मेनका गांधी पर FIR की मांग को लेकर ज्ञापन
दमोह।
जैन धर्म की परम पवित्र एवं अहिंसा की प्रतीक 'पिच्छिका' के संबंध में
पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गांधी द्वारा लगाए गए कथित मिथ्या एवं
आपत्तिजनक आरोपों तथा देश के विभिन्न स्थानों पर जैन संतों एवं तीर्थों पर
हो रहे हमलों के विरोध में बुधवार को दमोह का जैन समाज एकजुट होकर सड़कों
पर उतरा, भारतीय जैन मिलन एवं सकल जैन समाज दमोह के तत्वावधान में
प्रतिनिधिमंडल ने रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम
कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन
में मुख्य रूप से श्रीमती मेनका गांधी के विरुद्ध धार्मिक भावनाओं को आहत
करने एवं समाज में वैमनस्य फैलाने के आरोप में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने
तथा जैन संतों एवं तीर्थ स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
धर्म रक्षा के इस अभियान में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से सुधीर जैन अध्यक्ष श्री
दिगंबर जैन पंचायत, पद्म जैन महामंत्री, आर.के. जैन, यू.सी. जैन, नेमकुमार
सराफ,अतिवीरांगना कल्पना सेठ, कविता ऋषभ जैन (क्षेत्रीय अध्यक्ष), दिलेश
चौधरी क्षेत्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, ऋषभ जैन,सबन जैन 'सिल्वर', मुकेश जैन
'मम्मा' अध्यक्ष, नगर प्रमुख शाखा, महेंद्र जैन सोमखेड़ा मंत्री नगर प्रमुख
शाखा, संजय जैन 'अरिहंत', सुधीर जैन डब्लू, ज्ञानेंद्र इटोरिया, अरुण जैन,
राकेश पलंदी सहित जैन मित्र मिलन के सदस्य उपस्थित रहे।
जैन
सिद्धांतों एवं संत परंपरा की रक्षा के लिए युवाओं और मातृशक्ति ने भी
सक्रिय सहभागिता निभाई। जैन युवा संघ के मनीष जैन 'आउटलुक', प्रकाश जैन,
बंटू गांगरा, जितेंद्र जैन 'जित्तू' सहित सभी सदस्य तथा जैन मिलन परिवार के
वीर-वीरांगनाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। वक्ताओं ने कहा कि जैन संत सूक्ष्म जीवों की रक्षा और अहिंसा के पालन
हेतु पिच्छिका धारण करते हैं। ऐसे संतों पर जीवों की हत्या जैसे आरोप लगाना
न केवल जैन संत परंपरा, बल्कि संपूर्ण जैन दर्शन एवं अहिंसा के सिद्धांत
का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार द्वारा इस विषय पर
शीघ्र उचित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो देशभर का जैन समाज व्यापक एवं
लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
गायत्री जयंती का पर्व श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया.. दमोह। गायत्री शक्तिपीठ टंडन बगीचा दमोह में गायत्री जयंती का पर्व बहुत ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। प्रातः
6 बजे से ही गायत्री महामंत्र के मौन मानसिक अखंड जप प्रारंभ हो गया,जो
शाम 6 बजे तक चलता रहा।इस जप में 72 भाई बहिनों ने अपनी भागीदारी निभाई।
प्रातः
7 बजे से होने वाले दैनिक गायत्री यज्ञ के साथ ही परिव्राजक जी पंडित
वीरेंद्र गर्ग ने गायत्री जयंती एवं गंगा दशहरा के महत्व पर प्रकाश डाला और
पंडित श्रीराम शर्माजी आचार्य जी द्वारा आज ही के दिन घोषणा पूर्वक अपना
शरीर छोड़ा था वह दिन 2 जून 1990 का था, यह बताते हुए उनके अवतारी चेतना
होने की बात कही,जो विचार क्रांति के लिए आए थे। शाम
को 501 दीपो से सुसज्जित वेदी के माध्यम से दीप यज्ञ किया गया।
दीप यज्ञ
कराते हुए पंडित बी पी गर्ग द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि भारतीय
संस्कृति की जो पंच गगार गायत्री, गंगा,गीता गुरु और गाय है उनकी व्याख्या
में निष्कर्ष के रूप में गायत्री ही आती है। कई पीढ़ियों के तप करने के बाद
राजा भगीरथ के तप को श्रेय मिला और देखा जाए तो गंगा अवतरण केवल राजा सगर
के साठ हजार पुत्रों के उद्धार के लिए हुआ था किन्तु आज भी वह करोड़ो,अरबो
जीवो के उद्धार और जीवन यापन का साधन है,उसी प्रकार गायत्री तो आदि शक्ति
है ही, परंतु हर युग में जो भी अवतारी चेतना आती है वह गायत्री जप और उनकी
शक्ति से ही अवतार का प्रयोजन पूरा करती है। त्रेता में भगवान राम को
महर्षि विश्वामित्र द्वारा जो बला और अतिबला विद्या सिखलाई गई थी वह
गायत्री और सावित्री साधना ही थी। द्वापर में भगवान कृष्ण ने उज्जैनी जाकर
अपने गुरु से संदीपनी आश्रम में ही यह विद्या सीखी थी। चारों वेद वास्तव
में गायत्री मंत्र की व्याख्या ही है। गायत्री
मंत्र बुद्धि को प्रज्ञा और सन्मार्गी बनाता है। जो विद्यार्थी बचपन से ही
गायत्री महामंत्र का नियमित जप करते है उनकी स्मरणशक्ति और मेधा अन्य
बच्चों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। इसीलिये सभी को गायत्री मंत्र का जप
और उपासना अनिवार्य रूप से करनी चाहिए।
कलयुग
में गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी ने गायत्री
के 24 महापुरश्चरण 27 वर्षों में किए, बीच के तीन वर्ष स्वतंत्रता
संग्राम में जेल जाने से अतिरिक्त लगे। उन्होंने ही गायत्री और यज्ञ को
सभी प्रतिबंधों से मुक्त करके जन सामान्य को इसका अधिकार दिया ।इतना ही
नहीं 3000 से ज्यादा विषयों पर विश्व स्तरीय प्रामाणिक साहित्य श्रृजन किया
और दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संगठन गायत्री परिवार के नाम से संगठित
किया जिसके आज वर्तमान में, देश विदेश में 18 करोड़ से अधिक सदस्य है।इसलिए गायत्री परिजन गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने गायत्री जयंती पर धार्मिक अनुष्ठान करते है।जिले भर के प्रज्ञा संस्थानों में भी अखंड जप, पंच कुंडीय गायत्री महायज्ञ के सामूहिक आयोजन संपन्न हुए। गुरुदेव
ने अखंड ज्योति नामक मासिक पत्रिका के जून 1990 के अंक में ही गायत्री
जयंती के दिन ही अपने महाप्रयाण की सार्वजनिक घोषणा कर दी थी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गायत्री परिजन और प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित थे। आभार व्यवस्थापक पंकज हर्ष श्रीवास्तव द्वारा किया गया। शांतिपाठ के पश्चात प्रसाद वितरण के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ।
तेजगढ़ में शोहदाए कर्बला, इमाम हुसैन की कुर्बानी से सबक लेने का दिया संदेश.. दमोह।
तेजगढ़ कस्बे की ऐतिहासिक मस्जिद मुजद्दिद अल्फ़ेसानी में बाद
नमाज़-ए-मगरिब शोहदाए कर्बला की याद में एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन
किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कन्नौज से तशरीफ़ लाए प्रसिद्ध
इस्लामी विद्वान मौलाना हाफ़िज़ व कारी ज़िया-उल-हक़ आफ़ाक़ी साहब का
मुस्लिम समाज एवं मस्जिद कमेटी द्वारा फूल-मालाओं से भव्य स्वागत एवं
इस्तक़बाल किया गया।
अपने प्रेरणादायक बयान में
मौलाना ज़िया-उल-हक़ आफ़ाक़ी ने हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) और शोहदाए कर्बला
की महान कुर्बानी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्बला का वाक़या
केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, सच्चाई, न्याय, सब्र और
कुर्बानी का ऐसा पैग़ाम है, जो क़यामत तक पूरी मानवता का मार्गदर्शन करता
रहेगा। उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन ने ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी के सामने
कभी सिर नहीं झुकाया और दीन-ए-इस्लाम की हिफ़ाज़त के लिए अपने परिवार सहित
अज़ीम कुर्बानी पेश कर पूरी दुनिया को सच्चाई पर डटे रहने का संदेश दिया।
उन्होंने
नौजवानों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने जीवन में कुरआन और सुन्नत की
शिक्षाओं को अपनाएं, अच्छे चरित्र का निर्माण करें तथा समाज में भाईचारा,
मोहब्बत, इंसानियत और आपसी सौहार्द को मज़बूत करें। उन्होंने कहा कि आज के
दौर में कर्बला की सीख पहले से अधिक प्रासंगिक है और हमें हर परिस्थिति में
सत्य एवं न्याय का साथ देना चाहिए। मौलाना अहमद अली आफ़ाक़ी ने बताया कि
इस अवसर पर मस्जिद में नौजवानों से हज़रत ने कुरआन शरीफ़ का पाठ शुरू कराया
गया। अंत में मौलाना जिया उल कमर साहब, व मौलाना नाज़िम साहब को तोहफा देकर
सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के समापन पर देश में अमन-चैन, आपसी
भाईचारे, खुशहाली तथा भारत की उन्नति और तरक्की के लिए विशेष दुआ कराई गई। इस अवसर पर तेजगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग, बुजुर्ग, युवा एवं बच्चे उपस्थित रहे।




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