अल्का मिश्रा महासभा की महिला जिलाध्यक्ष बनी
दमोह। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा सागर की महिला अध्यक्ष दीपा तिवारी एवं उनकी कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम सूर्य उत्तरायण के पर्व पर सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एडवोकेट अनिल मिश्रा ग्वालियर एवं अन्य अतिथियों में सागर महापौर, बेदीका फाउंडेशन की अध्यक्ष शिल्पी भार्गव, भाजपा जिला अध्यक्ष सागर, ब्राह्मण महासभा के युवा अध्यक्ष भरत तिवारी एवं बड़ी संख्या में समाज के पुरुष और महिला उपस्थित रही। इस अवसर पर दमोह में सामाजिक रूप से सक्रिय एवं समाज सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अल्का मिश्रा दमोह को अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की महिला जिला अध्यक्ष दमोह के रूप में दायित्व सोपा गया है मैं आप सभी का आभार एवं धन्यवाद प्रकट करती हूं आपने जो भरोसा मुझ पर जतया है मैं उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करूंगी। श्रीमती अल्का मिश्रा को जिलाध्यक्ष बनाये जाने पर प्रीति पांडे, रानू मिश्रा, निधी तिवारी, गिरजा त्रिपाठी, पदमा दुबे, सुमन, कविता, रेखा, अनु रिछारिया, कविता राय, नर्मदा एकता सिंह, सीमा रोहित, प्रभात मिश्रा, प्रतीक्षा त्रिपाठी, कृष्णा मिश्रा आदि ने बाधाई दी है।बुंदेली दमोह महोत्सव के छठे दिन संस्कृति, संगीत अंताक्षरी और खेल का रंगारंग संगम.. दमोह।
शहर के तहसील ग्राउंड में बुंदेली गौरव न्यास के तत्वावधान में आयोजित
बुंदेली दमोह महोत्सव के छठे दिन सांस्कृतिक, शैक्षणिक और खेल गतिविधियों
से भरा कार्यक्रम देखने को मिला। दिनभर चले आयोजनों में महिलाओं, बच्चों और
युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर महोत्सव को यादगार बना दिया। कार्यक्रम
की शुरुआत अंताक्षरी प्रतियोगिता से हुई, जिसमें प्रभारी कंचन असाटी एवं
अनीता मरोठी के निर्देशन में 55 महिलाओं ने भाग लिया और एक से बढ़कर एक
शानदार गीतों की प्रस्तुति दी। इसके पश्चात नृत्य श्री प्रतियोगिता आयोजित
की गई, जिसमें चयनित प्रतिभागियों ने अपनी नृत्य प्रतिभा का मनमोहक
प्रदर्शन किया।इसी क्रम में मुक्ति नाट्य मंच के कलाकारों ने कृष्णा
तिवारी के निर्देशन में एक प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत की। नाटिका के
माध्यम से जल संरक्षण का संदेश देते हुए अतीत की जल समस्या, वर्तमान की
बेहतर स्थिति और भविष्य में जल का मोल न समझने से उत्पन्न होने वाली
परेशानियों को सशक्त ढंग से दर्शाया गया। इसके बाद जोगिंदर अहिरवार एवं
उनकी टीम द्वारा “जादू नहीं, विज्ञान” विषय पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने
दर्शकों को समझाया कि जादूगरों द्वारा दिखाया जाने वाला जादू किसी चमत्कार
का परिणाम नहीं, बल्कि हाथों की कला और वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित
होता है। शाम के सत्र में युगल नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया,
जिसमें राइम्स पब्लिक स्कूल, टोरी छात्रावास, संस्कार पब्लिक स्कूल
बटियागढ़, विश्वनाथ पब्लिक स्कूल बकायन, पथरिया देवरान स्कूल सतुआ एवं
शासकीय विद्यालय के बच्चों ने रंगारंग नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की जमकर
तालियां बटोरीं। वहीं दोपहर के समय मेला ग्राउंड में तिरंगा कांच दौड़,
कुर्सी दौड़ एवं लंगड़ी दौड़ का आयोजन किया गया। इसमें शासकीय महारानी
लक्ष्मीबाई उत्तर माध्यमिक विद्यालय, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, सरस्वती
शिशु मंदिर, पॉलिटेक्निक कॉलेज दमोह एवं शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक
विद्यालय अभाना की लगभग 100 छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिताओं के विजेता
विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए।
पुरस्कार वितरण समारोह में एसडीएम आर.एल. बागरी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बुंदेली दमोह महोत्सव में संस्कृति, संगीत, शिक्षा और खेल का यह समागम इन
दिनों शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
यज्ञ ही दशावतारों का जनक : श्री भगवान वेदांताचार्य
दमोह। विशाल हृदय में धारण की हुई यज्ञ के अनंग में समाहित सृष्टि विष्णु के दशावतारों का वह कारण हैं जिसमें सनातन परंपरा गति शील हैं जो चरैवेति का सिद्धांत पोषित करती है यज्ञ केवल वैदिक कर्मकांड नहीं, अपितु सृष्टि का मूल श्वास है। वेद उद्घोष करते हैं “यज्ञो वै विष्णुः”, अर्थात् यज्ञ ही भगवान विष्णु का साक्षात् स्वरूप है। जिस प्रकार शरीर के अंगों से जीवन प्रवाहित होता है, उसी प्रकार यज्ञ के अंगों में समस्त सृष्टि स्पंदित रहती है। आहुति में अग्नि, मंत्रों में देवता, संकल्प में मनुष्य और फल में लोककल्याण निहित है। जब यह यज्ञ-चक्र संतुलित रहता है, तब प्रकृति, समाज और चेतना में सामंजस्य बना रहता है यह कथन है श्री भगवान वेदांताचार्य रसिक जी महाराज का जिनके सानिध्य मे लक्ष्मीनारायण यज्ञ और विष्णु महापुराण की कथा हो रही जिसमें वैदिक दर्शन की विवेचना में वे पुनः कहते हैं कि जब अधर्म, अहंकार और स्वार्थ इस चक्र को बाधित करते हैं, तब सृष्टि की धुरी डगमगाने लगती है। उसी क्षण करुणा के महासागर भगवान विष्णु अवतार धारण कर यज्ञरूपी व्यवस्था को पुनः स्थिर करते हैं। दशावतार इसी यज्ञ-संरक्षण की दिव्य यात्रा हैं। मत्स्य अवतार में उन्होंने प्रलय की अराजक लहरों से वेदों की रक्षा कर ज्ञान-यज्ञ को सुरक्षित किया। कूर्म अवतार बनकर समुद्र-मंथन जैसे महायज्ञ को आधार प्रदान किया। वराह अवतार द्वारा पृथ्वी को अधर्म के गर्त से निकालकर कर्मभूमि को पुनः प्रतिष्ठित किया गया। नृसिंह रूप में भक्तिरूपी यज्ञ की रक्षा हुई, जहाँ न नियम टूटे न वचन केवल धर्म की विजय हों बही वामन अवतार ने दैत्यराज बलि से दान और मर्यादा का यज्ञ कराया। परशुराम ने अत्याचार से पीड़ित पृथ्वी का शुद्धिकरण किया। श्रीराम अवतार में मर्यादा, त्याग और आदर्श शासन का यज्ञ प्रज्वलित हुआ। तो श्रीकृष्ण ने गीता के अमृत वचनों से कर्म, ज्ञान और भक्ति का महासंयोग स्थापित किया। बुद्ध अवतार में करुणा का दीप जला और अंततः कल्कि अवतार अधर्म के तमस को चीरकर धर्म के नवप्रभात का उद्घोष करेंगे। इन अवतारों का लक्ष्य भिन्न प्रतीत होता है, किंतु अंतःस्रोत एक ही सृष्टि के यज्ञ की रक्षा और जब मानव स्वार्थ में डूबकर कर्तव्य भूलता है, तब अवतार स्मरण कराते हैं कि जीवन यज्ञ है और प्रत्येक कर्म आहुति। आज के युग में भी यही संदेश प्रासंगिक है कि यज्ञ केवल अग्निकुंड तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, संयम, सत्य और समर्पण से युक्त जीवन पद्धति है। जब मानव अपने आचरण को यज्ञभाव से जीता है, तभी विष्णु-तत्त्व जाग्रत होता है और सृष्टि पुनः संतुलन की ओर अग्रसर होती है। श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के अंतर्गत प्रमुख यजमान सुरेश चन्द्र शुक्ल (पप्पु गुरु जी), यज्ञ आचार्य पं.आदित्य मिश्र ,एवं डॉ. डी. वी. मिश्र. सहित यज्ञ नारायण सेवा समिति के सदस्य उपस्थित रहे ।
दमोह। विशाल हृदय में धारण की हुई यज्ञ के अनंग में समाहित सृष्टि विष्णु के दशावतारों का वह कारण हैं जिसमें सनातन परंपरा गति शील हैं जो चरैवेति का सिद्धांत पोषित करती है यज्ञ केवल वैदिक कर्मकांड नहीं, अपितु सृष्टि का मूल श्वास है। वेद उद्घोष करते हैं “यज्ञो वै विष्णुः”, अर्थात् यज्ञ ही भगवान विष्णु का साक्षात् स्वरूप है। जिस प्रकार शरीर के अंगों से जीवन प्रवाहित होता है, उसी प्रकार यज्ञ के अंगों में समस्त सृष्टि स्पंदित रहती है। आहुति में अग्नि, मंत्रों में देवता, संकल्प में मनुष्य और फल में लोककल्याण निहित है। जब यह यज्ञ-चक्र संतुलित रहता है, तब प्रकृति, समाज और चेतना में सामंजस्य बना रहता है यह कथन है श्री भगवान वेदांताचार्य रसिक जी महाराज का जिनके सानिध्य मे लक्ष्मीनारायण यज्ञ और विष्णु महापुराण की कथा हो रही जिसमें वैदिक दर्शन की विवेचना में वे पुनः कहते हैं कि जब अधर्म, अहंकार और स्वार्थ इस चक्र को बाधित करते हैं, तब सृष्टि की धुरी डगमगाने लगती है। उसी क्षण करुणा के महासागर भगवान विष्णु अवतार धारण कर यज्ञरूपी व्यवस्था को पुनः स्थिर करते हैं। दशावतार इसी यज्ञ-संरक्षण की दिव्य यात्रा हैं। मत्स्य अवतार में उन्होंने प्रलय की अराजक लहरों से वेदों की रक्षा कर ज्ञान-यज्ञ को सुरक्षित किया। कूर्म अवतार बनकर समुद्र-मंथन जैसे महायज्ञ को आधार प्रदान किया। वराह अवतार द्वारा पृथ्वी को अधर्म के गर्त से निकालकर कर्मभूमि को पुनः प्रतिष्ठित किया गया। नृसिंह रूप में भक्तिरूपी यज्ञ की रक्षा हुई, जहाँ न नियम टूटे न वचन केवल धर्म की विजय हों बही वामन अवतार ने दैत्यराज बलि से दान और मर्यादा का यज्ञ कराया। परशुराम ने अत्याचार से पीड़ित पृथ्वी का शुद्धिकरण किया। श्रीराम अवतार में मर्यादा, त्याग और आदर्श शासन का यज्ञ प्रज्वलित हुआ। तो श्रीकृष्ण ने गीता के अमृत वचनों से कर्म, ज्ञान और भक्ति का महासंयोग स्थापित किया। बुद्ध अवतार में करुणा का दीप जला और अंततः कल्कि अवतार अधर्म के तमस को चीरकर धर्म के नवप्रभात का उद्घोष करेंगे। इन अवतारों का लक्ष्य भिन्न प्रतीत होता है, किंतु अंतःस्रोत एक ही सृष्टि के यज्ञ की रक्षा और जब मानव स्वार्थ में डूबकर कर्तव्य भूलता है, तब अवतार स्मरण कराते हैं कि जीवन यज्ञ है और प्रत्येक कर्म आहुति। आज के युग में भी यही संदेश प्रासंगिक है कि यज्ञ केवल अग्निकुंड तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, संयम, सत्य और समर्पण से युक्त जीवन पद्धति है। जब मानव अपने आचरण को यज्ञभाव से जीता है, तभी विष्णु-तत्त्व जाग्रत होता है और सृष्टि पुनः संतुलन की ओर अग्रसर होती है। श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के अंतर्गत प्रमुख यजमान सुरेश चन्द्र शुक्ल (पप्पु गुरु जी), यज्ञ आचार्य पं.आदित्य मिश्र ,एवं डॉ. डी. वी. मिश्र. सहित यज्ञ नारायण सेवा समिति के सदस्य उपस्थित रहे ।
ग्रामोदय से अभ्युदय अंतर्गत ग्वारी में आयोजन
दमोह।
आज मध्यप्रदेश शासन की उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाने एवं लोकहितकारी
योजनाओं में पात्र हितग्राहियों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा आत्मनिर्भर
मध्यप्रदेश के निर्माण हेतु सकारात्मक वातावरण के सृजन के उद्देश्य से
मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा 12 जनवरी से 26 जनवरी तक ग्रामोदय से
अभ्युदय अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड दमोह के
सेक्टर अभाना के ग्वारी में शासकीय माध्यमिक शाला में आयोजन ग्राम
विकास प्रस्फुटन समिति ग्वारी के सहयोग से नवांकुर संस्था उन्मुक्त सर्वजन
कल्याण समाज सेवी संस्था के मार्गदर्शन में किया गया। प्रथम चरण में रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया की गया। जिसमें छात्रो ने
विभिन्न ग्रामीण रचनात्मक एवं मनमोहक कलाकृतियों का प्रदर्शन किया एसी कड़ी
में कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर अतिथियों
एवं वरिष्ठ जनों का पुष्प हार से स्वागत किया गया व राहुल पाठक ने प्रमुख
आयामों की जानकारी दी,छात्राओं द्वारा सामाजिक कुरुति बाल विबाह पर नुक्कड़
नाटक की प्रस्तुत्तिकरण दिया।जिसकी ग्रामवासियों ने सराहना की,व गीत की
प्रस्तुति हुई।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा सामाजिक समरसता, पर्यावरण
संरक्षण, स्वावलंबन एवं स्वदेशी ,नागरिक सेवा, शिक्षा एवं संस्कार,
नशामुक्त समाज का निर्माण व जिला समन्वयक सुशील नामदेव ने ग्रामवासियों को
शासन की जनकल्याण की योजनाओं की जानकारी देकर पात्र हितग्राहियों की
समस्याओं के निराकरण हेतु संकल्प से समाधान शिविरों की जानकारी देते हुए
मौके पर उपस्थित हितग्राहियों की समस्याओं के निराकरण हेतु मार्गदर्शन
दिया, सरपंच प्रतिनिधि कमलेश पटेल द्वारा मध्यप्रदेश शासन के इस अभियान की
सराहना करते हुए कहा कि जनहितैषी योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने से ही
ग्रामोंदय से अभ्युदय मध्यप्रदेश अभियान सफल होगा।अंत मे ग्राम की
प्रतिभाओं एवं रंगोली प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरुस्कार व मेडल
वितरण किया गया, अतिथियों द्वारा ग्रामोदय से अभ्युदय मध्यप्रदेश कार्यक्रम
में वंदना जैन ब्लाक समन्वयक, रतन सिंह उपसरपंच, धीरज पटेल सचिव ,राबिया
बेगम प्रधान अध्यापक, सरीता जैन, रक्षा तिवारी, प्रेमलाल अहिरवाल, सुनील
कुमार दुबे, जयश्री अठ्या, मनोज चौरसिया शिक्षक एवं स्वसहायता समूह की
महिलाओं, की उपस्थिति रही व सभी का आभार कृष्ण कुमार शर्मा ने व्यक्त किया।

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