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विरागोदय तीर्थ पथरिया में निमित्त ज्ञानी आचार्यश्री विमल सागर जी की जन्म जयंती एवं क्षमा वाणी पर्व.. देश के विभिन्न क्षेत्रों के गुरू भक्तों ने सहभागिता दर्ज कराई.. न क्रोधी बनो न अहंकारी बनो बस क्षमा स्वभावी बनो.. गणाचार्य विराग सागर जी..

 न क्रोधी बनो न अहंकारी बनो बस क्षमा स्वभावी बनो..

 दमोह। पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व समापन उपरांत प. पू. भारत गौरव गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज ससंघ के सानिध्य में विरागाेदय तीर्थ पथरिया में वृहद्ध रूप से क्षमा वाणी पर्व संपन्न हुआ। जिसमें बाल ब्रह्मचारी शोभित भैया भोपाल ने मंगलाचरण रतनचंद पूर्व प्राचार्य ने विनयांजलि प्रस्तुत की, श्रीमती रश्मि एवं समस्त ग्रुप ने एवं जिया एंड ग्रुप ने भक्ति नृत्य कर सभा को भक्तिमय बनाया कार्यक्रम का सफल संचालन रोहित जैन ने किया। इस दौरान परम पूज्य निमित्त ज्ञानी आचार्य श्री विमल सागर जी महामुनि राज की 107 वीं जन्म जयंती महा महोत्सव के पावन अवसर पर पूज्य गुरुवर की महापूजा संपन्न हुई। उपरांत अहमदाबाद गुजरात से आए जयंती भाई शाह  गुरु भक्त परिवार ने पूज्य गुरुदेव का पाद प्रक्षालन शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
इस पावन अवसर पर गुरुवर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी एक साथ दो पर्व को मना रहे हैं एक तो क्षमा वाणी पर्व और दूसरा परम पूज्य क्षमता मूर्ति आचार्य विमल सागर जी महामुनिराज की 107 वीं जन्म जयंती पर्व। बंधुओं क्षमावाणी पर्व के लिए उत्कृष्ट पद प्रदान करने वाली हुआ करती है ऐसी परमोत्कर्ष प्रदायी क्षमा को जिस जिस ने भी धारण किया है संसार से तर गया। आचार्य गुरुवर के बारे में देखें तो गुरुवर की साधना इतनी विशेष थी कि जो भी उनके चरणों में जाता था उसकी समस्त विथाएं सहज दूर हो जाती थी। ऐसे अनेक उदाहरण है जब आचार्य महाराज ने अपने निमित्त ज्ञान से अनेकानेक लोगों के कष्टों को दूर किया है।

बतलाते हैं यह सब उनके लिए बहुत सहज की बात थी एक बार गुरुवर बिहार कर रहे थे कि तभी सामने से आता हुआ एक व्यक्ति निराश मुद्रा मैं दिखा गुरु बने उसको बुलाया और कहा देख यह अच्छी बात नहीं कि तुम घर की लड़ाई को कोर्ट कचहरी तक लेकर जाए तू जा और अपने बड़े भैया के चरणों में पढ़कर माफी मांग ले तेरी परेशानी सहज ही दूर हो जाएगी। उसी व्यक्ति ने गुरुवर की बात मान ली और नतीजा यह निकला कि सालों साल से चली आ रही लड़ाई का निपटारा हो गया जहां पर ले बड़ा भैया एक पगली जमीन नहीं दे रहा था वही गुरुवर के प्रभाव से और तो क्या क्षमा मांगने मात्र से भाई लड़ाई जानवर में समाप्त हो गई और बड़े भैया ने उसे सारी जमीन खुशी से दे दी।
बंधुओं..... हम बाहर से कचरे को साफ करते हैं किंतु अपने अंदर के कचरे को साफ करने का किंचित भी प्रयास नहीं करते। हिंदी साहित्य में एक उदाहरण मिलता है कि जब पांचो पांडव अपने पापों को धोने हेतु गंगा स्नान के लिए जा रहे थे उन्होंने उन्होंने इस हेतु किसने से भी आग्रह किया किंतु किसने तो जान रहे थे कि केवल शरीर के स्नान से पापों का प्रक्षालन कदापि नहीं हो सकता तथापि उन्होंने पांडव को प्रैक्टिकल में समझाया अर्थात उन्होंने पांडव के लिए एक तुम्बी दी और कहां कि मैं अभी स्नान हेतु जाने के लिए समर्थ नहीं हूं अतः आप मेरी तुम्बी को मेरे प्रतिनिधि के रूप में लेकर जाएं और उसे स्नान कराएं जिससे बह शुद्ध हो सके।
पांडवों ने तुम्बी को ले जाकर 108 बार स्नान कराया और वापस लाकर श्री कृष्ण के लिए सुपुर्द कर दी और कहां लीजिए आपकी तुम्बी शुद्ध हो गई है तो आज हम इसका ही प्रसाद लेते हैं उन्होंने उस तुम्बी को फोड़कर पांडवों को दी। जैसे ही पांडवों को मुंह में रखा तो थू थू करने लगे क्यों? क्योंकि, तुम्बी कड़वी थी। बंधुओं यही हमारा हाल है हम बाहर से तो गलती को स्वीकार करते हैं किंतु आंतरिक भावों से नहीं कर पाते यदि इस क्षमावाणी पर्व पर बाहर से ही नहीं आंतरिक भावों से क्षमा मांगना एवं करना प्रारंभ कर दीजिए तो आपका क्षमां वाणी पर्व मनाना सार्थक हो जाएगा।  इस अवसर पर गाजियाबाद, अहमदाबाद, दमोह, लखनऊ, एटा, गढ़ाकोटा ,टीकमगढ़, सागर, महाराष्ट्र, चंदला, गायत्री परिवार समिति, राजेन्द्र गुरु, पूर्व विधायक लखन पटैल, पूर्व मंडी अध्यक्ष खरगराम पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष लक्षमण सिंह, कपिल दुबे, टी आई रजनी शुक्ला परिवार सहित आदि गुरु भक्तों ने गुरु सानिध्य क्षमावाणी पर्व मनाया। विरागोदय से रोहित जैन की रिपोर्ट

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