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हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से साक्षी जैन को बड़ी राहत: MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर संस्कृत के साक्षात्कार में शामिल होने की मिली अनुमति..

 हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से अभ्यर्थी को बड़ी राहत

इंदौर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर संस्कृत पद की भर्ती में दस्तावेजों के आधार पर 8 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू से बाहर कर दिए जाने के मामले में इंदौर हाईकोर्ट की अवकाश कालीन खंडपीठ ने हस्तक्षेप किया है। न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता की पीठ ने अशोकनगर की अभ्यर्थी साक्षी जैन, पिता संजीव जैन की याचिका 19762/2026 पर 3 जून को सुनवाई करते हुए 4 जून सुबह 9:30 बजे होने वाले इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति दे दी।
याचिकाकर्ता ने 3 जून को सुबह 10 बजे याचिका क्रमांक 19762/2026 ( साक्षी जैन बनाम मध्य प्रदेश शासन ) के माध्यम से इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर अवकाश कालीन पीठ में शीघ्र सुनवाई यानी अर्जेंट हियरिंग की मांग की। न्यायमूर्ति श्री राजेश कुमार गुप्ता जी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। न्यायालय ने अंतरिम अनुतोष देते हुए अभ्यर्थी को 4 जून बुधवार की सुबह 9:30 बजे होने वाले साक्षात्कार में शामिल होने की अनुमति प्रदान की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्षात्कार में शामिल होना याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शाह संस्कार जैन ने बताया कि संस्कृत विषय के इंटरव्यू के लिए कुल 9 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। इनमें से 8 अभ्यर्थियों को आयोग ने अर्हता नहीं होने का हवाला देते हुए प्रक्रिया से बाहर कर दिया था।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उक्त पद पर केवल 2 सीटें ही रिक्त थीं, अर्थात 2 पदों के विरुद्ध 9 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया गया था। इस अनुपात में भी आयोग द्वारा केवल एक अभ्यर्थी को ही इंटरव्यू का अवसर दिया जा रहा था। साथ ही आयोग ने दस्तावेजों में क्या कमी है, इसका कोई स्पष्ट कारण अभ्यर्थियों को नहीं बताया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल राहत देते हुए कहा कि याचिका कर्ता इंटरव्यू में शामिल हो सकती हैं, लेकिन अंतिम चयन याचिका के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की इस भर्ती में तकनीकी कारणों से बाहर हुए अभ्यर्थियों के लिए यह आदेश एक मिसाल माना जा रहा है।

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