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भगवान पार्श्वनाथ निर्वाण महोत्सव पर मुनि संघ के सानिध्य में.. कुंडलपुर, सदगुवा जैन मंदिर, नन्हें मंदिर, हटा में महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, विधान पूजन, निर्वाण लाडू चढ़ाया गया..

कुण्डलपुर में भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक..
दमोह। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में भगवान श्री पार्श्वनाथ के निर्वाण कल्याणक महोत्सव भगवान श्री पार्श्वनाथ का मस्तकाभिषेक करके एवं निर्वाण लाडू चढ़ाकर मनाया गया। प्रथम अभिषेक, शांतिधारा रिद्धि कलश, निर्वाण लाडू आदि चढ़ाने का सौभाग्य पाने वाले श्रेष्ठी परिवार अनिल सरोज फिरोजाबाद गौरव रिचा आरव जैन आगरा अमन अंकिता जैन कैलिफोर्निया, पियूष सचिन नई दिल्ली, तारणचंद रोहिणी दिल्ली, सरोज सुरेशचंद्र जैन चंदेरी, जयकुमार नीरज जैन बाड़ी बरेली,आशीष चौगुले कोल्हापुर, नेम कुमार सराफ स्वर्गीय बाबूलाल सराफ दमोह, दिनेश अलका हर्ष मीमांसा अनंदीलाल दमोह, ऊषा राजाराम जैन नोहटा, ऋतु जैन गुनौर, अमित जैन मंडी बामोरा, रमेश जैन बलोदा बाजार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने पूज्य बड़े बाबा का चरणाभिषेक एवं भगवान पार्श्वनाथ जी का मस्तकाभिषेक करने का सौभाग्य अर्जित किया।
इस अवसर को निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी ने कहा कि पिछला चातुर्मास जहां श्री सम्मेदशिखर की पुण्य भूमि पर 57 पिच्छिओँ के साथ हुआ जो पूरे देश में चर्चा का विषय बना और इस वर्ष का चातुर्मास भी देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, उन्होंने कहा कि श्रावण मास की सार्थकता, भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण दिवस तथा जीव के उपादान, कर्म और निमित्त के गूढ़ सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चातुर्मास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, स्वाध्याय, संयम, तप और अपने परिणामों को निर्मल बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है।मुनि श्री ने कहा कि गुरु की वाणी मिले तो उसे केवल कानों से सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने जीवन रूपी पात्र में भरकर उसे आचरण में उतारना चाहिए। श्रावण का अर्थ श्रवण से है। इसलिए श्रावण मास हमें अपने कान खोलकर धर्म और गुरु की वाणी सुनने तथा उसे आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।
भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण दिवस का उल्लेख करते हुए मुनि श्री समतासागर जी ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ के जीवन में अनेक महत्वपूर्ण प्रसंग हैं, लेकिन मुनि अवस्था में हुआ घोर उपसर्ग उनकी आत्मसाधना की सबसे कठिन परीक्षा थी।  पूर्व भव का कमठ का जीव संवर नामक ज्योतिषी देव बना। पूर्व वैर के संस्कारों के कारण उसने मुनिराज पार्श्वनाथ पर अनेक प्रकार के घोर उपसर्ग किए। यह उपसर्ग लगातार सात दिनों तक चलता रहा। मुनि राज ने इन कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिणामों में समता और वीतरागता बनाए रखी। यह भावना रही कि आत्मा पर अभी कुछ कर्मों का क्षय होना शेष है और यह जीव उन कर्मों के क्षय में निमित्त बन रहा है, तो उसे निमित्त बनने दो। इसी अद्भुत समता और आत्मसाधना के बीच पार्श्वनाथ भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई। केवलज्ञान प्राप्त होते ही उपसर्ग स्वतः समाप्त हो गया और समवसरण की रचना हुई।

उन्होंने कहा कि पार्श्वनाथ भगवान की क्षमा का प्रभाव इतना महान् था कि जिस जीव ने अनेक भवों तक उनके जीव के प्रति वैर रखा और उपसर्ग किए, उसी के परिणामों में भी परिवर्तन आया। समवसरण में संवर देव को पश्चाताप हुआ और उसने सम्यक्त्व की प्राप्ति की। मुनि श्री ने कहा कि वैर का अंत वैर से नहीं, क्षमा और समता से होता है। पार्श्वनाथ भगवान का जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, साधक को अपने परिणामों की निर्मलता नहीं छोड़नी चाहिए। इस अवसर पर मुनि श्री पवित्र सागर महाराज एवं संघस्थ सभी ऐलक क्षुल्लक मंच पर विराजमान थे। 

सदगुवा जैन मंदिर में वार्षिक महामस्तकाभिषेक.. दमोह। श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान के निर्वाण कल्याणक (मुकुट सप्तमी) के पावन अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन सदगुवां मंदिर, सागर नाका, दमोह में आज 19 अगस्त को वर्ष में एक बार आयोजित होने वाला महामस्तकाभिषेक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी श्री अजय भैया जी (झापन, तमूरा वाले) के निर्देशन में आयोजित इस विशेष महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक एवं पूजन कर धर्मलाभ प्राप्त किया। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर आचार्य श्री सुनील सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री सुश्रुत सागर जी का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। मुनिश्री ने भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने कठोर तप, संयम एवं आत्मसाधना के माध्यम से कर्मों का क्षय कर मोक्ष पद प्राप्त किया। उनका जीवन हमें अहिंसा, करुणा, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। महोत्सव में नीचे की वेदी पर प्रातः प्रथम महामस्तकाभिषेक तथा मध्य वेदी पर महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाडू समर्पण एवं दीपोत्सव भक्तिभाव से सम्पन्न हुआ। प्रथम अभिषेक एवं शान्तिधारा करने का सौभाग्य महापात्रों को प्राप्त हुआ। दोपहर में श्री कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया।
जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ अहिंसा, संयम, तप एवं करुणा के महान संदेशवाहक थे। सम्मेद शिखर जी की पावन भूमि पर उन्होंने समस्त कर्मों का क्षय कर मोक्ष पद प्राप्त किया। भगवान का निर्वाण कल्याणक श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, संयम एवं मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। पूरे आयोजन के दौरान सदगुवां मंदिर परिसर भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों एवं भक्तिभाव से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने परिवार सहित सहभागिता कर अभिषेक, पूजन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का धर्मलाभ प्राप्त किया। महोत्सव की सफलता में सकल दिगम्बर जैन समाज, सदगुवां मंदिर समिति तथा आयोजन में तन-मन-धन एवं समय से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, महापात्रों, कार्यकर्ताओं, दानदाताओं एवं सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया..
आर्यिका संघ के सानिध्य में निर्वाण महोत्सव मनाया.. जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ के मोक्ष कल्याणक पर श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर जी दमोह में आर्यिका रत्न चिंतन मति माताजी के ससंघ सानिध्य में मोक्ष कल्याणक महोत्सव भक्ति भाव के साथ मनाया गया. इस अवसर पर सुबह 7 बजे मुलनायक  श्री पारसनाथ भगवान का मस्तकभिषेक संपन हुआ..
 तत्पश्चात  23 शांति धारा आर्यिका रत्न  चिंतन मति माताजी के मुखारविंद से संपन्न हुई श्री पारसनाथ भगवान के पूजन निर्वाण कांड उपरांत निर्वाण लाडू समर्पित किए गए. इसके बाद श्री शांतिनाथ महामंडल विधान त्रिमूर्ति परिसर में संपन्न हुआ. दोपहर में  माताजी द्वारा रचित कल्याण मंदिर विधान आयोजन माता जी के सानिध्य में भक्ति भाव से संपन्न हुआ शाम को महा आरती का आयोजन किया गया.जिस में बड़ी संख्या में सकल जैन समाज की मौजूदगी रही..
हटा में पार्श्वनाथ को निर्वाण लाढू चढाया, जिनालयों में गूंजे जयकारें हटा में जैन धर्म के तेईसवें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ  का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मुकुट सप्तमीं के रूप में मनाया गया। नगर के चारों जैन मंदिरों में भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा का भक्तों द्वारा सामूहिक रूप से संगीतमय मंगल अभिषेक किया गया,

 शांतिधारा में श्रद्धालुओं ने सहभागिता दर्ज कराई, श्रीजी को अर्घ्घ व लाढू समर्पित किये गयें।नगर के श्री पार्श्वनाथ  दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ  दिगम्बर त्रिमूर्ति मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ  का महामस्तकाभिषेक किया गया जहां भक्तों के द्वारा लम्बी कतार के साथ श्रीजी का अभिषेक  किया। संगीतमय पूजन भी हुआ। 

इस मंगल अवसर पर विधान पूजन का आयोजन भी भक्ति भाव के साथ किया गया सभी कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं श्रद्धालु की भी उपस्थित रहे।

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