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नई शिक्षा नीति 2020 से बदलेगा शिक्षा का स्वरूप : रंजीता गौरव पटेल.. कार्यशाला के दूसरे दिन बताया स्वावलंबन, कौशल विकास और मातृभाषा आधारित शिक्षा का महत्व..

 कार्यशाला के दूसरे दिन बताया स्वावलंबन, कौशल विकास और मातृभाषा आधारित शिक्षा का महत्व

दमोह संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन के डीपीसी कार्यालय सभा कक्ष में विजयवर्धन संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय “नवीन शिक्षण पद्धति 2020” आधारित कार्यशाला का द्वितीय दिवस गुरुवार को उत्साह एवं गंभीर शैक्षणिक विमर्श के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यशाला में जिलेभर से आए जन शिक्षक, बीआरसी एवं शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने सहभागिता की। पूरे आयोजन में नई शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों, क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व, कौशल विकास, स्वावलंबन और भारतीय शिक्षा परंपरा को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रंजीता गौरव पटेल ने दीप प्रज्वलन कर सत्र का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार की मंशा स्पष्ट है कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और संस्कारित नागरिक बनाने का माध्यम बने। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था को रोजगार, कौशल विकास और व्यवहारिक जीवन से जोड़ना आवश्यक हो गया है और नई शिक्षा नीति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि शिक्षक सकारात्मक सोच और नवाचार के साथ कार्य करेंगे तो आने वाली पीढ़ी अधिक सक्षम और जागरूक बनेगी। उन्होंने विशेष रूप से स्थानीय एवं मातृभाषा में शिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि बच्चे अपनी भाषा में अधिक सहजता से सीखते हैं, इसलिए नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं को महत्व दिया जाना सराहनीय निर्णय है।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पटेल ने उपस्थित जन शिक्षकों एवं बीआरसी से संवाद भी किया। इस दौरान शिक्षकों ने विद्यालय संचालन, संसाधनों की उपलब्धता, प्रशिक्षण एवं प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी समस्याएं रखीं। उन्होंने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए यथासंभव निराकरण का आश्वासन दिया। उनके सहज संवाद और सकारात्मक दृष्टिकोण से उपस्थित शिक्षकों में उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम में शासकीय कमला नेहरू महिला महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. असलम खान ने नवीन शिक्षण पद्धति की बारीकियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों की सोच, समझ और व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक व्यापक परिवर्तन है। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, सृजनात्मकता और नैतिक मूल्यों का विकास करना होना चाहिए।

डॉ. खान ने अपने उद्बोधन में सरकार की मंशा, शिक्षा नीति के उद्देश्यों और वर्तमान समय की चुनौतियों पर गंभीरता से चर्चा की। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षकों के प्रश्नों के उत्तर विस्तारपूर्वक देते हुए नई शिक्षा नीति को व्यवहारिक रूप से लागू करने के सुझाव भी दिए। उनका व्याख्यान उपस्थित शिक्षकों को चिंतन एवं मनन के लिए प्रेरित करता रहा। वहीं सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेश पौराणिक ने अपने संबोधन में भारतीय शिक्षा परंपरा और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच संबंधों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था ज्ञान, संस्कृति और व्यवहारिक जीवन का अद्भुत समन्वय थी। नई शिक्षा नीति उसी परंपरा को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने का प्रयास है।
उन्होंने प्रमाणों एवं उदाहरणों के माध्यम से बताया कि क्षेत्रीयता, स्थानीय ज्ञान और मातृभाषा आधारित शिक्षण विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विजयवर्धन संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नई सोच और नई कार्यपद्धति अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने उपस्थित जन शिक्षकों एवं बीआरसी द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर भी विस्तारपूर्वक दिए। कार्यक्रम के दौरान जिनेंद्र जैन ने कार्यशाला की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रशिक्षण सत्रों, उद्देश्यों एवं गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति 2020 के मूल सिद्धांतों एवं व्यवहारिक पक्षों से परिचित कराना है, ताकि विद्यालय स्तर पर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। वहीं किरण उपाध्याय सहयोगी के रूप में पूरे आयोजन में सक्रिय रूप से उपस्थित रहीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों में नई शिक्षा नीति एवं नवीन शिक्षण पद्धति को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। सहभागियों ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोण प्रदान करने के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए नई दिशा देती हैं।

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