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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के समाधि मरण पर.. नन्हें मंदिर में मुनि श्री पदम सागर जी के सानिध्य में विनयांजलि सभा का आयोजन..

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को श्रद्धा सुमन अर्पित

दमोह। परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का देर रात सिद्ध क्षेत्र कुंथलगिरी पर  संलेखना पूर्वक समाधि मरण हो गया है। 13 दिन तक यम संलेखना करते हुए मृत्यु का महोत्सव मनाने वाले आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की समाधि की खबर से देश भर में जैन श्रावकों के बीच भक्ति मय उल्लास का माहौल बना हुआ तथा उन्हें जगह-जगह श्रद्धा सुमन अर्पित करके उनके कठिन तप चर्या  को नमन किया जा रहा है।
इसी कड़ी में दमोह नगर के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी में मुनिश्री पदम सागर जी महाराज के सानिध्य में सोमवार को विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाते हुए उनके द्वारा 13 दिन तक की गई यम सल्लेखना को आचार्य शांति सागर जी की परंपरा का प्रतिरूप बताया। मुनिश्री पदम सागर जी ने कहा कि जिस तरह से बरसों पहले आचार्य शांति सागर जी ने मुनि श्री विद्यासागर जी को अपना आचार्य पद देकर स्वयं मिनी दीक्षा लेकर संलेखना पूर्वक समाधि मरण को प्राप्त किया था इस तरह वर्तमान में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अपना आचार्य पद मुनि श्री विद्यासागर को देखकर स्वयं मुनि रूप में यम संलेखना का वरण किया। इस दौरान पूर्व के विद्यासागर जी की तरह वर्तमान के विद्यासागर जी ने भी अपने गुरु की समाधि सल्लेखना के दौरान भक्ति भाव से निर्विकल्प सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 
मुनि श्री पदम सागर जी ने कहा कि हम सभी ने आचार्य ज्ञान सागर जी की संलेखना पूर्वक समाधि को तो नहीं देखा लेकिन वर्तमान पीढ़ी का यह सौभाग्य रहा है कि उनको आचार्य विद्यासागर जी के युग मे गुरु सेवा करने से लेकर अचार शांति सागर जैसे संत की संलेखना पूर्वक समाधि का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मुनिश्री ने कहा कि हम सभी भी ऐसी भावना भानी चाहिए की जीवन के अंतिम समय में देव शास्त्र गुरु का सानिध्य प्राप्त हो। गुरु के सानिध्य में समतापूर्वक समाधि मरण करते हुए प्राण निकले। इसके लिए हम सभी को अभी से ऐसी भावना भाना चाहिए। क्यो की गुरु के सानिध्य में समाधि प्राप्त करने के लिए पुण्य की आवश्यकता होती है और इस पुण्य का संचय हमें हमेशा करते रहना चाहिए। 
इस अवसर पर ब्रह्मचारी मोनू भैया एवं स्वतंत्र भैया का भी सानिध्य सभी को प्राप्त हुआ। सभा का संचालन मंदिर कमेटी  अध्यक्ष नवीन ने किया तथा आभार महामंत्री राजकुमार जैन ने व्यक्त किया। अंत मे दो मिनिट का मौन तथा 9 बार णमोकर मंत्र का जाप देकर पूज्य वर्तमान सागर जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक जनों के साथ मंदिर कमेटी के पदाधिकारी महिलाओं पुरुषों की मौजूदगी रही। 

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