शिखरजी जैन एकता एवं तीर्थ संरक्षण रैली आज
दमोह।
जैन समाज के सर्वोच्च शाश्वत तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखरजी पर्वत को पर्यटन
स्थल घोषित किए जाने के झारखंड सरकार के प्रस्ताव का देशव्यापी विरोध हो
रहा है। देशभर में जैन समाज द्वारा इसके विरोध में महा महिम राष्ट्रपति
महोदय के नाम ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। इसी कड़ी में दमोह की सकल जैन समाज
द्वारा 20 दिसंबर को जैन एकता एवं तीर्थ संरक्षण रैली का आयोजन किया गया
है।
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा
सागर जी महाराज के आवाहन एवं नन्हे मंदिर जी में विराजमान मुनि श्री सुब्रत
सागर जी महाराज की प्रेरणा से दमोह की श्री दिगंबर जैन पंचायत एवं सकल जैन
समाज के द्वारा जैन एकता एवं तीर्थ संरक्षण रैली का आयोजन मंगलवार 20
दिसंबर 2022 को प्रातः 11:00 जैन धर्मशाला से किया गया है। यह विशाल रैली
घंटाघर अंबेडकर चौक कीर्ति स्तंभ होते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचेगी।
इस अवसर पर सम्मेद शिखरजी पर्यटन नहीं पवित्र क्षेत्र घोषित कराने की मांग
को लेकर महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा।
दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई ने सकल जैन समाज से अपने
व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखकर तीर्थ संरक्षण रैली में शामिल होकर जैन एकता
का परिचय देने की अपील की है। वहीं आयोजन को सफल बनाने के लिए जैन समाज के विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी एवं युवा वर्ग जैन समाज के संस्थानों में पहुंचकर दुकानों को बंद रखकर रैली में शामिल होने की अपील कर रहे हैं।
अभाना जैन समाज ने ज्ञापन सौपा..
इधर सोमवार को जिले के
विभिन्न क्षेत्रों में जैन समाज द्वारा रैली निकालकर राष्ट्रपति महोदय के
नाम संबोधित ज्ञापन सौंपे गए। अभाना जैन समाज के प्रमुख लोगों ने बाइक रैली
के रूप में जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्ट्रेट कार्यालय में सम्मेद शिखरजी
मामले को लेकर एक ज्ञापन सौंपा जिसमें शिखर जी पर्वत को पर्यटन नहीं पवित्र
क्षेत्र घोषित किए जाने की मांग की गई। इसी तरह तेंदूखेड़ा में जैन समाज
द्वारा ज्ञापन सौंपा जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके पूर्व रविवार को
बांदकपुर में सकल जैन समाज द्वारा रैली निकालकर पुलिस चौकी पहुंचते हुए
तहसीलदार को राष्ट्रपति महोदय के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया था। वही
इसके पूर्व नोहटा तथा जबेरा जनपद क्षेत्र के विभिन्न में गांव में निवास
करने वाली सकल जैन समाज द्वारा भी ज्ञापन सौंपे जा चुके है।
भगवान पारसनाथ चंद्रप्रभु का जन्म तप कल्याणक
दमोह।
जैन धर्म के अष्टम तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु एवं 23वें तीर्थंकर भगवान
पारसनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव कुंडलपुर सहित जिले के सभी जैन
मंदिरों में भक्ति भाव के साथ मनाया गया इस अवसर पर दोनों तीर्थंकर
प्रतिमाओं का सभी मंदिरों में सामूहिक अभिषेक शांति धारा करके पूजन विधान
किया गया।
इसी कड़ी में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हें मंदिर जी में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज के सानिध्य में भगवान पारसनाथ और चंद्र प्रभु का जन्म तप कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर छोटे पारसनाथ
बमोरिया बेदी पर प्रथम बार महा मस्तकाभिषेक का आयोजन किया गया। मुनि श्री
के मुखारविंद से 108 कलशो से तीर्थंकर प्रतिमाओं का सौधर्म इंद्र द्वारा
प्रथम मस्तकाभिषेक किया गया। उसके बाद सभी इंद्र गणों ने बारी बारी से
भगवान का मस्तकाभिषेक किया।
इसके बाद मुनि श्री के मुखारविंद से मूल नायक 5
प्रतिमाओं के अलावा पारसनाथ भगवान की आठ अन्य प्रतिमाओं का प्रथम बार एक
साथ शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रावक जनों को प्राप्त हुआ। आयोजन को सफल
बनाने में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष गिरीश नायक, महामंत्री चक्रेश सराफ,
कार्यक्रम संयोजक राजेश हिनोति के अलावा सभी पदाधिकारियों सदस्यों आसामी
जनो का विशेष योगदान रहा।
16 दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान आज से
श्री
पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर जी में मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज
के सानिध्य में 16 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन किया जा
रहा है 20 दिसंबर 2022 से 4 जनवरी 2023 तक यह आयोजन प्रतिदिन 7:30 से
प्रारंभ होगा इस विधान में प्रतिदिन 4 परिवारों को श्रावक श्रेष्ठी बनकर
विधान करने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
वही प्रातः 9:00 बजे से मुनि श्री के
प्रवचन ओं का लाभ भी सभी को प्राप्त होगा। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष गिरीश
नायक ने सकल जैन समाज से आयोजन में शामिल होकर धर्म लाभ की अपील की है।




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