बुंदेली महोत्सव के नौवें दिन विविध आयोजन
दमोह। बुंदेली संस्कृति और लोककलाओं के संरक्षण को समर्पित बुंदेली गौरव न्यास द्वारा आयोजित बुंदेली महोत्सव 2026 के नौवें दिन सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों की धूम रही। इस अवसर पर 80 और 90 के दशक के सदाबहार गीतों पर महिलाओं द्वारा दी गई मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम की प्रभारी रजनी खरे रहीं। कार्यक्रम में मेले में संरक्षक में डॉ. सुधा मलैया विशेष रूप से उपस्थित रहीं, जिन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और आयोजन की सराहना की।इसी क्रम में स्वर श्री प्रतियोगिता का आयोजन डॉ. स्वाती गौर के निर्देशन में किया गया, जिसमें चयनित प्रतिभागियों ने अपनी मधुर आवाज़ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत खेमचंद अठ्या द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण गणेश वंदना से की गई। दोपहर के सत्र में बच्चों के लिए खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें शिव शिशु विद्यालय, सेंट नॉरबर्ट स्कूल, रामकुमार स्कूल एवं महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं में कांच-चिरंगा, बैलेंस दौड़, बोरा दौड़ एवं लंगड़ी दौड़ शामिल रहीं। सभी प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए गए।आज होगा पेंटिंग प्रतियोगिता
का आयोजन बुंदेली महोत्सव के अंतर्गत आज मेले में पेंटिंग प्रतियोगिता का
आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागि होंगे । मेले के
प्रभारी न्यासी मोहित संगतानी ने समस्त नगरवासियों से बुंदेली महोत्सव में
शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।
एमएलबी स्कूल में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम
दमोह। वार्षिक परीक्षा में सफलता हेतु कड़ीण् मेहनत व परिश्रम जरूरी है। जीवन में धैर्य बहुत आवश्यक है उक्त आशय के विचार विधायक प्रतिनिधि सिद्धार्थ मलैया ने व्यक्त किये। वे स्थानीय एमल स्कूल दमोह में परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद अर्चना जैन ने की। कार्यक्रम का प्रारंभ वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन कलम दवात पूजन एवं दीप प्रज्वलन के द्वारा किया गया। स्कूल की छात्राओं ने सरस्वती वंदना का गायन एवं नृत्य की प्रसुति दी।
विशिष्ट अतिथि पारस जैन व डॉ एलण्सीण् जैन ने छात्रों को प्रेरणा प्रदान की। मुख्य अतिथि सिद्धार्थ मलैया ने आयोजन के प्रयोजन की भूरी.भूरी सराहना की और कहा कि छत्र जीवन से ही नागरिक और देश का निर्माण संभव है। आप आने वाले कल का भविष्य है। ईश्वर ने सबकों अपना अपना टेलेंट दिया है। अर्चना जैन ने छात्रावर्ग को अपने प्रेरक संबोधन से नवीन उत्साह व ऊर्जा का संचार किया और कहा कि प्रातःकाल जल्दी उठना और पर्याप्त पानी पीना आवश्यक है। सभी विद्यार्थियों को आज से मोबाइल से दूरी का संकल्प लेना है..
कार्यक्रम भूरी भूरी सराहना की गई। संचालन प्रदीप जैन शिक्षक ने किया। राष्ट्रपति पुरुस्कृत प्राचार्य डॉ आलोक सोनवलकर ने संस्था के शत्.प्रतिशत परिणाम लाने का वचन दिया और आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की जयंती पर श्रद्धा सुमन व्यक्त किये गए कार्यक्रम में एक हजार से अधिक विद्यार्थी छात्राएं उपस्थित थी।
उन्मुक्त संस्था का सेक्टर स्तरीय हुआ कार्यक्रम
दमोह। आज ग्राम विकास पखवाड़ा के अंतर्गत ग्राम ग्वारी में सेक्टर स्तरीय कार्यक्रम में हुआ जिसमें राहुल पाठक ने बताया मध्यप्रदेश शासन की उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाने हितग्राहियों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा मुख्य वक्ता सुशील नामदेव जिला समन्वयक मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद ने जानकारी देते हुए बताते हुए कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण उद्देश्य से मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा 12 जनवरी से 26 जनवरी तक ग्रामोदय से अभ्युदय अभियान का आयोजन किया जा रहा है, विकासखंड दमोह के सेक्टर अभाना के ग्राम ग्वारी में आयोजन ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति ग्वारी के सहयोग से नवांकुर संस्था उन्मुक्त सर्वजन कल्याण समाज सेवी संस्था दमोह के मार्गदर्शन में किया गया।
दमोह। आज ग्राम विकास पखवाड़ा के अंतर्गत ग्राम ग्वारी में सेक्टर स्तरीय कार्यक्रम में हुआ जिसमें राहुल पाठक ने बताया मध्यप्रदेश शासन की उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाने हितग्राहियों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा मुख्य वक्ता सुशील नामदेव जिला समन्वयक मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद ने जानकारी देते हुए बताते हुए कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण उद्देश्य से मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा 12 जनवरी से 26 जनवरी तक ग्रामोदय से अभ्युदय अभियान का आयोजन किया जा रहा है, विकासखंड दमोह के सेक्टर अभाना के ग्राम ग्वारी में आयोजन ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति ग्वारी के सहयोग से नवांकुर संस्था उन्मुक्त सर्वजन कल्याण समाज सेवी संस्था दमोह के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम में रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया की गया। जिसमें बालिकाओं ने रंगोलिया बनाकर कला का प्रदर्शन किया एसी कड़ी में कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर अतिथियों का पुष्प हार से स्वागत किया गया व राहुल पाठक ने ग्राम विकास पखवाड़ा को लेकर प्रमुख आयामों की जानकारी दी,इस अवसर पर सुशील नामदेव,ने कहा कि आत्मनिर्भर गांव ही आत्मनिर्भर प्रदेश और आत्मनिर्भर देश का निर्माण करेंगे। इसके लिए देश में सहकारिता के विस्तार पर अधिक बल दिया जा रहा है। गांव में लाखों सहकारिता समितियों का गठन किया जा रहा है। खेती, पशुपालन,
मुर्गी पालन, मछली पालन और अन्य माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि का
प्रयास किया जा रहा है, सरपंच प्रतिनिधि कमलेश पटेल ने कहा कि जनहितैषी
योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने से ही ग्रामोदय से अभ्युदय मध्यप्रदेश
अभियान सफल होगा। अंत मे ग्राम की प्रतिभाओं एवं रंगोली प्रतियोगिता के
प्रतिभागियों को पुरस्कृत वितरण किए रतन सिंह, सुनीता जैन, रामस्वरूप
तिवारी, विदुषी तिवारी, राबिया बेगम, आरिफ खान, बनखंडी पटेल, की उपस्थिति
रही एवं आभार पंकज पांडे ने माना।
आदर्श की गूंज में स्थापित सत्य, विष्णु का निश्छल स्वरूपः श्री भगवान वेदांताचार्य
दमोह। एकरूपता के आलोक में भगवान विष्णु का दिव्य उद्घोष आज समसामयिक संदर्भों में उपयोगी है क्योंकि कालचक्र के घूर्णन में जब विचार दिशाहीन होने लगते हैं तब समाज की चेतना बिखरती हुईं प्रतीत होती है, तब भारतीय सनातन परंपरा एक ऐसे तत्त्व का स्मरण कराती है जो भिन्नताओं को नहीं बढ़ाता, अपितु उन्हें एक दिव्य सूत्र में पिरो देता है। वही तत्त्व एकरूपता मैं समाहित हैं और उसी एकरूप चेतना का साकार नाम है भगवान विष्णु जिसका स्वरूप केवल वैकुण्ठ की शोभा नहीं, वह लोकजीवन की अंतर्धारा है। जहाँ सत्य नीति बनकर प्रवाहित होता है, जहाँ आदर्श आचरण में ढलते हैं और जहाँ प्रेम किसी स्वार्थ का दास नहीं रहता बल्कि मौन होकर सक्रिय हो उठता है। वे न किसी पक्ष का समर्थन करते हैं, न किसी वर्ग का विरोध; वे तो धर्म की समता धुरी पर स्थित होकर समस्त सृष्टि को संतुलन प्रदान करते हैं ..
दमोह। एकरूपता के आलोक में भगवान विष्णु का दिव्य उद्घोष आज समसामयिक संदर्भों में उपयोगी है क्योंकि कालचक्र के घूर्णन में जब विचार दिशाहीन होने लगते हैं तब समाज की चेतना बिखरती हुईं प्रतीत होती है, तब भारतीय सनातन परंपरा एक ऐसे तत्त्व का स्मरण कराती है जो भिन्नताओं को नहीं बढ़ाता, अपितु उन्हें एक दिव्य सूत्र में पिरो देता है। वही तत्त्व एकरूपता मैं समाहित हैं और उसी एकरूप चेतना का साकार नाम है भगवान विष्णु जिसका स्वरूप केवल वैकुण्ठ की शोभा नहीं, वह लोकजीवन की अंतर्धारा है। जहाँ सत्य नीति बनकर प्रवाहित होता है, जहाँ आदर्श आचरण में ढलते हैं और जहाँ प्रेम किसी स्वार्थ का दास नहीं रहता बल्कि मौन होकर सक्रिय हो उठता है। वे न किसी पक्ष का समर्थन करते हैं, न किसी वर्ग का विरोध; वे तो धर्म की समता धुरी पर स्थित होकर समस्त सृष्टि को संतुलन प्रदान करते हैं ..
यह उद्गार श्री भगवान
वेदांताचार्य के विष्णु अवतार के संदर्श में कहें गए जिसमें सामाजिक
पुनर्संरचना के युगांतकारी घोष के रूप में प्रतीत होते हैं। रामावतार में
मर्यादा और सत्य एक होकर चरित्र बन जाते हैं जहाँ राजसिंहासन से अधिक मूल्य
वचन का होता है। कृष्णावतार में नीति, प्रेम और कर्म का ऐसा त्रिवेणी-संगम
दिखाई देता है, जिसमें गीता का गंभीर उपदेश भी है और ब्रज की रसधारा भी
दोनों भिन्न नहीं, बल्कि एक ही आत्मतत्त्व की दो ध्वनियाँ हैं। यही विष्णु
की अलौकिक विशेषता है वे विरोध नहीं रचते, वे समन्वय रचते हैं। प्रह्लाद की
रक्षा में प्रकट हुआ उग्र नृसिंह भी करुणा की ज्वाला है, और गजेन्द्र की
आर्त पुकार पर दौड़ा हुआ विष्णु भी न्याय का ही विस्तार है। यहाँ दंड और दया
परस्पर विरोधी नहीं, अपितु धर्मरूपी सूर्य की किरणें हैं। लक्ष्मी विष्णु
का अमर संयोग इस एकरूप दर्शन की सर्वोच्च व्याख्या है। लक्ष्मी जब विष्णु
के वक्षस्थल पर विराजती हैं, तब वह प्रेम का घोष बन जाती है जहां समृद्धि
शोभा पाती है द्य जब धर्म के हृदय से आलिंगित हो भक्ति निश्छल बनी वैभव
यदि विवेकविहीन हो जाए तो अहंकार बनता है, और विवेक यदि वैभव से वंचित हो
जाए तो समाज दुर्बल हो जाता है ।
विष्णु इन दोनों के मध्य संतुलन का नाम
हैं। क्षीरसागर की शेषशय्या पर स्थित विष्णु का शांत स्वरूप यह उद्घोष करता
है कि निश्चल प्रेम वही है जो उथल पुथल में भी स्थिर रहे। वह प्रेम जो
परिस्थितियों से विचलित न हो, जो संकट में भी करुणा का दीप बुझने न दे कृ
वही विष्णु-प्रेम है, वही लोकमंगल का आधार है। इस प्रकार यह स्पष्ट होता है
कि भगवान विष्णु केवल आराध्य मूर्ति नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन हैं। वे
सिखाते हैं कि सत्य यदि प्रेम से विहीन हो जाए तो कठोर बनता है, आदर्श यदि
करुणा से अलग हो जाए तो बोझ बनता है किंतु जब सत्य, आदर्श और प्रेम
एक-दूसरे में विलीन हो जाते हैं, तब वही धर्म समाज की आत्मा बन जाता है। आज
के संक्रमणकालीन समाज के लिए विष्णु तत्त्व का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक
है भक्ति की भावना से विष्णु ही सर्वत्र प्रतिष्ठित रहते हैं । यज्ञ
नारायण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित विष्णु पुराण में श्रद्धा से
समलंकृत जन प्रतिनिधि बड़ चढ़ कर भाग ले रहे।
हिन्दी लेखिका संघ की वसंत काव्य गोष्ठी आयोजित
दमोह। सरस्वती कन्या विद्यालय के सभागार में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मालती असाटी जी के आयोजकत्व में, प्रेमलता उपाध्याय के मुख्यातिथ्य, मंजु राजपूत के विशिष्टातिथ्य एवं संस्था अध्यक्ष पुष्पा चिले की अध्यक्षता में हिन्दी लेखिका संघ की वसंत पंचमी पर्व पर मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। मां हंस वाहिनी के पूजनोपरांत सरस्वती वंदना पुष्पा चिले ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रेमलता नीलम ने किया। आभार मालती असाटी जी ने व्यक्त किया। सभी बहनों ने पीले परिधान में वासंती छटा बिखेरते हुए वसंत के स्वागत में सराबोर रचनाओं का पाठ किया। पुष्पा चिले ने कहा, फिर अनंग सत्कार में, हंसने लगे पलाश, कली, अली उर भर गया, मदमाता उल्लास। डॉ प्रेमलता नीलम ने पढ़ा, वसंत आता, जग को सुख दे जाता, प्रकृति के नियम संग ले आता। प्रेमलता उपाध्याय ने पढ़ा फागुन ने पाती लिखी फिर वसंत के नाम।
दमोह। सरस्वती कन्या विद्यालय के सभागार में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मालती असाटी जी के आयोजकत्व में, प्रेमलता उपाध्याय के मुख्यातिथ्य, मंजु राजपूत के विशिष्टातिथ्य एवं संस्था अध्यक्ष पुष्पा चिले की अध्यक्षता में हिन्दी लेखिका संघ की वसंत पंचमी पर्व पर मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। मां हंस वाहिनी के पूजनोपरांत सरस्वती वंदना पुष्पा चिले ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रेमलता नीलम ने किया। आभार मालती असाटी जी ने व्यक्त किया। सभी बहनों ने पीले परिधान में वासंती छटा बिखेरते हुए वसंत के स्वागत में सराबोर रचनाओं का पाठ किया। पुष्पा चिले ने कहा, फिर अनंग सत्कार में, हंसने लगे पलाश, कली, अली उर भर गया, मदमाता उल्लास। डॉ प्रेमलता नीलम ने पढ़ा, वसंत आता, जग को सुख दे जाता, प्रकृति के नियम संग ले आता। प्रेमलता उपाध्याय ने पढ़ा फागुन ने पाती लिखी फिर वसंत के नाम।
मंजु
राजपूत ने कहा नमन करती शारदे मां, आलोक जग कीजिये। कुसुम खरे ने कहा
सूर्य दिशा देता वसंत ऋतु आने की। मालती असाटी ने कहा आया वसंतों का
त्यौहार, लायी मन में फुहार। मनोरमा रतले ने पढ़ा खुशियों की राजधानी, वसंत
आये द्वार तिहारे हैं। कमलेश शुक्ला ने कहा अपने भीतर बनालो वसंत, खुशियों
का होगा कभी न अंत। शिवकुमारी शिवहरे पतझड के आंगन में अब आये हैं ऋतुराज।
ऊषा शिवहरे स्वागत में ऋतुराज के कलियां मुस्कायीं। पद्मा तिवारी ने पढ़ा
वासंती चूनर ओढ़कर आया है ऋतुराज। डॉ इन्द्रजीत कौर ने कहा तुम्हारे आते ही
कायनात में बदलाव आता है,मौसम मुस्कुराता है। लता गुरु ऋतुराज खुशियों का
कर रहा इज़हार है। उमा नामदेव दुल्हन सी सजी धरा, आ गये वसंत राजकुमार।
अर्चना राय आगमन ऋतु वसंत का हुआ है, मन ने खुशियों को छुआ है। मधुलता
पाराशर घर आंगन वन उपवन,हुआ वसंत का आगमन। डॉ संगीता पाराशर वीणापाणी मां
सरस्वती कब तेरा दर्शन होगा। वसुन्धरा तिवारी ने पढ़ा हे शारदे भवानी मां
कृपा कीजिये। सीमा जैन मां सरस्वती नमन तुम्हे हम सब करते हैं। संगीता
पान्डे कोयल बैठी अमुआ डार, आ गयी वासंती बहार। आराधना राय गेंहू की
बालियां फूलीं, सरसों भी फूली, पलाश चहकने लगा, ऋतुराज जो आगया। अतिथि
सदस्य ममता गुरु ने कहा कि हिन्दी लेखिका संघ की गोष्ठियों में बहुत आनंद
आता है। बहनों की मनभावन कविताएं सुनकर मन बाग बाग हो जाता है।






.jpeg)


0 Comments