मृदंगाचार्य नाना साहेब स्मृति संगीत समारोह संपंन
दमोह। उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन. एवं उत्थान साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ग्राम. बकायन के सहयोग से 132 वाँ मृदंगाचार्य पण्डित नाना साहेब पानसे स्मृति गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह का समापन गुरुवार की शाम को हो गया। श्रेष्ठ संगीत एवं नृत्य प्रस्तुतियों की दो सुंदर शामों में संस्कृति के सप्त रंग बिखरे। प्रदेश देश के सुविख्यात कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बकायन के श्रोता.दर्शकों को अनंत स्मृतियां दी।
इस अवसर पर प्रदेश के आनंद विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने कहा कि यह देश का सबसे पुराना शास्त्रीय संगीत समारोह है जिसकी गौरवशाली परंपरा आज भी जीवंत है। उन्होंने बकायन में शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए एक संगीत विद्यालय स्थापित किए जाने की आवश्यकता भी व्यक्त कीए ताकि युवा कलाकार संगीत की विधिवत शिक्षा प्राप्त कर इस विरासत को आगे बढ़ा सकें। समाजसेवी भाव सिंह लोधी मासाब ने कहा यह आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संगीत एवं संस्कृति की उन विधाओं से परिचित करा रहा है जो धीरे धीरे लुप्त होती जा रही हैं। उन्होंने कहा यह देश के सबसे पुराने सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है और इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचना चाहिए।
अंतिम दिवस की पहली सभा शास्त्रीय गायन के नाम रही। जिसमें सुविख्यात गायक श्री रघुनंदन पणशीकर पुणे का शास्त्रीय गायन हुआ। दूसरी सभा कथक नृत्य के नाम रही। प्रयागराज की सुविख्यात नृत्यांगना सुश्री वर्षा मिश्रा ने कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ गुरु वंदना के साथ किया। इसके बाद उन्होंने गणेश वंदना की प्रस्तुति दी। अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन कलाकारों ने तराना में किया। अगले क्रम में कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज की रचना बाजे रे बाजे मुरली के साथ श्रीकृष्ण की लीलाओं का अनूठा प्रदर्शन किया। अंत में उन्होंने पारंपरिक ठुमरी की प्रस्तुति दी। अगले क्रम में सुश्री कनकश्री भट्टए इंदौर का गायन हुआ। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के लिए राग बागेश्री का चयन किया। इस मधुर राग में विलंबित बंदिश एक ताल में सखी मन लागे एवं द्रुत बंदिश तीन ताल में गुंद लावोरीके साथ सुरों का जादूई वातावरण बना दिया। इसके बाद तराना एवं कजरी गायन के साथ प्रस्तुति को विराम दिया। उनके साथ तबले पर श्री अशेष उपाध्याय एवं हारमोनियम पर श्री रवीन्द्र किलेदार ने सधी हुई संगत दी।
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति जलतरंग वादन की रही। वर्षा ऋतु में जलतरंग की ध्वनियों को सुनना श्रोताओं के लिए आनंदमयी अनुभव रहा। 22 वर्षों से संगीत की साधना कर रहीं छत्तीसगढ़ की सुश्री मीरा वैष्णव ने जलतरंग वादन किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के लिए राग मियां मल्हार का चयन किया। इसमें उन्होंने रूपक तालए एक ताल एवं द्रुत तीन ताल की गतें प्रस्तुत की। राग भैरवी में दादरा प्रस्तुत कर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया।
विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस मनाया गया.. दमोह। जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एलायंस के सहयोग से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला दमोह में संकल्प समाज सेवी संस्था सीएसडब्ल्यू द्वारा 30 जुलाई 2026 को विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर रेस्क्यू एवं जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को पम्पलेट वितरित किए गए तथा मानव दुर्व्यापार के प्रति जागरूक किया गया। दिल्ली में जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन द्वारा आयोजित बाल व्यापार विरोधी अभियान के शुभारंभ के अवसर पर दमोह जिले से संस्था के प्रोग्राम निदेशक सन्देश बंसल ने भागीदारी की।
उन्होंने कहा कि यदि ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर किसी भी बच्चे की तस्करी किए जाने की सूचना मिले, तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस हेल्पलाइन 112 एवं जेआरसी टोल फ्री नंबर 18001027222 पर सूचना दें। ऐसी शिकायतों पर संबंधित तस्करों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अभियान के दौरान रेलवे स्टेशन परिसर में यात्रियों एवं आम नागरिकों को मानव तस्करी से संबंधित जानकारी दी गई तथा बच्चों की तस्करी रोकने में जनसहभागिता की अपील की गई। इसी क्रम में संकल्प समाज सेवी संस्था सीएसडब्ल्यू द्वारा पंचायत भवन में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बाल विवाह एवं बाल श्रम के दुष्परिणामों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई तथा सभी उपस्थित लोगों को बाल विवाह न करने और न होने देने की शपथ दिलाई गई।





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