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पितृपक्ष में वृद्धाश्रम में सारथी विश्वकर्मा महिला संगठन ने किया सेवा कार्य.. इधर श्रद्धा-भक्ति से मनाया गया आचार्य सुनील सागर जी का अवतरण दिवस..

पितृपक्ष में वृद्धाश्रम में महिला संगठन ने किया सेवा कार्य

दमोह। सारथी विश्वकर्मा महिला संगठन, दमोह द्वारा आज वृद्धाश्रम में सेवा एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वृद्धजनों के साथ समय बिताकर उन्हें अपनापन एवं सम्मान का भाव देना तथा उनकी दैनिक आवश्यकताओं में सहयोग करना रहा। इस अवसर पर संगठन की महिलाओं द्वारा वृद्धजनों को दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री वितरित की गई। इसके साथ ही सभी वृद्धजनों के लिए चाय एवं स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की गई।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हनुमान चालीसा पाठ एवं भजन संध्या रहा। भजन संध्या में अरमान विश्वकर्मा ने अपनी मधुर आवाज से भजनों की प्रस्तुति दी, जबकि यशवंत विश्वकर्मा ने ढोलक पर संगत प्रदान की। विशेष बात यह रही कि वृद्धाश्रम के वृद्धजनों ने भी उत्साहपूर्वक भजनों में सहभागिता की और संगठन की महिलाओं के साथ मिलकर भजन गाए। पूरे वातावरण में भक्ति, आत्मीयता और आनंद का सुंदर संगम देखने को मिला।कार्यक्रम का आयोजन एवं समस्त व्यवस्थाएं सारथी विश्वकर्मा समाज कल्याण सेवा संगठन महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती एकता विश्वकर्मा के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष श्रीमती रूपा शर्मा की विशेष उपस्थिति रही।
इस अवसर पर डॉ॰ श्रीमती संगीता विश्वकर्मा, कृष्णा विश्वकर्मा, भारती विश्वकर्मा, सीमा विश्वकर्मा, निशा विश्वकर्मा, रीना शर्मा, शशि विश्वकर्मा, आशा विश्वकर्मा, आरती विश्वकर्मा, सोमा विश्वकर्मा, ज्योति शर्मा, प्रीति शर्मा, कविता विश्वकर्मा, पूजा विश्वकर्मा, सुषमा विश्वकर्मा माया विश्वकर्मा प्रियंका विश्वकर्मा विशाखा विश्वकर्मा रेखा विश्वकर्मा, नीता विश्वकर्मा संगीता विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं की उपस्थिति रही।कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने वृद्धजनों के साथ आत्मीयता से समय बिताया और उन्हें यह एहसास कराया कि समाज उनके साथ खड़ा है। संगठन की इस पहल को वृद्धजनों के लिए सेवा, सम्मान संवेदनशीलता की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया गया।
श्रद्धा-भक्ति से मनाया आचार्य सुनील सागर जी का अवतरण दिवस.. दमोह। प्राकृत भाषा, ब्राह्मी लिपि एवं अध्यात्म के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले सिद्धहस्त आचार्य श्री सुनील सागर जी का अवतरण दिवस भाई जी मंदिर में आचार्य श्री के शिष्यद्वय मुनि श्री श्रुतेश सागर जी एवं मुनि श्री सुश्रुत सागर जी के सानिध्य में किया गया। शुभारंभ दीप प्रज्वलन, मुनिद्वय के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट के  पश्चात आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की संगीतमय पूजन संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ पूजन-अर्चन कर आचार्य श्री के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। विशेष आकर्षण आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के जीवन, साधना, अध्ययन और व्यक्तित्व पर आधारित संपूर्ण नाटिका रही। नाटिका के माध्यम से आचार्य श्री के तप, त्याग, अध्ययनशीलता, प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी लिपि के प्रति उनके समर्पण तथा अध्यात्म साधना के विभिन्न पक्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने सराहा।
इस अवसर पर विद्वानों द्वारा आचार्य श्री के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने बताया कि आचार्य श्री का जन्म टीकमगढ़ जिले के तिगोड़ा में हुआ था। आचार्य श्री विद्यासागर जी से ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण करने के पश्चात उन्होंने साधना के मार्ग पर निरंतर प्रगति की और अंकलीकर परंपरा में पट्टाचार्य पद से सुशोभित हुए। उनका जीवन अध्ययन, अध्यात्म, तप और समाज के आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए समर्पित रहा है। मुनि श्री श्रुतेश सागर जी एवं मुनि श्री सुश्रुत सागर जी  ने आचार्य श्री के जीवन से प्रेरणा लेते हुए अध्ययन, संयम, तप और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। समारोह में  जैन पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंघई, महामंत्री पदमचंद खली, भाई जी मंदिर कमेटी के समस्त पदाधिकारी, चातुर्मास संयोजन कमेटी, त्यागी-व्रती आहारशाला समिति सहित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक समितियों के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।इसके साथ ही भाई जी मंदिर टंडन बगीचा, नेमीनगर मंदिर, सिंघई मंदिर, शिवनगर, राजीव कॉलोनी जबलपुर नाका आदि के महिला मंडल एवं श्रावकगण सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। 

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