोह
के युवा प्रकोष्ठ द्वारा एक भव्य व्यसन मुक्ति जन-जागृति रैली का आयोजन
किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज को तंबाकू और अन्य नशीले
पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और एक स्वस्थ, व्यसन मुक्त
समाज का निर्माण करना है। यह
रैली दमोह स्थित न्यायालय परिसर से प्रारंभ हुई, जहाँ बड़ी संख्या में
गायत्री परिजन और युवा प्रकोष्ठ के सदस्य उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए। रैली
शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए गुजरी, जहाँ कार्यकर्ताओं ने बैनर,
तख्तियों और नारों के माध्यम से आमजन को नशे से होने वाली शारीरिक, मानसिक
और आर्थिक हानियों के बारे में विस्तार से बताया।

ज्ञात
हो कि गायत्री परिवार द्वारा पूरे भारतवर्ष में, जिला स्तर से लेकर तहसील
और ग्रामीण स्तर तक व्यापक नशा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में
दमोह में आयोजित इस रैली के माध्यम से लोगों से तंबाकू और नशीले पदार्थों
का सेवन न करने की शपथ लेने का आग्रह किया गया। एवं 40 से अधिक लोगों से
संकल्प पत्र भरवाए गये । गायत्री प्रज्ञापीठ के वरिष्ठ मार्गदर्शन में युवा
प्रकोष्ठ के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। इस दौरान गायत्री परिवार
के परिजन, जिला समन्वयक डी. पी. बौहरे तहसील समन्वयक प्रद्युम्न सिंह, अनूप श्रीवास्तव, महेश पचौरी, अरविंद हजारी, अरविंद खरे, दिनेश साहू ,राजेश सोनी, मनीष बौहरे, अमित असाटी, ओम
श्रीवास्तव, अभय नामदेव, देव चौहान, गोलू राज, मुकेश नामदेव, युवा कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में
नशा मुक्त भारत बनाने का संकल्प लिया। गायत्री
परिवार ने जिले के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं नशे से दूर
रहें और अपने परिवार व समाज को भी इससे सुरक्षित रखने में अपना योगदान
दें।
अग्रवाल महिला महासभा द्वारा धार्मिक आयोजन
दमोह। मध्य प्रदेश अग्रवाल महासभा के अध्यक्ष श्री कैलाश मित्तल प्रदेश महिला
अध्यक्ष मीना बंसल के निर्देशन में महिला महासभा वर्ष भर अपनी सक्रियता
दिखाती रहती है इसी तारतम्य में मैहर की बहने
जागेश्वर नाथ धाम बांदकपुर दमोह पहुंची वह पर महिला महासभा दमोह की
सदस्यों ने अतिथि देवो भव के सिद्धांत के अनुरूप उनका जागेश्वर धाम में
स्वागत किया भगवान बोले नाथ का मैहर दमोह के सभी सदस्यों ने साथ मिलकर
अभिषेक किया सभी से मिलकर बहुत उत्साह हुआ सम्मान किया महासभा हमेशा से एक
दूसरे का सहयोग और सम्मान करती रहती है इससे ऐसा प्रतीत होता है कि संपूर्ण
प्रदेश में सभी एक है यह कार्यक्रम बहुत बढ़िया तरीके से सम्पन्न हुआ
जिसमें मुख्य रूप से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती रमा अग्रवाल नगर
अध्यक्ष श्रीमती अंजलि अग्रवाल ने जिला उपाध्यक्ष अंजलि अनंत अग्रवाल
सांस्कृतिक मंत्री अर्चना जी रही.. मैहर से इस कार्यक्रम में सहभागिता की
मुख्य रूप से मप्र अग्रवाल महासभा के उप मंत्री श्री संतोष अग्रवाल
मैहर से पधारे प्रदेश प्रातीय मंत्री ममता जिला अध्यक्ष दीप्ता अग्रवाल नगर
अध्यक्ष रंजना अग्रवाल कोषाध्यक्ष पूजा अग्रवाल सांस्कृतिक सचिव सीता
अग्रवाल नगर संरक्षक राजकुमारी अग्रवाल सविता अग्रवाल मधु गोयल राजू अंकुर ममता आदि की उपस्थिति रही। मुख्य रूप से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती रमा अग्रवाल नगर
अध्यक्ष श्रीमती अंजलि अग्रवाल ने जिला उपाध्यक्ष अंजलि अनंत अग्रवाल
सांस्कृतिक मंत्री अर्चना जी रही मैहर से इस कार्यक्रम में सहभागिता की
मुख्य रूप से मध्य प्रदेश अग्रवाल महासभा के उप मंत्री श्री संतोष अग्रवाल
मैहर से पधारे प्रदेश प्रातीय मंत्री ममता जिला अध्यक्ष दीप्ता अग्रवाल नगर
अध्यक्ष रंजना अग्रवाल कोषाध्यक्ष पूजा अग्रवाल सांस्कृतिक सचिव सीता
अग्रवाल नगर संरक्षक राजकुमारी अग्रवाल सविता अग्रवाल मधु गोयल राजू अंकुर ममता आदि की उपस्थिति रही।
असाटी महिला समिति द्वारा 5 दिवसीय समर कैंप
दमोह।
संस्कार भवन में असाटी महिला समिति, दमोह द्वारा पांच दिवसीय समर कैंप
आयोजित किया गया। जिसमें समर कैंप श्रृंखला के अंतर्गत "आर्ट ऑफ लिविंग
हैप्पीनेस कोर्स" किया गया, एवं असाटी समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणा,
सकारात्मकता एवं आत्मिक उन्नति का एक उत्कृष्ट माध्यम बना। विशेष रूप से
आकर्षण का केंद्र रहा, यह कोर्स केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम न होकर जीवन
में स्थायी प्रसन्नता, सकारात्मक सोच, मानसिक शांति एवं संतुलित जीवनशैली
विकसित करने की सार्थक पहल सिद्ध हुआ।
कोर्स में समाज
के गौरव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक प्रशांत असाटी ने
अत्यंत सरल, सहज एवं प्रभावी शैली में प्रतिभागियों को प्राणायाम, सुदर्शन
क्रिया, ध्यान, साधना, सेवा एवं सत्संग के महत्व से बताया उन्होंने दैनिक
जीवन में तनावमुक्त एवं आनंदमय रहने के व्यावहारिक सूत्र भी साझा किए, इस
दौरान असाटी महिला समिति, असाटी समाज दमोह उपस्थित रहा। प्रतिभागियों ने इस
प्रशिक्षण को जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला अनुभव बताया,असाटी
समाज दमोह द्वारा प्रशांत असाटी के निस्वार्थ सेवा भाव, समर्पण एवं
प्रेरणादायी मार्गदर्शन के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की गई। समाज को
विश्वास है कि उनका आध्यात्मिक मार्गदर्शन भविष्य में भी नई दिशा, नई ऊर्जा
एवं सकारात्मकता प्रदान करता रहेगा।
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