सेनानी हुकुमचंद जैन को राजकीय सम्मान से विदाई
दमोह। लोकतंत्र सेनानी श्री हुकुमचंद जैन जी निवासी असाटी वार्ड दो का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण होंने पर नन्हे मन्दिर जी से डोला के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। तथा जटा शंकर के समीप गोशाला परिसर में अंतिम विदाई दी गई। इस अवसर पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
इस दौरान दमोह की विधायक जयंत मलैया, तहसीलदार रॉबिन जैन, कोतवाली मनीष कुमार, आरएसएस कमलेश पटेल जी, आरआई गौरी शंकर, पटवारी, लाइन आफिसर दिनेश गोस्वामी के अलावा सकल जैन समाज के लोग परिवार जन समाजसेवी जन विशेष रूप से मौजूद रहे।
शिव महापुराण ही विश्वनाथ का अक्षरकार शरीर- श्री भगवान वेदांताचार्य रसिक.. दमोह। शिव कथामृत के अवसर पर साकेत पीठाधीश्वर श्रीमहंत श्रीभगवान वेदांताचार्य जी ने विशेष व्याख्यान में शिव की महिमा का गुणगान करते हुए काशी तीर्थ में सत्संग का सैद्धांतिक पक्ष बताया। वेद की व्याख्या में शिवो वेदः वेदों शिवः की पूर्व पैठीका अठारह महापुराण में सम्लंकृत की गई है, जिसमें शिव महापुराण चतुर्थ स्थान पर है।
शिव के चरित्र का लीला माधुर्य जिसकी संज्ञा पौराणिक संस्कृति में ही देखने को मिलती है भारतीय अध्यात्म सूत्रात्मक है। कथाए संस्कृति को मानव की एक ऐसी देन हैं, जो इतिहास संजोकर सत्य को स्थापित करती हैं। यह बात अलौकिक है, जिसमें शिव केवल वर्णों में नहीं, सूक्तों में नहीं, ऋचाओं में नहीं वेद में नहीं, वेदना की पुकार में समाहित हो चले, भक्ति का निनाद जहां डमरू से बोला तो भक्तों का मन फिर कभी नहीं डोला, क्योंकि यही है भोला, जिसके हाथ में है भाला और जटा मुंड माला यद्यपि स्वरूप का दर्पण अद्भुत है वैभव की पराकाष्ठा से ऊपर यदि कोई है तो एक नाम देवो का देव महादेव बस यही से प्रारंभ हुआ श्रुति बोधक ज्ञान का, जो समाहित होता है तो संहार और प्रकाशित होता है तो सृष्टि, डमरू के स्वर ने 14 बार निनाद किया, और शब्द को भी आकार आ गया, फिर सृष्टि को कैसे नहीं आता। ब्रह्मा विष्णु हैरान संसार बनाते हम पालते हम पर संहारक कैसे पालक और रचिता बन गया ।इसी ज्ञान की पराकाष्ठा को उजागर करता यह शिव महापुराण का अक्षराकार शरीर जिसे श्रवण कर तत्व बोध को प्राप्त किया जाता है। श्री श्रीभगवान वेदांताचार्य ने पुनः कहा पुराण आज के समय में जनमानस में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का एकमात्र साधन है। यह हमारी सैद्धांतिक पृष्ठभूमि को मजबूत करता है। सनातन परंपरा की अवधारणा एक दिव्या चेतना पुंज की अलौकिक शक्ति में समाहित है। जिसमें त्रिदेवों का साकार स्वरूप स्वतः विद्यमान है, जो अपनी सहजता का दिग्दर्शन कराके संसार में ज्योतिर्लिंग विश्वनाथ के रूप में काशी की धरा पर स्थापित है। बही फलाहारी बाबा संत सेवा ट्रस्ट के महंत श्री राम दास त्यागी महाराज एवं उनके गुरु योगी राज श्री राम करण दास जी बाबा नित नूतन कथा का पूर्ण श्रवण गंभीरता से कर रहे है जिसमें आपार जन मानस भाग ले रहा है।मध्यप्रदेश शिक्षक संघ प्रांतीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक संपन्न.. दमोह। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक 06 एवं 07 दिसंबर को मानस भवन, गुना में संपन्न हुई। बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, संगठन विस्तार, शिक्षकीय समस्याओं एवं आगामी कार्ययोजना पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। बैठक का शुभारंभ अखिल भारतीय संगठन मंत्री माननीय महेंद्र कपूर जी, प्रांताध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर, प्रांतीय सह संगठन मंत्री श्री हीरालाल तिरौले, महामंत्री श्री राकेश गुप्ता तथा प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती राजश्री मरकाम द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। सरस्वती वंदना सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत की गई। अखिल भारतीय संगठन मंत्री ने प्रत्येक विकासखंड में मंडल रचना पूर्ण करने हेतु 21 या 25 दिसंबर को जिला स्तरीय बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सदस्यता अभियान, संगठन की त्वरित सूचना प्रणाली तथा “हमारा विद्यालयदृहमारा तीर्थ” अभियान पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने यह भी बताया कि 1 सितंबर को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में देशभर के 1 करोड़ 30 लाख विद्यालयों के 5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए।
बैठक में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा वर्ष 2025-26 के कैलेंडर का विमोचन किया गया। प्रांताध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर ने शिक्षकीय मुद्दों पर चर्चा करते हुए। चतुर्थ क्रमोन्नति आदेश शीघ्र जारी होने, अनुकंपा नियुक्ति सरलीकरण, अर्जित अवकाश विसंगतियों के निराकरण संबंधी जानकारी दी। उन्होंने ई-अटेंडेंस के आधार पर वेतन रोकने के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दोहराई तथा ैप्त् सर्वे में समय-सीमा बढ़ाए जाने को संगठन के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताया। नवीन शिक्षक संवर्ग को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता दिए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि यह संगठन का प्रमुख लक्ष्य है और इस विषय पर माननीय मुख्यमंत्री से चर्चा हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट कहाकृ “संगठन शिक्षकों की असुरक्षा, अहित और अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा।” बैठक में संभाग की ओर से सभागीय अध्यक्ष प्रमेंद्र कुमार जैन ने ई अटेंडेंस मे आने वाली विसंगतियाँ से अवगत कराया, तथा नवीन संवर्ग को नियुक्ति दिनाक से वरिष्ठता दिलाने की मांग रखी। अंत में सभी संभागों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर प्रांताध्यक्ष जी द्वारा संभागीय संगठन मंत्री एवं सह संगठन मंत्रियों के नामों की घोषणा की गई। बैठक मे दमोह से प्रांत सह प्रमुख संजय पाठक हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ, संभागीय अध्यक्ष प्रमेंद्र कुमार जैन, प्रांतीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार जैन, जिला अध्यक्ष कमलेश कुमार सेन, जिला संगठन मंत्री पारस कुमार जैन उपस्थित रहे। बैठक का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ।





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