जैन नन्हें मंदिर में श्री शांतिनाथ महामंडल विधान
दमोह। श्री पारसनाथ दिगंवर जैन नन्हें मंदिर जी में निर्माणधीन त्रिमूर्ति जिनालय परिसर में 16 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन श्रावण मास शुक्ल पक्ष में भक्ति भाव के साथ चल रहा है. विधान अवसर पर तीन भव्य समवसरण कि रचना करके प्रत्येक समवशरण में चार चार जिनविंव स्थापना की गई है.. समवशरण के समक्ष विधान के महापत्रों के साथ श्रावक श्रेष्टी जनों को बैठकर पूजन विधान करने का सौभाग्य प्रतिदिन प्राप्त हो रहा है..विधान के छठवें दिन मंगलवार को भी आर्यिका संघ के सानिध्य में विधान पूजन संपन्न हुआ.
आचार्य
श्री समय सागर जी के मंगल आशीर्वाद एवं आर्यिका श्री चिंतनमती माता जी के
ससंघ सानिध्य मे सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में मंगलवार
को प्रातः बेला में श्री जी के अभिषेक पूजन उपरांत आर्यिका श्री चिंतन मति
माताजी के मुखार बिन्द से श्रीजी की शांति धारा संपन्न हुई. तत्पश्चात
ब्रह्मचारी स्वतंत्र भैया एवं रोहित भैया के निर्देशन में देव शास्त्र गुरु
पूजन संपन हुआ.. इस अवसर पर आर्यिका माता जी ने श्री शांतिनाथ महामंडल
विधान की महत्वता प्रतिपादित करते हुए तुलसी इस संसार में भांति भांति के
लोग दोहा का उदाहरण देते हुए कहा कि इस संसार सागर को धर्म रूपी नाव के
बिना पार पाना संभव नहीं है.. जिस तरह किसी नदी को पार करने के लिए अलग-अलग
क्षेत्र से आए लोग नाव पर सवार होने के बाद सफर के दौरान एक दूसरे का
परिचय प्राप्त करते हैं. इनमें कुछ लोगों की मित्रता हो जाती है और कुछ
के विचार मेल नहीं खाते.. वही दूसरे किनारे पर नाव के पहुंचते ही सब उतर
कर अपने-अपने मुकाम की और बढ़ जाते है..
माताजी ने कहा कि हम सभी का जीवन
चक्र भी ऐसा ही कुछ है.. जन्म के बाद संसार सागर को पार करते हुए मृत्यु के
साथ दूसरा किनारा आता है इसके बाद पता नहीं लगता जीव तत्व कहां चला जाता
है.. माताजी ने श्री शांतिनाथ महामंडल विधान की महिमा बताते हुए कहा कि आप
सभी पुण्यशाली हैं जो सुबह से जिनालय पहुंचकर भगवान की भक्ति पूजन विधान
करके अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं अभी भी ऐसे अनेकों लोग बिस्तर पर सो रहे
होंगे अखबार पढ़ रहे होंगे मोबाइल चला रहे होंगे या टीवी देख कर अपने जीवन
के बहुमूल्य क्षणों को नष्ट कर रहे होंगे..
माताजी ने कहा कि जीव जिस पर्याय में जन्म लेता है उसी के मोह में फ़स जाता है.. केवल मनुष्य पर्याय ही ऐसी है जिसमें वह धर्म ध्यान करके अपने अगले भव को भी संवार सकता है इस अवसर को नहीं गंवाना चाहिए.. विधान अवसर पर प्रथम सौधर्म इंद्र श्री रूपचंद
जी नवीन निराला परिवार, द्वितीय सौधर्म इंद्र श्रीमती प्रभजन ब्रह्मचारी
नीलू दीदी एवं स्वतंत्र भैया परिवार तथा तृतीय सौ धर्म इंद्र श्रीमति मनीशा
जैन राजेंद्र अटल परिवार के साथ श्री दीपक जी नम्रता जी फुटेरा परिवार
चक्रवर्ती, श्रीमती गुड्डी जैन हल्दी वाले परिवार कुवेर इंद्र, मुकेश जैन
प्रेम निवास परिवार यज्ञ नायक, पदमचंद रानू खजरी परिवार महायज्ञ नायक, श्री
चंद्र कुमार खजरी परिवार बाहुबली आदि के साथ..
श्रावक श्रेष्ठी परिवार
नरेंद्र जी प्रीति बजाज मौसीपुरा वाले, दिनेश चौधरी परिवार, बसु चौधरी,
सगरा वाले प्रमोद गंगरा परिवार , राजेश हिनोती परिवार, जय खजरी गिरनार
ट्रेडर्स परिवार ने समवशरण के समक्ष श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के बारी
बारी से अर्घ समर्पित किए. इस अवसर पर बड़ी संख्या में विभिन्न मंदिरों से आए श्रावक महिला मंडलो ने विधान में अर्घ चढ़ा कर धर्म लाभ अर्जित किया..
श्री पारसनाथ निर्वाण कल्याणक पर 23 शांति धारा आज.. जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव 19 अगस्त को भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा इस अवसर पर नन्हें मंदिर जी में प्रातः 6:00 बजे से निर्वाण कल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया है.. मुलनायक श्री पारसनाथ भगवान अभिषेक उपरांत 23 शांति धारा आर्यिका रत्न चिंतन मति माताजी के मुखारविंद से संपन्न होगी.. तत्पश्चात श्री पारसनाथ भगवान के पूजन निर्वाण कांड उपरांत निर्वाण लाडू समर्पित किए जाएंगे.. इसके बाद श्री शांतिनाथ महामंडल विधान त्रिमूर्ति परिसर में संपन्न होगा.. मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नवीन निराला ने सकल जैन समाज से समय पर आयोजन में शामिल होकर धर्म लाभ की अपील की है..




0 Comments