बुंदेली दमोह महोत्सव में मेहंदी प्रतियोगिता
दमोहं। शहर
के तहसील ग्राउंड में बुंदेली गौरव न्यास के तत्वावधान में आयोजित बुंदेली
दमोह महोत्सव के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती और पशुपालन के प्रति
जागरूक करने के उद्देश्य से किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम
में अतिथि के रूप में सिद्धार्थ मलैया शामिल हुए। संगोष्ठी में जिले के
सातों विकासखंडों से आए किसानों को कृषि से जुड़ी नवीन और उपयोगी जानकारी
प्रदान की गई।
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अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि बदलते समय में खेती को
टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए प्राकृतिक खेती एक प्रभावी विकल्प के रूप
में उभर रही है। इस पद्धति में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर
प्राकृतिक संसाधनों और जैविक तत्वों का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य
उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए
स्वस्थ एवं सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन करना है। प्राकृतिक खेती के प्रमुख
तत्व प्राकृतिक खेती में गोबर, हरी खाद, कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट जैसे
जैविक उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में
सुधार होता है। कीट नियंत्रण के लिए प्राकृतिक उपाय अपनाए जाते हैं, जैसे कीट-नाशक पौधों का उपयोग, मित्र कीटों का संरक्षण तथा फसल चक्र को बढ़ावा देना। जल प्रबंधन के अंतर्गत ड्रिप इरिगेशन और वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही पशुपालन और फसलों की सहजीवी प्रणाली से प्राप्त गोबर व अन्य पशु-उत्पादों का उपयोग उर्वरक के रूप में कर खेती की लागत कम करने की जानकारी दी गई।किसानों को होने वाले लाभ प्राकृतिक खेती
से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है, सिंचाई का अंतराल लंबा होता है और
रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है। इससे खेती की लागत कम होती है और फसलों
की उत्पादकता में वृद्धि होती है। यह पद्धति किसानों के लिए दीर्घकालीन रूप
से लाभकारी और टिकाऊ सिद्ध हो रही है। पशुपालन एवं गोपालन का महत्व
पशुपालन का उद्देश्य पशुओं का वैज्ञानिक ढंग से पालन-पोषण करना तथा पशु
संवर्धन के माध्यम से नस्ल और आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार करना है। उन्नत
नस्लों का चयन, प्राकृतिक प्रजनन और कृत्रिम गर्भाधान से दुग्ध उत्पादन,
रोग प्रतिरोधक क्षमता और वृद्धि दर में बढ़ोतरी होती है। गोपालन से दूध, घी
और अन्य डेयरी उत्पादों के माध्यम से आय प्राप्त होती है, वहीं गोबर और
गौमूत्र से जैविक खाद बनाकर मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाई जाती है। मेहंदी
प्रतियोगिता व सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम के समय शालिनी जैन, सारिका जैन एवं
ज्योति जैन के निर्देशन में मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें
60 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं
तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। रात्रि में
ब्रज की होली, स्वर श्री एवं स्कूली सामूहिक नृत्य जैसे रंगारंग सांस्कृतिक
कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।खेल
प्रतियोगिताओं का आयोजन दोपहर के समय पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया।
बुंदेली खेल प्रकोष्ठ के प्रभारी विकास जैन ‘डूडू’ ने जानकारी देते हुए
बताया कि बड़ा दौड़, आलू दौड़, तिरंगा दौड़, लंगड़ी और डॉल्फिन जैसी
प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें नवजागृति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
शासकीय विद्यालय एवं कॉलेज, ओजस्विनी उत्कृष्ट विद्यालय की छात्र-छात्राओं
ने भाग लिया। विजेता प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय तृतीय पुरस्कार
प्रदान किए गए सचिव प्रभात सेठ ने सभी नगर वासियों से मेले में शामिल होने
की अपील की है।हटा अस्पताल में 40 लोगों ने किया ब्लड डोनेट.. दमोह।
स्वामीराज सेवा संस्थान द्वारा हटा सिविल अस्पताल में नौवां रक्तदान शिविर
आयोजित किया गया। संस्थान पिछले 8 वर्षों से स्व. स्वामीराज सिंह पटेल की
स्मृति में लगातार सेवा कार्य कर रही है। बीएमओ डॉ. उमाशंकर पटेल के
मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में निधि चौधरी एवं सौरभ चौधरी (दंपति) ने एक
साथ रक्तदान कर प्रेरणा दी। कार्यक्रम में पूर्व जिप अध्यक्ष शिवचरण बड्डा व
जनपद अध्यक्ष गंगाराम पटेल ,डॉ आरपी कोरी, डॉ रविन्द्र चौधरी ने
रक्तदाताओं को प्रोत्साहित किया।
शिविर को सफल बनाने में राजबहादुर पटेल,
उदयभान पटेल, हर्ष पटेल सहित दमोह ब्लड बैंक से लेब टेक्नीशियन मनोज शर्मा,
संजय प्यासी, मनीष श्रीवास्तव एवं अस्पताल स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान
रहा। कुल 40 यूनिट रक्त दमोह जिला अस्पताल की टीम द्वारा संग्रहित किया
गया। लखन दीक्षित, अनिल खंगार, देवेंद्र पटेल, ,चक्रेश जैन, राजेश सिंह
लोधी, उमेश पटेल, कुंदन सिंह राजपूत, प्रेमशंकर पटेल, विपिन गुप्ता, राजन
सिंह, अनुभव ताम्रकार, नीलेश सोनी, भानुप्रताप सिंह संजीव साहू, महेंद्र
पटेल, सुनील विश्वकर्मा, अभय दक्षित, राकेश प्यासी सहित कुल 40 रक्तदाताओं
में रक्तदान कर मानवता की सेवा में सहभगिता निभाई। नेमिनगर में मुनिश्री सौम्यसागर जी के मंगल प्रवचन.. दमोह।
परमेष्ठी का आगमन पंचों के नारियल से नहीं होता वरन भव्य व्यक्तियों के
भाग्य से होता है आपका इतना पुण्य है कि इस काल में भी आपको भगवान के रूप
में निग्रंथ दिगंबर साधु के दर्शन प्राप्त हो रहे हैं। उपरोक्त उदगार मुनि
श्री सौम्य सागर जी महाराज ने नेमीनगर कॉलोनी में अपने प्रातः कालीन मंगल
प्रवचनों में अभिव्यक्त किए। इसके पूर्व मुनि संघ की
नेमी नगर कॉलोनी वासियों ने मंगल अगवानी की मुनि श्री के मंगल प्रवचनों में
दिगंबर जैन पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंघई नेमीनगर कॉलोनी मंदिर समिति के
अध्यक्ष एवं कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रतनचंद घाट पिपरिया पंडित
ध्यानचंद जैन श्रावक कल्याण समिति के महामंत्री सुनील वेजीटेरियन जैन
पंचायत के धार्मिक आयोजन मंत्री संजीव शाकाहारी विनय विनम्र रानू स्मार्ट
अक्षत सेठ प्रकाश जैन आदि की उपस्थिति रही मुनि श्री
ने अपने मंगल प्रवचनों में आगे कहा कि जिन जीवों को जिनवाणी सुनने में आनंद
आता है वह निश्चित ही सम्यक दृष्टि हैं क्योंकि वे अपने कल्याण के प्रति
जागरुक है जिनके खानदान और खान-पान शुद्ध नहीं होता उनकी पीत लेश्या नहीं
बन पाती भोजन शुद्ध नहीं होता तो भाव शुद्ध नहीं हो पाए और यदि पानी शुद्ध
नहीं है तो वाणी भी शुद्ध नहीं होती.. तामसिक आहार सदैव मानव में उत्तेजना
बढ़ता है उसकी बुद्धि विवेक शून्य हो जाती है हमें अपना खान-पान बहुत ही
बारीकी से शुद्धता पूर्वक करना चाहिए जैन दर्शन बहुत वैज्ञानिक दर्शन है
वास्तव में विज्ञान ने जैन दर्शन से बहुत कुछ आधार लिया है आज वैज्ञानिक और
डॉक्टर लोग रात्रि भोजन का निषेध करने लगे हैं जबकि जैन धर्म में अनादि
काल से ही रात्रि में भोजन एवं पानी पीने का निषेध है स्वस्थ रहने के लिए
मनुष्य को शाकाहारी भोजन के साथ-साथ दिन में ही भोजन ग्रहण करना चाहिए
जिसका भोजन और भजन अच्छा होता है उसका शरीर और मस्तिष्क स्वस्थ रहता है।
विष्णु अवतारों की आलोक रेखा ही काल, कर्म और करुणा का संगम- श्री भगवान वेदांताचार्य.. दमोह।
संस्कृतिक दृष्टि से विशेष तथ्य यह है कि विष्णु पुराण सामाजिक व्यवस्था
को भी धर्म से जोड़ता है। इसमें राजधर्म प्रजा के कल्याण का मूल है कहा गया
है कि शासक का वास्तविक वैभव न्याय, दया और संयम में निहित है। गृहस्थ जीवन
को भी तपस्या के समकक्ष मानते हुए कर्मयोग की महिमा का प्रतिपादन विषद रूप
से किया गया है। सनातन परंपरा के दिव्य ग्रंथों में विष्णु पुराण आज भी
धर्म, भक्ति और मानवीय मूल्यों का प्रकाश-स्तंभ बनकर समाज को दिशा प्रदान
कर रहा है। यह उद्गार है श्री भगवान वेदांताचार्य जी के जो विष्णु पुराण की
कथा की गहराई से दार्शनिक व्याख्यान करते हुये पौराणिक आख्यानों का संकलन
सुना रहे है, जो आगे कहते हैं कि सृष्टि के रहस्य, जीवन के कर्तव्य और
मोक्ष के मार्ग का सुगठित दर्शन विष्णु पुराण हैं इस के अनुसार सृष्टि के
मूल में एक ही परम सत्ता भगवान नारायण स्थित हैं। उन्हीं से उत्पत्ति,
उन्हीं में लोकों का विस्तार और उन्हीं में संपूर्ण जगत का लय बताया गया
है। इसलिए पुराण उद्घोष करता है कि सृष्टि, स्थिति और संहार तीनों क्रियाएँ
एक ही दिव्य तत्त्व की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं। ग्रंथ में दशावतारों का
विशद वर्णन मिलता है, जहाँ भगवान का प्रत्येक अवतार अधर्म के अंधकार में
धर्म का दीप बनकर प्रकट होता है। मत्स्य से लेकर कल्कि अवतार तक यह स्पष्ट
किया गया है कि जब जब मानवता पथभ्रष्ट होती है, तब तब ईश्वर करुणा का
स्वरूप धारण कर धरती पर अवतरित होते हैं। श्रीराम मर्यादा के आदर्श हैं तो
श्रीकृष्ण प्रेम, नीति और योग के जीवंत प्रतीक पुराण में कलियुग के लक्षणों
का उल्लेख करते हुए नैतिक पतन, लोभ, असत्य और अहंकार की वृद्धि की चेतावनी
दी गई है, साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया है कि हरि नाम का स्मरण इस युग
का सबसे बड़ा रक्षक है। अंततः कल्कि अवतार द्वारा धर्म की पुनर्स्थापना का
संकेत दिया गया है। विष्णु पुराण का केंद्रीय संदेश आज के समाज के लिए
अत्यंत प्रासंगिक है भक्ति, कर्तव्य और करुणा के संतुलन से ही मानव जीवन
सार्थक बनता है। यह ग्रंथ न केवल धार्मिक चेतना को जाग्रत करता है, बल्कि
राष्ट्र, समाज और व्यक्ति तीनों को नैतिक दिशा प्रदान करता है। विष्णु
पुराण सनातन संस्कृति की वह अमृतधारा है, जो युगों-युगों से बहती हुई आज भी
मानवता को धर्मपथ पर अग्रसर कर रही है। यज्ञ नारायण सेवा समिति के द्वारा
धर्म मार्ग पर कथा एवं यज्ञ मे भारी मात्रा में जनमानस भाग ले रहे हैं। जिला स्तरीय पिट्टू (महिला/पुरूष) प्रतियोगिता संपन्न.. दमोह।
शासकीय कमला नेहरू महिला महाविद्यालय में गुरुवार को जिला स्तरीय पिट्टू
महिला/पुरुष प्रतियोगिता का आयोजन प्राचार्य डॉ जी.पी. चौधरी के मार्गदर्शन
में किया गया! प्रतियोगिता में PMCOE शास. पीजी महावि. एवं शास. कमला
नेहरू महिला महावि. महिला/पुरुष की टीम ने भाग लिया। प्रतियोगिता के
निर्णायक श्री प्रकाश सिंह राजपूत एवं श्रीमती भावना विश्वकर्मा रही, महिला
वर्ग (रानी अवंती बाई लोधी विश्वविद्यालय सागर) में शा. पी जी कॉलेज दमोह
विजेता, केएन कॉलेज उपविजेता, महिला वर्ग (महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड
विश्वविद्यालय छतरपुर) में केएन कॉलेज विजेता, शा. पी. जी कॉलेज दमोह
उपविजेता , पुरूष वर्ग में शा पी जी कॉलेज दमोह ने सहभागिता रही। संचालन डॉ
अवधेश जैन, डॉ आराधना श्रीवास द्वारा किया गया! प्रभारी
डॉ आदेश नामदेव, क्रीड़ा अधिकारी डॉ प्रिया थापा, प्रशासनिक अधिकारी डॉ एन
पी नायक, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ रेखा जैन, डॉ अरुणा जैन, डॉ डी के नेमा, डॉ
आर. पी. अहिरवार, डॉ मालती नायक, समस्त महाविद्यालय स्टाफ, टीम मैनेजर
वरिष्ठ क्रीड़ा अधिकारी डॉ वीपी सिंह, एवं छात्राएं उपस्थित रही। आभार डॉ अवधेश जैन ने किया।
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